'डबल शिफ्ट बंद कर सिंगल शिफ्ट में चलाएं सरकारी स्कूल...': चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने ली 13 प्रिंसिपलों की क्लास, शिक्षकों की कमी की लिस्ट तलब

'डबल शिफ्ट बंद कर सिंगल शिफ्ट में चलाएं सरकारी स्कूल...': चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने ली 13 प्रिंसिपलों की क्लास, शिक्षकों की कमी की लिस्ट तलब

केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने कड़े और बड़े सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों और शहर के 13 प्रमुख सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान प्रशासक कटारिया ने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि शहर के सरकारी स्कूलों में डबल शिफ्ट की व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से खत्म कर उन्हें अनिवार्य रूप से सिंगल शिफ्ट (Single Shift) में चलाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने स्कूलों में शिक्षकों, प्रिंसिपलों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए विभाग को सभी रिक्त पदों की विस्तृत सूची तत्काल तैयार करने का आदेश दिया। प्रशासक ने भरोसा दिलाया कि वे नए पदों के सृजन और नियमित भर्तियों के लिए सीधे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से बातचीत कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगे।

डबल शिफ्ट खत्म कर सिंगल शिफ्ट शुरू करने का कड़ा निर्देश: विद्यार्थियों की संख्या और इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा

समीक्षा बैठक के दौरान प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि शहर के कई सरकारी स्कूल अभी भी डबल शिफ्ट में संचालित हो रहे हैं। डबल शिफ्ट प्रणाली के कारण पहली शिफ्ट सुबह जल्दी और दूसरी शिफ्ट दोपहर में चलती है, जिससे न केवल विद्यार्थियों के सीखने का समय (Instructional Hours) घट जाता है, बल्कि खेलकूद, सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों और शिक्षकों के साथ व्यक्तिगत संवाद के अवसर भी सीमित हो जाते हैं।

कटारिया ने स्कूल प्रिंसिपलों और शिक्षा सचिव को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने स्कूलों में बुनियादी ढांचे और क्लासरूम की क्षमता का पुनः आकलन करें। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के चलते दो शिफ्ट चलानी पड़ रही हैं, वहां नए कमरों के निर्माण, अतिरिक्त विंग्स जोड़ने और आसपास के कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के साथ समायोजन की संभावना तलाशी जाए ताकि सभी स्कूलों को एक ही सामान्य समय (सुबह से दोपहर) में संचालित किया जा सके।

मलोया समाधान शिविर और स्कूल निरीक्षण का असर: अभिभावकों की शिकायतों पर हुआ त्वरित एक्शन

प्रशासक द्वारा शिक्षा विभाग पर यह सख्ती अचानक नहीं हुई है, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि उनके द्वारा जनता से सीधे संवाद के दौरान सामने आई शिकायतों से जुड़ी है। 25 मई को मलोया में आयोजित प्रशासक के 'समाधान शिविर' के दौरान स्थानीय अभिभावकों ने यह गंभीर मुद्दा उठाया था कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जिसके चलते स्कूल प्रशासन नए विद्यार्थियों को दाखिला देने से मना कर रहा है। इसके बाद जुलाई महीने में जब प्रशासक कटारिया एक अन्य स्कूल की मरम्मत और स्थिति का मुआयना करने पहुंचे, तो वहां भी अभिभावकों ने स्टाफ की कमी और दाखिले में आ रही अड़चनों की शिकायत दर्ज कराई थी।

इन जमीनी इनपुट्स को गंभीरता से लेते हुए प्रशासक ने बैठक में 13 स्कूलों के प्रिंसिपलों से सीधा सवाल-जवाब किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि शिक्षकों की कमी के नाम पर किसी भी पात्र बच्चे को शिक्षा के अधिकार (RTE) से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि शहर के प्रत्येक स्कूल में विषयवार (Subject-Wise) शिक्षकों की स्वीकृत संख्या, वर्तमान में कार्यरत स्टाफ और खाली पड़े पदों का एक सटीक श्वेत-पत्र (White Paper) तैयार किया जाए।

5 स्कूलों में प्रिंसिपल के पद सृजित नहीं: मान्यता रद्द होने के खतरे पर केंद्र सरकार से बात करेंगे प्रशासक

बैठक के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि चंडीगढ़ के पांच प्रमुख सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल के स्वीकृत पद (Sanctioned Posts) तक सृजित (Create) नहीं किए गए हैं। लंबे समय से इन स्कूलों को कार्यवाहक या वाइस-प्रिंसिपल के भरोसे चलाया जा रहा है। नियमानुसार, यदि किसी मान्यता प्राप्त सीनियर सेकेंडरी स्कूल में स्वीकृत प्रिंसिपल का पद नहीं होता, तो केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और शिक्षा नियामक संस्थाओं द्वारा स्कूल की मान्यता रद्द करने का जोखिम पैदा हो जाता है।

प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेते हुए आश्वासन दिया कि चंडीगढ़ प्रशासन इस तकनीकी बाधा को दूर करने के लिए पूरी तत्परता से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि वे खुद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) के साथ समन्वय स्थापित कर इन पांचों स्कूलों के लिए नियमित प्रिंसिपल पदों की मंजूरी दिलाएंगे और साथ ही टीजीटी (TGT), पीजीटी (PGT) और जेबीटी (JBT) शिक्षकों की नई भर्तियों की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाएंगे।

शिक्षा में सुधार और अनुशासन पर जोर: बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं का भी लिया जायजा

समीक्षा बैठक में केवल प्रशासनिक ढांचे पर ही नहीं, बल्कि स्कूलों के आंतरिक वातावरण, बच्चों की सुरक्षा और समग्र अनुशासन पर भी चर्चा हुई। प्रशासक ने सभी स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिया कि वे स्कूल परिसरों में स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालयों, विज्ञान प्रयोगशालाओं और डिजिटल स्मार्ट क्लासरूम्स की कार्यक्षमता की नियमित जांच करें।

इसके अतिरिक्त, हाल के दिनों में सरकारी स्कूलों से सामने आई अनुशासनहीनता और विवादों की घटनाओं को देखते हुए प्रशासक ने प्रिंसिपलों को शिक्षकों और छात्रों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का काम केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास करना और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है। चंडीगढ़ जैसे योजनाबद्ध और आधुनिक शहर के सरकारी स्कूलों को पूरे देश के लिए एक 'मॉडल स्कूल सिस्टम' के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए।