संजू सैमसन की जगह 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को खिलाने के साहसिक फैसले पर गौतम गंभीर ने तोड़ी चुप्पी

संजू सैमसन की जगह 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को खिलाने के साहसिक फैसले पर गौतम गंभीर ने तोड़ी चुप्पी

भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर अपने बेबाक अंदाज और लीक से हटकर लिए जाने वाले साहसिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन कड़े और अप्रत्याशित फैसलों के पीछे एक कोच को मानसिक तौर पर किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है, इसका खुलासा खुद गंभीर ने किया है। गंभीर ने हाल ही में जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज के दौरान इन-फॉर्म अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन को बाहर बैठाकर महज 14 वर्षीय सनसनी वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू कराने के फैसले पर पहली बार खुलकर बात की है।

गंभीर ने बेहद भावुक होते हुए स्वीकार किया कि लगातार रन बना रहे किसी स्थापित खिलाड़ी को टीम से बाहर करना किसी भी कोच या कप्तान के लिए दुनिया का सबसे मुश्किल काम होता है। गंभीर ने कहा कि संजू सैमसन को बाहर बैठाने के बाद वे उस पूरी रात सो नहीं पाए थे, क्योंकि वह फैसला दिल पर पत्थर रखकर केवल और केवल भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया था।

'संजू को बाहर करना बेहद दर्दनाक था, पूरी रात करवटें बदलता रहा'

जियोस्टार को दिए एक खास इंटरव्यू में गौतम गंभीर ने टीम चयन की अंदरूनी कशमकश को साझा किया। गंभीर ने कहा:

"जब कोई खिलाड़ी शानदार फॉर्म में हो और टीम के लिए लगातार मैच जिताऊ पारियां खेल रहा हो, तो उसे प्लेइंग इलेवन से बाहर करना सबसे ज्यादा तकलीफदेह होता है। संजू सैमसन ने हर मौके पर खुद को साबित किया था। लेकिन जब हमें जिम्बाब्वे दौरे पर 14 साल के वैभव सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परखने का साहसिक फैसला लेना पड़ा, तो संजू को बाहर बैठना पड़ा। सच कहूं तो उस रात मैं एक पल के लिए भी सो नहीं पाया था। बतौर कोच यह मेरे करियर के सबसे कठिन और असहज फैसलों में से एक था।"

गंभीर ने आगे कहा कि एक लीडर के तौर पर आपको कई बार ऐसे अप्रिय और कड़े निर्णय लेने पड़ते हैं जिनकी बाहर आलोचना हो सकती है, लेकिन टीम और देश के दीर्घकालिक विजन के लिए वे जरूरी होते हैं।

वैभव सूर्यवंशी: 14 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इतिहास

बिहार के समस्तीपुर से आने वाले बाएं हाथ के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने घरेलू क्रिकेट, अंडर-19 और आईपीएल में अपने आक्रामक खेल से पूरे विश्व क्रिकेट को चौंका दिया था।

  • सबसे युवा डेब्यू: वैभव भारत के लिए पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने।

  • निडर बल्लेबाजी: गंभीर और टीम मैनेजमेंट का मानना था कि 2026 और उसके बाद के टी20 रोडमैप के लिए पावरप्ले में निडरता से खेलने वाले इस युवा टैलेंट को सीधे अंतरराष्ट्रीय माहौल में उतारना जरूरी था।

  • वैभव ने अपने पहले ही मैच में पहली गेंद पर छक्का जड़कर यह साबित कर दिया था कि चयनकर्ताओं और कोच का उन पर भरोसा गलत नहीं था।

'संजू सैमसन चैंपियन हैं, उनका समर्पण मिसाल है'

गौतम गंभीर ने संजू सैमसन के धैर्य, खेल भावना और टीम-फर्स्ट रवैये की जमकर तारीफ की। गंभीर ने कहा कि संजू जैसे सीनियर खिलाड़ी का टीम में होना किसी भी कोच के लिए वरदान जैसा है।

गंभीर ने कहा:

  • "संजू सैमसन न केवल एक विश्वस्तरीय बल्लेबाज हैं, बल्कि एक असाधारण इंसान भी हैं। जब मैंने उनसे बात की और समझाया कि भविष्य की योजना के तहत हमें एक युवा लड़के को मौका देना है, तो उन्होंने बिना किसी शिकवे के मुस्कुराते हुए इस फैसले को स्वीकार किया।"

  • गंभीर ने स्पष्ट किया कि संजू कभी भी योजनाओं से बाहर नहीं हुए हैं। वे टीम की कोर स्ट्रैटजी का अहम हिस्सा हैं और जब भी टीम को उनकी जरूरत होगी, वे हमेशा पहली पंक्ति में खड़े मिलेंगे।

भविष्य और वर्तमान के बीच संतुलन साधना ही असली चुनौती

गंभीर ने कहा कि आज भारतीय क्रिकेट में टैलेंट का ऐसा विस्फोट हुआ है कि हर पोजीशन के लिए तीन से चार विश्वस्तरीय खिलाड़ी कतार में खड़े हैं। ऐसे में रोहित शर्मा, विराट कोहली जैसे दिग्गजों के अनुभव का सम्मान करते हुए वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा और मयंक यादव जैसी नई पीढ़ी को तैयार करना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।

गंभीर के इस दिल छू लेने वाले खुलासे ने क्रिकेट फैंस को यह समझा दिया है कि टीम शीट पर 11 नाम तय करने के पीछे सिर्फ रणनीतिक गणित नहीं, बल्कि कोच और कप्तानों की कई नींद हराम करने वाली रातें भी छिपी होती हैं।