'दरबार साहिब से नांदेड़ तक एक ही साजिश, Z-प्लस सुरक्षा में सेंध की हो NIA जांच', सुखबीर बादल पर हमले के बाद भड़के बिक्रम सिंह मजीठिया; नारायण सिंह चौड़ा की जमानत पर उठाए सवाल, महाराष्ट्र के सीएम से की बड़ी मांग

'दरबार साहिब से नांदेड़ तक एक ही साजिश, Z-प्लस सुरक्षा में सेंध की हो NIA जांच', सुखबीर बादल पर हमले के बाद भड़के बिक्रम सिंह मजीठिया; नारायण सिंह चौड़ा की जमानत पर उठाए सवाल, महाराष्ट्र के सीएम से की बड़ी मांग

महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित ऐतिहासिक तीर्थ स्थल 'तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब' में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हुए जानलेवा हमले के बाद राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में उबाल आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने केंद्र और राज्य सरकार से इस पूरे मामले की जांच देश की सर्वोच्च आतंकवाद रोधी एजेंसी 'राष्ट्रीय जांच एजेंसी' (NIA) को सौंपने की जोरदार मांग की है। मजीठिया ने इसे केवल कानून-व्यवस्था का स्थानीय मामला मानने से साफ इनकार करते हुए आरोप लगाया कि यह किसी बड़े आतंकी मॉड्यूल या सीमा पार बैठे विदेशी नेटवर्क द्वारा रची गई एक गहरी और सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने खुफिया तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक इस षड्यंत्र की जड़ तक जांच नहीं होगी, तब तक सच सामने नहीं आ पाएगा।

दरबार साहिब से नांदेड़ तक साजिश का कनेक्शन: दोनों हमलों की संयुक्त NIA जांच की मांग

बिक्रम सिंह मजीठिया ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर विस्तृत बयान जारी करते हुए नांदेड़ की घटना को अत्यंत चिंताजनक और विचलित करने वाला बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि नांदेड़ में हुए हमले को दिसंबर 2024 में अमृतसर के सचखंड श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) के प्रवेश द्वार पर सुखबीर बादल पर हुए जानलेवा हमले से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

मजीठिया ने तर्क दिया कि दोनों घटनाओं की प्रकृति, तरीका और निशाने पर मौजूद व्यक्ति एक ही हैं। इसलिए दोनों हमलों की एक साथ संयुक्त जांच होनी चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या दोनों वारदातों के पीछे एक ही हैंडलर, सिंडिकेट या आतंकी नेटवर्क सक्रिय है। उन्होंने कहा कि जिस तरह बार-बार एक शीर्ष राजनीतिक नेता को गुरुद्वारा परिसरों में निशाना बनाया जा रहा है, वह किसी बड़े और खतरनाक एजेंडे की तरफ इशारा करता है।

'Z-प्लस सुरक्षा में इतनी बड़ी सेंध कैसे?': सेवादार के रूप में घुसे हमलावर पर उठे सवाल

प्रेस और सोशल मीडिया के जरिए मजीठिया ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल को भारत सरकार द्वारा 'जेड-प्लस' (Z+) श्रेणी की शीर्ष सुरक्षा मुहैया कराई गई है, जिसमें चौबीसों घंटे कमांडोज का कड़ा घेरा रहता है। इसके बावजूद एक हमलावर सुरक्षा प्रोटोकॉल को आसानी से लांघते हुए उनके बिल्कुल करीब कैसे पहुंच गया?

मजीठिया ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि नांदेड़ का हमलावर कथित तौर पर गुरुद्वारा साहिब में एक सेवादार के वेश में काम कर रहा था। उन्होंने पूछा कि क्या सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने उस व्यक्ति का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया था? क्या स्थानीय और केंद्रीय खुफिया विभाग के पास इस तरह के संभावित खतरे का कोई इनपुट था? यदि इनपुट था, तो उसे सुरक्षाबलों के साथ साझा क्यों नहीं किया गया और खतरे का सही आकलन करने में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई?

नारायण सिंह चौड़ा की जमानत पर तीखे सवाल: कौन दे रहा है साजिशकर्ताओं को संरक्षण?

मजीठिया ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सुखबीर बादल पर गोली चलाने वाले पूर्व आतंकी नारायण सिंह चौड़ा का मुद्दा भी पूरी आक्रामकता के साथ उठाया। उन्होंने पंजाब पुलिस और अभियोजन पक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जिस व्यक्ति ने दिनदहाड़े देश के एक पूर्व उप मुख्यमंत्री और जेड-प्लस सुरक्षा प्राप्त नेता की हत्या के इरादे से सीधे प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली चलाई थी, उसे महज कुछ ही महीनों के भीतर अदालत से जमानत कैसे मिल गई?

अकाली नेता ने सवाल दागा कि चौड़ा जेल से बाहर कैसे आ गया और उसकी जमानत अर्जी का सरकारी वकीलों ने मजबूती से विरोध क्यों नहीं किया? मजीठिया ने कहा, "यह बेहद गंभीर सवाल है कि आखिर गुरुद्वारे के अंदर का गद्दार कौन है? कौन इस पूरे मामले को दबाने और हत्या के आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहा है? चौड़ा की रिहाई से जुड़े सभी कानूनी घटनाक्रमों और उसके संपर्कों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।"

आतंकी या विदेशी नेटवर्क की आशंका: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से की औपचारिक अपील

बिक्रम सिंह मजीठिया ने आशंका जताई कि नांदेड़ हमले की तारें केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे पंजाब का माहौल खराब करने के लिए विदेशों में बैठे खालिस्तानी और चरमपंथी गुटों की फंडिंग व दिशा-निर्देश हो सकते हैं।

इस खतरे को देखते हुए मजीठिया ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से औपचारिक और सार्वजनिक अपील की है कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें। उन्होंने कहा, "मैं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से पुरजोर मांग करता हूं कि वे नांदेड़ साहिब में हुए हमले की पूरी जांच तुरंत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपें। केवल एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसी ही इस पूरे अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय सिंडिकेट, साजिश के मुख्य मकसद, हथियारों व फंड के स्रोतों और सुरक्षा में हुई खुफिया चूकों का पर्दाफाश कर सकती है।"

धार्मिक स्थलों की पवित्रता और राजनीतिक नेतृत्व की सुरक्षा का बड़ा सवाल

अपने बयान के अंत में बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस मुद्दे को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा कि यह मामला केवल सरदार सुखबीर सिंह बादल की निजी सुरक्षा तक सीमित नहीं है। यह देश के सभी प्रमुख राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा और देश भर में स्थित हमारे सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों की गरिमा और मर्यादा से जुड़ा हुआ मामला है।

मजीठिया ने कहा कि जब देश के सबसे सम्मानित और पवित्र धार्मिक स्थलों—जैसे अमृतसर का श्री हरमंदिर साहिब और नांदेड़ का श्री हजूर साहिब—को राजनीतिक हत्याओं और हिंसक वारदातों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की जाएगी, तो यह देश की आंतरिक शांति और सामाजिक सौहार्द के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन जाएगा। उन्होंने दोहराया कि सिख संगत और देश की जनता इस बात का पूरा सच जानना चाहती है कि इस कायराना हमले के पीछे असली चेहरे कौन हैं, और इसके लिए एनआईए जांच ही एकमात्र पारदर्शी रास्ता है।