'13 साल की उम्र में मैं इसके आस-पास भी नहीं था!' युवराज सिंह ने वैभव सूर्यवंशी को बताया खुद से बेहतर; गेंदबाजी एक्शन पर ली मजेदार चुटकी

'13 साल की उम्र में मैं इसके आस-पास भी नहीं था!' युवराज सिंह ने वैभव सूर्यवंशी को बताया खुद से बेहतर; गेंदबाजी एक्शन पर ली मजेदार चुटकी

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर और दो बार के विश्व कप विजेता (2007 टी-20 और 2011 वनडे वर्ल्ड कप) युवराज सिंह मैदान पर अपने आक्रामक तेवर और मैदान के बाहर अपनी बेबाक हाजिरजवाबी के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया और क्रिकेट कार्यक्रमों के दौरान जब युवराज सिंह से भारतीय घरेलू क्रिकेट और अंडर-19 सर्किट में धूम मचाने वाले बिहार के युवा बाएं हाथ के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर सवाल पूछा गया, तो सिक्सर किंग ने दिल खोलकर इस वंडर किड की तारीफ की। युवराज ने बेहद साफगोई से स्वीकार किया कि जब वे खुद 13-14 साल के थे, तब वे तकनीक और आक्रामकता के मामले में वैभव सूर्यवंशी के स्तर के करीब भी नहीं थे।

युवराज सिंह का यह बयान इसलिए बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि युवी खुद बाएं हाथ के उन महानतम बल्लेबाजों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपनी कलात्मक और विध्वंसक बल्लेबाजी से दुनिया भर के गेंदबाजों में खौफ पैदा किया था। युवराज ने वैभव के बैट स्विंग, बैकलिफ्ट और दबाव में शॉट खेलने की निडरता की जमकर सराहना की। हालांकि, हमेशा की तरह बातचीत को हल्के-फुल्के अंदाज में ले जाते हुए युवराज ने युवा खिलाड़ी के गेंदबाजी एक्शन पर एक ऐसा चुटीला और मजेदार कमेंट किया, जिसने पूरे क्रिकेट जगत को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।

'13 की उम्र में मैं तो कुछ भी नहीं था': युवराज ने कबूली अपनी और वैभव की तुलना

वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी पर विस्तार से बात करते हुए युवराज सिंह ने कहा कि जिस उम्र में अधिकांश बच्चे अपनी बुनियादी क्रिकेट कोचिंग और स्कूल टूर्नामेंट्स के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे होते हैं, उस उम्र में वैभव देश के सबसे बड़े मंचों पर सीनियर गेंदबाजों की गेंदों को बाउंड्री के बाहर भेज रहे हैं। युवराज ने कहा, "अगर मैं पूरी ईमानदारी से अपने बचपन को याद करूं, तो 13 साल की उम्र में मेरे पास ऐसा आत्मविश्वास और पावर-गेम बिल्कुल नहीं था। मैं उस समय सिर्फ गेंद को टाइम करने की कोशिश करता था, लेकिन वैभव जिस तरह से क्रीज का इस्तेमाल करते हैं और तेज गेंदबाजों के खिलाफ फ्रंट-फुट व बैक-फुट दोनों पर शॉट लगाते हैं, वह अद्भुत है। इस उम्र में वह निश्चित रूप से मुझसे कहीं बेहतर खिलाड़ी हैं।"

युवराज ने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक दौर के युवा खिलाड़ियों को मिलने वाला एक्सपोजर, वीडियो एनालिटिक्स और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग उन्हें समय से पहले परिपक्व बना रही है। वैभव ने जिस तरह ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीम के खिलाफ यूथ टेस्ट में महज 58 गेंदों पर सबसे तेज शतक जड़ा था, उसने यह साबित कर दिया था कि उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर का टेम्परामेंट मौजूद है।

गेंदबाजी एक्शन पर युवराज का मजेदार पंच: 'भाई, सिर्फ बैटिंग पर ही ध्यान दो!'

बल्लेबाजी की तारीफों के पुल बांधने के बाद जब स्क्रीन पर वैभव सूर्यवंशी के गेंदबाजी करने का वीडियो और उनका बॉलिंग एक्शन सामने आया, तो युवराज सिंह अपनी हंसी नहीं रोक पाए। बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाजी करने वाले वैभव के अजीबोगरीब और थोड़े असामान्य रिलीज पॉइंट पर चुटकी लेते हुए युवराज ने मजेदार अंदाज में कहा, "अरे भाई, इस गेंदबाजी एक्शन के साथ तो अंपायरों को भी दो बार सोचना पड़ जाएगा! मेरी सलाह यही होगी कि वह अपनी सारी ऊर्जा और ध्यान सिर्फ बल्लेबाजी पर ही लगाएं। गेंदबाजी को साइड में ही रहने दें, वर्ना विरोधी बल्लेबाज चौके मारने से ज्यादा एक्शन देखकर हंसने लगेंगे!"

युवराज सिंह का यह मजेदार तंज पूरी तरह दोस्ताना और प्रेरणादायी संदर्भ में था। खुद युवराज अपने दौर में एक उपयोगी बाएं हाथ के स्पिनर रहे थे, जिन्होंने 2011 के वर्ल्ड कप में 15 विकेट चटकाकर 'मैन ऑफ द टूर्नामेंट' का खिताब जीता था। ऐसे में जब एक महान ऑलराउंडर किसी उभरते हुए खिलाड़ी के बॉलिंग एक्शन पर मजाकिया टिप्पणी करता है, तो यह ड्रेसिंग रूम के उस हल्के-फुल्के माहौल की याद दिलाता है जो युवा प्रतिभाओं के दबाव को कम करने का काम करता है।

समस्तीपुर की गलियों से रिकॉर्ड बुक तक: कौन हैं वैभव सूर्यवंशी?

बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड के रहने वाले वैभव सूर्यवंशी की कहानी किसी सपने जैसी है। उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने अपने बेटे के क्रिकेट के जुनून को पूरा करने के लिए अपनी जमीन और जमा-पूंजी दांव पर लगा दी थी। वैभव ने महज 12 साल 284 दिन की उम्र में बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी में पदार्पण करके आधुनिक भारतीय प्रथम श्रेणी क्रिकेट के इतिहास में सबसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ियों की सूची में अपना नाम दर्ज कराया था।

इसके बाद अंडर-19 वीनू मांकड़ ट्रॉफी, कूच बिहार ट्रॉफी और फिर भारत की अंडर-19 बी टीम के लिए खेलते हुए उन्होंने रनों का ऐसा अंबार लगाया कि राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को उन्हें नजरअंदाज करना नामुमकिन हो गया। ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ चेन्नई में खेली गई उनकी 104 रनों की तूफानी पारी ने दुनिया भर के स्काउट्स का ध्यान खींचा था। आईपीएल के मेगा ऑक्शन में भी सबसे कम उम्र के खिलाड़ी के रूप में शॉर्टलिस्ट होकर और फ्रेंचाइजी द्वारा करोड़ों की बोली पाकर वैभव ने रातों-रात पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थीं।

शुभमन गिल और अभिषेक शर्मा के बाद क्या वैभव बनेंगे युवी के नए शागिर्द?

क्रिकेट जगत इस बात से भली-भांति परिचित है कि संन्यास के बाद युवराज सिंह ने भारतीय क्रिकेट को तराशने में कितना बड़ा योगदान दिया है। मौजूदा समय में टीम इंडिया के स्टार सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल और टी-20 के विस्फोटक ओपनर अभिषेक शर्मा के मेंटॉर खुद युवराज सिंह रहे हैं। पंजाब में अपने कैंप के दौरान युवराज ने इन दोनों युवाओं की बैटिंग तकनीक और मानसिक दृढ़ता पर महीनों तक पसीना बहाया था, जिसका असर आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर साफ दिखाई देता है।

क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी के रूप में भारतीय क्रिकेट को एक और ऐसा हीरा मिला है जिसे अगर युवराज सिंह जैसे दिग्गज का मार्गदर्शन और मेंटरशिप मिल जाए, तो वे भविष्य में एक विश्वस्तरीय मैच-विनर बन सकते हैं। वैभव का खेल खेलने का तरीका काफी हद तक युवराज के शुरुआती दिनों की आक्रामकता से मेल खाता है—हाई बैकलिफ्ट, गेंद पर जोरदार प्रहार और स्पिनरों के खिलाफ कदमों का बेखौफ इस्तेमाल।

शोहरत के बीच जमीन से जुड़े रहने और दबाव संभालने की बड़ी चुनौती

युवराज सिंह ने अपनी बातचीत के अंत में युवा वैभव के लिए एक बेहद गंभीर और महत्वपूर्ण सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में मिलने वाली शोहरत, मीडिया की चकाचौंध, करोड़ों के अनुबंध और सोशल मीडिया का दबाव किसी भी किशोर खिलाड़ी को भटका सकता है।

युवराज ने कहा कि असली चुनौती अब शुरू होगी जब घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टीमें वैभव की तकनीक का वीडियो विश्लेषण करेंगी और उनकी कमजोरियों पर वार करेंगी। ऐसे समय में परिवार, कोच और सीनियर खिलाड़ियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे वैभव को बाहरी दुनिया के शोर से बचाकर केवल उनके खेल के विकास पर केंद्रित रखें।

युवराज सिंह द्वारा खुद से बेहतर बताए जाने की यह तारीफ निश्चित रूप से 13 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी के आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुंचाएगी। वहीं सिक्सर किंग का वह मजाकिया कमेंट इस बात का प्रमाण है कि क्रिकेट का खेल केवल गंभीर रणनीतियों का नाम नहीं है, बल्कि मैदान पर अपने सहज और जिंदादिल अंदाज को बनाए रखना ही किसी खिलाड़ी को महान बनाता है। पूरे देश की नजरें अब वैभव के आगामी घरेलू सत्र और उनके सुनहरे भविष्य पर टिकी हुई हैं।