देश भर से ₹7000 तक महंगा बिक रहा लुधियाना में स्टील: दोहरी मार से कराह उठे उद्योगपति, फोरम ने की सरकारी जांच की मांग

देश भर से ₹7000 तक महंगा बिक रहा लुधियाना में स्टील: दोहरी मार से कराह उठे उद्योगपति, फोरम ने की सरकारी जांच की मांग

पंजाब के सबसे बड़े औद्योगिक महानगर लुधियाना का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर इस समय कच्चे माल की भारी महंगाई के भीषण संकट से जूझ रहा है। लुधियाना की रीढ़ मानी जाने वाली स्टील आधारित इंडस्ट्री पर दोहरी मार पड़ रही है। देश के अन्य प्रमुख औद्योगिक केंद्रों और पड़ोसी राज्यों के मुकाबले लुधियाना में स्टील की कीमतें प्रति टन 2,500 रुपये से लेकर 7,000 रुपये तक अधिक वसूली जा रही हैं। कच्चे माल के आसमान छूते दामों ने स्थानीय उद्यमियों की कमर तोड़ दी है, जिससे उनके लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिके रहना मुश्किल हो गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वर्ल्ड एमएसएमई फोरम (World MSME Forum) ने केंद्र और राज्य सरकार से स्टील की कीमतों के निर्धारण, सप्लाई चेन और कीमतों में कथित हेरफेर की उच्चस्तरीय जांच कराने की जोरदार मांग उठाई है।

एक महीने में 5 हजार रुपये प्रति टन का उछाल, रायपुर और कोलकाता से भी महंगा लुधियाना

वर्ल्ड एमएसएमई फोरम द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, लुधियाना में सेकेंडरी स्टील यानी माइल्ड स्टील इंगट (MS Ingot) की कीमतें मौजूदा समय में करीब 49,500 रुपये प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। महज एक महीने पहले यही दर 44,500 रुपये प्रति टन के आसपास दर्ज की गई थी। यानी सिर्फ तीस दिनों के भीतर स्टील में लगभग 5,000 रुपये प्रति टन की बेतहाशा बढ़ोतरी हो चुकी है।

फोरम ने देश के विभिन्न स्टील बाजारों के तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के रायपुर और पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में इंगट की दर करीब 43,000 रुपये प्रति टन है। वहीं कोलकाता में यह 43,900 रुपये, मुंबई में 46,000 रुपये, जम्मू में 46,500 रुपये और ओडिशा के राउरकेला में महज 41,800 रुपये प्रति टन चल रही है। इतना ही नहीं, पंजाब के ही ऐतिहासिक स्टील हब मंडी गोबिंदगढ़ के मुकाबले भी लुधियाना में स्टील करीब 2,500 रुपये प्रति टन महंगा बिक रहा है। इस तरह देश के अन्य बाजारों की तुलना में लुधियाना के उद्योगपतियों को प्रति टन 7,000 रुपये तक अतिरिक्त रकम चुकानी पड़ रही है।

साइकिल से लेकर इंजीनियरिंग उद्योग तक हाहाकार, हाथ से फिसल रहे बड़े ऑर्डर्स

लुधियाना भारत की साइकिल राजधानी होने के साथ-साथ ऑटो कंपोनेंट, कृषि उपकरण, हैंड टूल्स, सिलाई मशीन, फास्टनर और भारी इंजीनियरिंग उत्पादों का एशिया में सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर है। इन सभी उद्योगों में स्टील मुख्य कच्चा माल है। जब प्रति टन स्टील पर 7,000 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है, तो बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली एमएसएमई इकाइयों की उत्पादन लागत (Cost of Production) अचानक बढ़ जाती है।

उद्यमियों का कहना है कि लागत में इस अप्रत्याशित उछाल के चलते उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। यदि वे अपने तैयार उत्पादों के दाम बढ़ाते हैं, तो गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के निर्माता कम दरों पर माल बेचकर उनसे ऑर्डर्स छीन लेते हैं। दूसरी तरफ, पहले से तय पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स पर काम करने वाली इकाइयों को अपनी जेब से भारी घाटा सहना पड़ रहा है। इससे लुधियाना की कई छोटी और मझोली फैक्ट्रियों में उत्पादन घटाने या शटडाउन की नौबत आ रही है।

'एसएमएस और व्हाट्सएप माफिया' की भूमिका पर सवाल, जांच की मांग

वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने स्टील की रोजाना तय होने वाली कीमतों की प्रक्रिया को लेकर बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। फोरम का कहना है कि उद्योग जगत में सुबह होते ही कुछ चुनिंदा अनौपचारिक नेटवर्क द्वारा एसएमएस (SMS) और व्हाट्सएप संदेशों के जरिए स्टील की दरें प्रसारित की जाती हैं। पूरे बाजार में इन अनधिकृत संदेशों को ही मानक बाजार दर मान लिया जाता है।

फोरम ने सवाल उठाया है कि यह तथाकथित 'एसएमएस माफिया' कौन है? इन दरों को तय करने का वैज्ञानिक या आर्थिक आधार क्या है? क्या कुछ संगठित कार्टेल और सटोरिए मिलकर कृत्रिम कमी दिखाकर बाजार की कीमतों को अनैतिक रूप से नियंत्रित कर रहे हैं? फोरम ने मांग की है कि जांच एजेंसियां इस अनौपचारिक नेटवर्क और उनके वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच करें ताकि कीमतों में हेरफेर करने वाले सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सके।

सार्वजनिक क्षेत्र की स्टील सप्लाई का संपूर्ण ऑडिट कराने की अपील

उद्यमियों ने सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख स्टील कंपनियों (जैसे SAIL और RINL) द्वारा पंजाब को आवंटित होने वाले स्टील को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फोरम ने केंद्र सरकार से मांग की है कि सरकारी स्टील इकाइयों से पंजाब को की जाने वाली पूरी सप्लाई चेन का विशेष ऑडिट कराया जाए।

इस ऑडिट में सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा उत्पादित मात्रा, पंजाब राज्य को किया गया आधिकारिक कोटा आवंटन, वास्तविक रूप से भेजी गई सप्लाई और अंत में लुधियाना की पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों तक सीधे पहुंचने वाले माल का पूरा मिलान किया जाना चाहिए। फोरम का आरोप है कि रास्ते में बड़े पैमाने पर जमाखोरी, कालाबाजारी और कृत्रिम अभाव पैदा किया जाता है, जिसके कारण असली मैन्युफैक्चरर्स को महंगे दामों पर ओपन मार्केट से माल खरीदने के लिए विवश होना पड़ता है।

पारदर्शी प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम और बीआईएस प्रक्रियाओं के सरलीकरण की पैरवी

संकट के स्थायी समाधान के लिए वर्ल्ड एमएसएमई फोरम ने भारत सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर एक पारदर्शी 'स्टील प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम' (Steel Price Monitoring System) स्थापित करने की सिफारिश की है। इस पोर्टल पर एक्स-प्लांट कीमत, वास्तविक फ्रेट (मालभाड़ा), डिस्ट्रीब्यूटर मार्जिन और वास्तविक लेनदेन की दरें सार्वजनिक होनी चाहिए ताकि बिचौलियों का खेल खत्म हो सके।

इसके अतिरिक्त, फोरम ने विशेष ग्रेड के स्टील के आयात में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से जुड़ी जटिल और समय लेने वाली प्रक्रियाओं को आसान और तेज करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि जिन विशेष ग्रेड्स का उत्पादन देश में कम होता है, उनके आसान आयात से घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धी माहौल बनेगा और स्थानीय मोनोपॉली टूटेगी। लुधियाना के उद्योगपतियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते स्टील की मनमानी कीमतों पर अंकुश नहीं लगाया, तो पंजाब का इंजीनियरिंग और साइकिल उद्योग बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और मंदी के दलदल में धंस सकता है।