'मानव सुथार को IPL में मत जाने दो, वरना...', उभरते स्पिनर को लेकर पूर्व भारतीय दिग्गज ने क्यों दी यह बड़ी चेतावनी?

'मानव सुथार को IPL में मत जाने दो, वरना...', उभरते स्पिनर को लेकर पूर्व भारतीय दिग्गज ने क्यों दी यह बड़ी चेतावनी?

भारतीय घरेलू क्रिकेट और 'इंडिया ए' के मुकाबलों में अपनी धारदार बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी से बल्लेबाजों को नचाने वाले युवा सनसनी मानव सुथार इस समय सुर्खियों के केंद्र में हैं। दलीप ट्रॉफी और फर्स्ट-क्लास मैचों में लगातार पांच-पांच विकेट चटकाकर सुथार ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर मजबूती से खींचा है।

उनकी गेंद की फ्लाइट, शार्प टर्न और सटीक लाइन-लेंथ को देखकर कई विशेषज्ञ उन्हें भारतीय टेस्ट टीम के भविष्य के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, इस बढ़ती लोकप्रियता के बीच एक पूर्व भारतीय दिग्गज क्रिकेटर ने सुथार के करियर को लेकर एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली सलाह दी है, जिसने पूरे क्रिकेट गलियारे में नई बहस छेड़ दी है।

'उसे अभी IPL में मत जाने दो': पूर्व दिग्गज की तीखी चेतावनी

पूर्व भारतीय दिग्गज ने युवा स्पिनर के करियर के प्रबंधन पर बात करते हुए साफ शब्दों में कहा कि मानव सुथार जैसे पारंपरिक और क्लासिकल स्पिनर को अभी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की चकाचौंध से दूर रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि टी20 क्रिकेट का प्रारूप युवा स्पिनरों की मूल कला और तकनीकी बारीकियों को बर्बाद कर सकता है।

पूर्व क्रिकेटर का तर्क है कि आईपीएल में चार ओवर के स्पेल में रन बचाने के चक्कर में स्पिनर अपनी नैचुरल फ्लाइट, ड्रिफ्ट और लेंथ से समझौता करने लगते हैं। बल्लेबाज पर दबाव बनाने के बजाय वे फ्लैट और तेज गेंदें फेंकने पर मजबूर हो जाते हैं। अगर सुथार बहुत जल्दी टी20 के इस जाल में फंस गए, तो टेस्ट क्रिकेट के लिए उनकी वर्षों की पारंपरिक मेहनत पटरी से उतर सकती है।

क्लासिकल टेस्ट स्पिनर बनने के लिए लंबे स्पेल फेंकना जरूरी

क्रिकेट विशेषज्ञ ने रेखांकित किया कि मानव सुथार की असली ताकत उनकी क्लासिकल स्पिन गेंदबाजी है। वे बल्लेबाज को अपनी फ्लाइट से ललचाते हैं, हवा में गेंद को ड्रिफ्ट कराते हैं और फिर पिच से तीखा टर्न हासिल करते हैं। यह कला सिर्फ रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी और भारत ए के चार दिवसीय मैचों में घंटों गेंदबाजी करके ही निखारी जा सकती है।

जब कोई गेंदबाज एक पारी में 25 से 30 ओवर फेंकता है, तब उसे समझ आता है कि किसी सेट बल्लेबाज को आउट करने के लिए किस तरह जाल बुना जाता है। टी20 प्रारूप में न तो इतना समय होता है और न ही ऐसी रणनीति की गुंजाइश। इसलिए पूर्व दिग्गज का कहना है कि सुथार को अगले दो-तीन साल तक सिर्फ रेड बॉल क्रिकेट पर पूरा ध्यान केंद्रित करने देना चाहिए ताकि उनकी बुनियादी तकनीक पूरी तरह से पक्की हो सके।

अतीत के उदाहरणों से सबक: कई होनहार स्पिनर भटके अपनी राह से

भारतीय क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जब लाल गेंद के बेहतरीन घरेलू स्पिनरों को बहुत जल्दी आईपीएल के ग्लैमर और भारी-भरकम अनुबंधों में झोंक दिया गया। नतीजा यह हुआ कि उन्होंने टी20 में बचने के लिए अपनी स्वाभाविक शैली बदल दी और कुछ ही सालों में वे न तो टेस्ट के रहे और न ही टी20 में लंबे समय तक टिक सके।

पूर्व दिग्गज ने चयनकर्ताओं और बीसीसीआई को सुझाव दिया कि सुथार जैसे विशेष टैलेंट को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट या स्पेशल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत वित्तीय सुरक्षा दी जानी चाहिए, ताकि उन पर केवल पैसे के लिए टी20 लीग्स की तरफ भागने का दबाव न रहे।

भारतीय टेस्ट टीम में स्पिन की नई पौध तैयार करने की जरूरत

रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा जैसे दिग्गजों के करियर के इस पड़ाव पर टीम इंडिया को लंबी अवधि के लिए ऐसे स्पिनरों की सख्त जरूरत है जो घरेलू और विदेशी दोनों तरह की पिचों पर 5 दिन के मैच में 20 विकेट निकालने का दम रखते हों।

मानव सुथार में वह सारी खूबियां मौजूद हैं जो उन्हें भविष्य का वर्ल्ड क्लास टेस्ट बॉलर बना सकती हैं। ऐसे में पूर्व भारतीय दिग्गज का यह बयान एक चेतावनी के साथ-साथ एक दूरदर्शी सलाह भी है कि हीरे को तराशने के लिए वक्त और सही माहौल की जरूरत होती है, न कि उसे जल्दबाजी में बाजार की चमक-दमक के हवाले कर दिया जाए।