रफ्तार के साथ सटीकता पर फोकस, विराट कोहली की पारी के दौरान ड्रेसिंग रूम में क्या था माहौल
भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाजी आक्रमण में अपनी लंबी कद-काठी और अतिरिक्त उछाल (Extra Bounce) के लिए पहचाने जाने वाले प्रसिद्ध कृष्णा चोट से उबरने के बाद एक बदले हुए और अधिक धारदार गेंदबाज के रूप में सामने आए हैं। राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA) में रिहैब के लंबे दौर और घरेलू क्रिकेट में लगातार स्पेल डालने के बाद प्रसिद्ध ने अपनी गेंदबाजी के बुनियादी पहलुओं में कई अहम सुधार किए हैं। टीम प्रबंधन और गेंदबाजी कोच के साथ मिलकर प्रसिद्ध कृष्णा काफी समय से एक खास तकनीकी पहलू पर काम कर रहे हैं, जिसका असर अब मैदान पर साफ नजर आने लगा है।
इसके साथ ही, हालिया मैचों के दौरान जब विराट कोहली क्रीज पर अपने चिर-परिचित आक्रामक और संयमित अंदाज में ऐतिहासिक पारी बुन रहे थे, तब भारतीय ड्रेसिंग रूम और डगआउट में बैठे खिलाड़ियों के मन में क्या चल रहा था, इसको लेकर भी दिलचस्प बातें सामने आई हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि प्रसिद्ध कृष्णा अपनी गेंदबाजी में क्या नया जोड़ रहे हैं और कोहली की जादुई बल्लेबाजी के दौरान साथी खिलाड़ियों की क्या सोच थी।
प्रसिद्ध कृष्णा काफी समय से किस चीज पर कर रहे हैं काम?
प्रसिद्ध कृष्णा के पास 140+ किमी प्रति घंटे की रफ्तार और पिच से गेंद को तेजी से उठाने की स्वाभाविक क्षमता हमेशा से रही है। लेकिन टेस्ट और वनडे क्रिकेट की मांग को देखते हुए वे पिछले काफी समय से मुख्य रूप से 'सटीक लाइन-लेंथ के साथ लगातार एक ही टप्पे (Consistent Length) पर गेंद पटकने और कलाई की स्थिति (Seem Position)' पर काम कर रहे हैं।
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एक ही टप्पे पर लगातार प्रहार: अक्सर तेज गति के साथ युवा गेंदबाजों से दिशा भटकने की चूक हो जाती है। प्रसिद्ध ने नेट्स में घंटों पसीना बहाकर गुड लेंथ एरिया में 6 से 8 मीटर के दायरे में लगातार गेंद गिराने का अभ्यास किया है, जिससे बल्लेबाजों को हाथ खोलने का जरा भी मौका न मिले।
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कलाई की सीधी स्थिति और सीम का इस्तेमाल: गेंद को हवा में लहराने और टप्पा खाने के बाद दोनों तरफ मूव कराने के लिए प्रसिद्ध ने अपने 'रिस्ट रिलीज' (कलाई के एंगल) को और अधिक सीधा और स्थिर किया है। इससे पुरानी गेंद से भी रिवर्स और कटर फेंकने में उन्हें जबरदस्त नियंत्रण मिल रहा है।
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इंजरी-फ्री रन-अप और बॉडी अलाइनमेंट: अपनी पीठ के निचले हिस्से (स्ट्रेस फ्रैक्चर) की समस्याओं से बचने के लिए प्रसिद्ध ने अपने रन-अप को थोड़ा अधिक सहज और स्मूद बनाया है, ताकि डिलीवरी स्ट्राइड के समय शरीर पर अनावश्यक झटका न लगे और वे लंबे स्पेल बिना थके फेंक सकें।
विराट कोहली की पारी के दौरान साथी खिलाड़ी क्या सोच रहे थे?
जब विराट कोहली क्रीज पर होते हैं और लक्ष्य का पीछा कर रहे होते हैं या पारी को संकट से उबार रहे होते हैं, तो ड्रेसिंग रूम का माहौल किसी रोमांचक थ्रिलर फिल्म जैसा हो जाता है। साथी खिलाड़ियों के अनुसार, कोहली जब अपनी लय में बल्लेबाजी कर रहे होते हैं, तो डगआउट में बैठा हर खिलाड़ी केवल एक ही बात सोच रहा होता है—'बस आराम से बैठकर मास्टरक्लास देखो और सीखो।'
ड्रेसिंग रूम के खिलाड़ियों ने साझा किया कि विराट जब क्रीज पर टिक जाते हैं, तो बाकी टीम पूरी तरह आश्वस्त हो जाती है कि मैच भारत की मुट्ठी से फिसल नहीं सकता। कोहली की पारी के दौरान खिलाड़ियों की मुख्य सोच इन बिंदुओं पर टिकी रहती थी:
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स्ट्राइक रोटेशन और रनिंग बिटवीन द विकेट्स: खिलाड़ी हैरान होकर देखते हैं कि कैसे विराट 35-40 की उम्र के करीब होकर भी 22 गज की पट्टी पर बिजली की तेजी से दौड़ते हैं। डगआउट में युवा बल्लेबाज यह चर्चा करते हैं कि कोहली बाउंड्री न मिलने पर भी कभी पैनिक नहीं होते, बल्कि 1 और 2 रन चुराकर विरोधी कप्तान की फील्डिंग सजावट को पूरी तरह बिखेर देते हैं।
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गेंदबाजों के दिमाग से खेलने की कला: विराट जिस तरह से शुरुआती 20-30 गेंदों में अपना समय लेते हैं और फिर परिस्थिति के अनुसार गियर बदलते हैं, वह साथी खिलाड़ियों के लिए एक 'क्रिकेटिंग गाइडबुक' की तरह होता है। डगआउट में हर कोई यही सोच रहा होता है कि किस ओवर में विराट मैच का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ने वाले हैं।
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विराट का अटूट आत्मविश्वास: मैदान पर विराट के चेहरे की शारीरिक भाषा (Body Language) इतनी आक्रामक और सकारात्मक होती है कि डगआउट में बैठे किसी भी खिलाड़ी के चेहरे पर शिकन तक नहीं दिखती। अगली बारी आने वाले बल्लेबाजों को पैड बांधकर इंतजार करते हुए यह भरोसा रहता है कि विराट छोर संभाले हुए हैं और उन्हें जाकर केवल स्ट्राइक रोटेट करनी है।
नए दौर की भारतीय तेज गेंदबाजी और प्रसिद्ध का भविष्य
प्रसिद्ध कृष्णा की यह तकनीकी परिपक्वता और लगातार अनुशासन बनाए रखने की भूख उन्हें भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का सबसे भरोसेमंद हथियार बना रही है। जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज जैसे स्थापित गेंदबाजों के साथ जब प्रसिद्ध दूसरे छोर से अनुशासन और उछाल के साथ दबाव बनाते हैं, तो विरोधी बल्लेबाजी क्रम ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है। कप्तान और टीम मैनेजमेंट को पूरा भरोसा है कि प्रसिद्ध कृष्णा का यह तकनीकी सुधार आगामी विदेशी दौरों और आईसीसी टूर्नामेंट्स में भारत के लिए सबसे बड़ा 'एक्स-फैक्टर' साबित होगा।