आज चंडीगढ़ पहुंचेगी AICC की विशेष टीम, जिलों-जिलों में जनता से सीधा फीडबैक लेकर तैयार होगा 'पीपुल्स मेनिफेस्टो'

आज चंडीगढ़ पहुंचेगी AICC की विशेष टीम, जिलों-जिलों में जनता से सीधा फीडबैक लेकर तैयार होगा 'पीपुल्स मेनिफेस्टो'

पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों का बिगुल अभी से बज चुका है और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्ता में वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पारंपरिक चुनाव प्रचार के पुराने ढर्रे को तोड़ते हुए पार्टी ने इस बार चुनाव से करीब डेढ़-दो साल पहले ही अपना चुनावी रोडमैप तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी कड़ी में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की एक विशेष टीम आज चंडीगढ़ स्थित पंजाब कांग्रेस भवन पहुंच रही है। यह टीम पंजाब में पिछले कई हफ्तों से चल रहे जमीनी राजनीतिक और सामाजिक सर्वे की रिपोर्ट का आंकलन करेगी और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए तैयार किए जाने वाले 'पीपुल्स मेनिफेस्टो' (जनता का घोषणा पत्र) की विस्तृत रूपरेखा तय करेगी।

चंडीगढ़, मोहाली, जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, बठिंडा, पटियाला और संगरूर समेत पूरे मालवा, माझा और दोआबा अंचल में पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय कर दिया गया है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि बंद कमरों या चुनिंदा नेताओं की सलाह से चुनावी घोषणापत्र बनाने का जमाना अब लद चुका है। 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के हाथों मिली करारी शिकस्त से सबक लेते हुए कांग्रेस इस बार जनता की वास्तविक समस्याओं, क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और आम नागरिकों की अपेक्षाओं को सीधे अपने घोषणापत्र में शामिल करने जा रही है। AICC की टीम का चंडीगढ़ आगमन इस रणनीति को अमलीजामा पहनाने का पहला बड़ा औपचारिक पड़ाव माना जा रहा है।

AICC टीम का चंडीगढ़ दौरा: 2027 के लिए कांग्रेस का 'पीपुल्स मेनिफेस्टो' मॉडल

पंजाब कांग्रेस भवन में आज होने वाली बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AICC की समन्वय और मीडिया टीम राज्य के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकर चुनावी माहौल का प्रत्यक्ष फीडबैक लेगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की स्वतंत्र सर्वे एजेंसियां पिछले कई महीनों से राज्य के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में अंदरूनी सर्वे कर रही हैं। इन सर्वे में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के कामकाज, जनता में नाराजगी के बिंदुओं, किसान वर्ग की चिंताओं और विभिन्न जातियों व सामाजिक समूहों की प्राथमिकताओं का डेटा जुटाया जा रहा है।

मेनिफेस्टो कमेटी के चेयरमैन और फतेहगढ़ साहिब से लोकसभा सांसद डॉ. अमर सिंह की अगुवाई में अब तक चंडीगढ़ में कमेटी की दो महत्वपूर्ण बैठकें संपन्न हो चुकी हैं। इन बैठकों में तय किया गया है कि पार्टी का आगामी चुनावी दस्तावेज केवल वादों की फेहरिस्त नहीं होगा, बल्कि पंजाब को आर्थिक और सामाजिक संकट से उबारने का एक व्यावहारिक विजन डॉक्यूमेंट बनेगा। AICC की टीम आज इन प्राथमिक प्रारूपों की समीक्षा करेगी और राष्ट्रीय नेतृत्व के दिशानिर्देशों के तहत राज्य की घोषणा पत्र समिति को आगे का रोडमैप सौंपेगी।

अमृतसर से शुरू होगा राज्यव्यापी महामंथन, सभी 23 जिलों में सीधे जनता से संवाद

कांग्रेस की घोषणा पत्र समिति ने निर्णय लिया है कि मेनिफेस्टो तैयार करने की प्रक्रिया को पूरी तरह विकेंद्रीकृत और सहभागी बनाया जाएगा। इस अभियान की औपचारिक शुरुआत ऐतिहासिक और आध्यात्मिक नगरी अमृतसर से की जाएगी। इसके बाद कमेटी के सदस्य पंजाब के सभी जिलों का सघन दौरा करेंगे। इस राज्यव्यापी यात्रा में केवल पार्टी कार्यकर्ताओं से ही राय नहीं ली जाएगी, बल्कि समाज के सभी हितधारकों के साथ पूरे दिन के विशेष संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे।

समिति के वरिष्ठ सदस्य और सह-चेयरमैन जैसे अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला, पूर्व कैबिनेट मंत्री परगट सिंह, पूर्व मंत्री हरदयाल सिंह कंबोज और सुखबिंदर सिंह सरकारिया जिलों में जाकर सीधे जनता से मुखातिब होंगे। इस मंथन में किसान संगठनों, आढ़ती एसोसिएशनों, व्यापार और उद्योग मंडल के प्रतिनिधियों, कर्मचारी यूनियनों, पेंशनर्स, डॉक्टरों, वकीलों, शिक्षकों, पत्रकारों, सिविल सोसायटी समूहों, बुद्धिजीवियों और युवाओं से लिखित व मौखिक सुझाव लिए जाएंगे। हर जिले की भौगोलिक और आर्थिक समस्याएं अलग हैं; मालवा में भूजल और कैंसर बेल्ट की समस्या है, तो दोआबा में एनआरआई और युवाओं के पलायन का दर्द है, वहीं माझा में सीमावर्ती सुरक्षा और व्यापार का मुद्दा प्रमुख है। समिति इन क्षेत्रीय विविधताओं को ध्यान में रखकर जिला-विशिष्ट एजेंडा तैयार करेगी।

2022 की ऐतिहासिक हार से बड़ा सबक: खोया जनाधार वापस पाने की छटपटाहट

पंजाब में 2017 से 2022 तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस को 2022 के विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस सिमटकर मात्र 18 सीटों पर आ गई थी। उस पराजय की मुख्य वजह अंदरूनी कलह, मुख्यमंत्री बदलने का प्रयोग और जनता से सीधे संवाद का अभाव मानी गई थी।

अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और कोर कमेटी के प्रमुख सुखजिंदर सिंह रंधावा के नेतृत्व में पार्टी एकजुट होकर अपनी खोई जमीन वापस पाने में जुटी है। हालिया लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने पंजाब की 13 में से 7 सीटें जीतकर यह साबित कर दिया था कि राज्य में उसका पारंपरिक वोट बैंक अभी भी बेहद मजबूत है। लोकसभा नतीजों से मिले हौसले को 2027 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत में बदलने के लिए कांग्रेस ने अभी से जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है, ताकि चुनाव नजदीक आने पर किसी जल्दबाजी या अंतर्विरोध की गुंजाइश न रहे।

पंजाब के जलते मुद्दे: बिजली संकट, नशा, कृषि संकट और कानून-व्यवस्था बनेंगे घोषणापत्र के केंद्र

कांग्रेस का नया घोषणापत्र राज्य के ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित होगा। इस समय पंजाब में बिजली की रिकॉर्ड मांग 16 हजार मेगावाट के पार पहुंच चुकी है और 10 में से 5 सरकारी थर्मल यूनिट्स के ठप होने से ग्रामीण व औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली संकट गहरा गया है। इसके अलावा रबी सीजन से पहले डीएपी खाद की भारी किल्लत, आलू और गेहूं उत्पादकों की चिंताएं, पराली प्रबंधन की चुनौतियां और किसानों पर बढ़ता कर्ज ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कांग्रेस ठोस नीति लाने की तैयारी में है।

राज्य में लगातार गहराती नशे की समस्या, सीमा पार से ड्रोनों के जरिए हथियारों व ड्रग्स की तस्करी, गैंगवार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर आम जनता में भारी असुरक्षा की भावना है। उद्योगपतियों से फिरौती मांगने की घटनाएं और उद्योग-धंधों का पंजाब से पलायन भी एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। कांग्रेस की मेनिफेस्टो टीम इन सभी मुद्दों पर संबंधित विशेषज्ञों के साथ बैठकर नीतिगत समाधान तलाशेगी, ताकि जनता को यह विश्वास दिलाया जा सके कि कांग्रेस के पास केवल शिकायतें नहीं, बल्कि पंजाब के पुनर्निर्माण का पुख्ता ब्लूप्रिंट भी है।

अकाली दल और भाजपा के आक्रामक रुख के बीच कांग्रेस का नया राजनीतिक दांव

पंजाब का वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य चतुष्कोणीय मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। जहां एक ओर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी अपनी योजनाओं के दम पर दोबारा वापसी की कोशिश में है, वहीं शिरोमणि अकाली दल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर शहरी हलकों में आक्रामक विस्तार कर रही है। जालंधर और लुधियाना जैसे औद्योगिक शहरों में अन्य दलों के नेताओं का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस के लिए भी एक सतर्क रहने वाला संकेत है।

ऐसी स्थिति में कांग्रेस अपने पारंपरिक ग्रामीण और शहरी संतुलन को साधने के लिए सीधे मतदाताओं के दरवाजे तक पहुंच रही है। AICC टीम के मार्गदर्शन में तैयार होने वाला यह 'पीपुल्स मेनिफेस्टो' कांग्रेस का सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार साबित होगा। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह जनता के ऊपर अपने विचार थोपने के बजाय, जनता के विचारों से सरकार का एजेंडा तय करेगी। आने वाले हफ्तों में जब मेनिफेस्टो कमेटी के सदस्य अमृतसर से लेकर बठिंडा और फाजिल्का तक की धूल छानेंगे, तो पंजाब की सियासत में चुनावी तापमान का और अधिक चढ़ना तय है।