टीम इंडिया की सिलेक्शन पॉलिसी में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ 100% नहीं, बल्कि 200% फिटनेस की गारंटी के बाद ही मिलेगी खिलाड़ियों को टीम में एंट्री
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने खिलाड़ियों की लगातार चोटों और चयन को लेकर हो रही तीखी आलोचनाओं के बाद अपनी सिलेक्शन पॉलिसी में एक ऐतिहासिक और सख्त बदलाव किया है। अब राष्ट्रीय टीम में किसी भी खिलाड़ी को शामिल करने से पहले बोर्ड सिर्फ सामान्य फिटनेस से संतुष्ट नहीं होगा, बल्कि खिलाड़ी की उपलब्धता और मैच-फिटनेस को लेकर '200 प्रतिशत' आश्वस्त होना चाहेगा। पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए थे जहां खिलाड़ियों को टीम में चुन लिया गया, लेकिन श्रृंखला शुरू होने से पहले या बीच दौरे पर वे फिर से अनफिट होकर बाहर हो गए। इस तरह की अव्यवस्था और प्रशासनिक फजीहत से बचने के लिए अब बीसीसीआई, चयन समिति और बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) ने बेहद फूंक-फूंक कर कदम उठाने का फैसला किया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय टीम के संतुलन पर कोई असर न पड़े।
पिछली घटनाओं से सबक और हर्षित राणा-बुमराह जैसे मामलों की पुनरावृत्ति से बचाव
इस नई और सख्त पॉलिसी के पीछे हाल ही के वे तमाम अनुभव हैं जब टीम प्रबंधन को बीच दौरों पर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण युवा तेज गेंदबाज हर्षित राणा का मामला है, जिन्होंने पांच महीने के लंबे ब्रेक के बाद जून में आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरों पर वापसी की थी, लेकिन दो हफ्ते से भी कम समय के भीतर बीच सीरीज में उन्हें फिर से चोट के कारण बाहर होना पड़ गया था। हर्षित राणा के अलावा जसप्रीत बुमराह, वाशिंगटन सुंदर और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे प्रमुख खिलाड़ी भी बार-बार चोटिल होने की समस्या से जूझते रहे हैं। इन खिलाड़ियों के अचानक बाहर होने के कारण बोर्ड को आनन-फानन में रिप्लेसमेंट भेजने पड़े, जिससे टीम संयोजन बुरी तरह प्रभावित हुआ। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दबाजी में खिलाड़ियों को मैदान पर उतारने की पुरानी संस्कृति अब पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और CoE किसी भी खिलाड़ी की फिटनेस पर डबल-चेक किए बिना उसे हरी झंडी नहीं देगा।
अफगानिस्तान सीरीज के लिए कंडीशनल सिलेक्शन और नए नियम के मायने
बीसीसीआई की इस बदली हुई कार्यशैली की झलक हाल ही में घोषित की गई अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए चुनी गई 15 सदस्यीय भारतीय टीम में साफ तौर पर देखने को मिली है। इस स्क्वॉड में चयनकर्ताओं ने चार ऐसे खिलाड़ियों को जगह दी है जिनके नाम के आगे 'कंडीशनल पिक' या फिटनेस शर्तें जुड़ी हुई हैं। इनमें स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर, नीतीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा शामिल हैं। बोर्ड के नए नियमों के तहत इन खिलाड़ियों को तभी आधिकारिक रूप से हरी झंडी मिलेगी जब वे रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया को पूरी तरह पार करते हुए अपने फिटनेस टेस्ट में शत-प्रतिशत खरे उतरेंगे। यदि ये खिलाड़ी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी फिटनेस साबित करने में नाकाम रहते हैं, तो चयनकर्ताओं के पास पहले से ही बैकअप विकल्पों को तैयार रखने का पूरा अधिकार होगा।
वीवीएस लक्ष्मण और बीसीसीआई सचिव की सफाई, स्पष्टता पर जोर
खिलाड़ियों के चयन और उनकी फिटनेस शर्तों को लेकर उठ रहे सवालों पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण और बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की है। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय दौरों के लिए टीम का चयन आमतौर पर सीरीज शुरू होने से 21 से 28 दिन पहले कर लिया जाता है, ताकि लॉजिस्टिक्स और वीजा जैसी औपचारिकताएं समय पर पूरी हो सकें। चयन के समय यदि कोई खिलाड़ी रिहैब के अंतिम चरण में होता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो गया है। सीरीज शुरू होने तक यदि वह पूरी तरह फिट हो जाता है तो टीम के साथ जुड़ सकता है। हालांकि, नई नीति के तहत अब किसी भी खिलाड़ी पर अनावश्यक दबाव नहीं बनाया जाएगा और रिकवरी के समय को सर्वोपरि रखा जाएगा ताकि खिलाड़ियों का करियर सुरक्षित रह सके।
भविष्य के वैश्विक टूर्नामेंट्स और खिलाड़ियों के वर्कलोड पर पैनी नजर
आगामी समय में कई बड़े और चुनौतीपूर्ण वैश्विक टूर्नामेंट्स को देखते हुए बीसीसीआई का यह कदम बेहद दूरदर्शी माना जा रहा है। खिलाड़ियों के भारी-भरकम वर्कलोड, आईपीएल के लंबे सीजन और लगातार अंतरराष्ट्रीय दौरों के कारण आधुनिक क्रिकेटरों के शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। '200 प्रतिशत फिटनेस नीति' के लागू होने से न केवल टीम चयन में अधिक पारदर्शिता आएगी, बल्कि अनफिट खिलाड़ियों को लेकर होने वाली बयानबाजी और आलोचनाओं पर भी विराम लगेगा। भारतीय क्रिकेट टीम प्रबंधन अब इस बात को लेकर पूरी तरह गंभीर है कि मैदान पर उतरने वाला हर एक खिलाड़ी शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से पूरी तरह तरोताजा और मुकाबला जीतने के लिए सक्षम हो। इस सख्त अनुशासन के साथ टीम इंडिया आने वाले चुनौतीपूर्ण क्रिकेट सत्र में अपनी पूरी ताकत और मजबूती के साथ उतरने के लिए तैयार नजर आ रही है।