हरमनप्रीत कौर ने छोड़ी टीम इंडिया की कप्तानी, BCCI ने सराहा; कहा- इतिहास में हमेशा रहेगा खास स्थान
भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास के सबसे सफल और आक्रामक कप्तानों में शुमार हरमनप्रीत कौर ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों (टेस्ट, वनडे और टी20) से भारतीय टीम की कप्तानी छोड़ने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। लगभग एक दशक तक भारतीय महिला टीम का नेतृत्व करने के बाद उन्होंने कप्तानी की बागडोर छोड़ते हुए केवल एक खिलाड़ी के तौर पर खेलना जारी रखने की इच्छा जताई है। उनके इस बड़े फैसले के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उनके ऐतिहासिक योगदान की खुलकर सराहना की और स्पष्ट किया कि एक लीडर के तौर पर हरमनप्रीत कौर ने भारतीय महिला क्रिकेट की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।
'इतिहास में हमेशा रहेगा विशेष स्थान' — BCCI का आधिकारिक बयान
हरमनप्रीत कौर के इस्तीफे के बाद बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास ने एक आधिकारिक बयान जारी कर उनकी कप्तानी के सफर को सलाम किया। बीसीसीआई अध्यक्ष ने कहा कि बतौर कप्तान हरमनप्रीत कौर का योगदान भारतीय क्रिकेट के इतिहास में हमेशा एक विशेष स्थान रखेगा। उन्होंने टीम में निडर खेल भावना, आक्रामकता और कभी हार न मानने का जज्बा पैदा किया। बोर्ड ने माना कि उनके नेतृत्व में भारतीय महिला टीम ने दुनिया की किसी भी मजबूत टीम की आंखों में आंखें डालकर जीतना सीखा और वैश्विक पटल पर भारत को एक शीर्ष क्रिकेटिंग महाशक्ति के रूप में स्थापित किया।
10 साल का सफर और 126 अंतरराष्ट्रीय जीत का कीर्तिमान
हरमनप्रीत कौर ने साल 2016 में भारतीय महिला टी20 टीम की कमान संभाली थी और 2022 में वह टेस्ट व वनडे प्रारूप की भी नियमित कप्तान बन गईं। उनके कप्तानी के आंकड़े विश्व क्रिकेट में उनकी असाधारण लीडरशिप की गवाही देते हैं:
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वह दुनिया की इकलौती कप्तान हैं जिन्होंने पुरुष या महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 150 से अधिक टी20 मैचों (155 मैच) में कप्तानी की है।
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बतौर टी20 कप्तान उन्होंने सर्वाधिक 92 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जीते।
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सभी प्रारूपों को मिलाकर उन्होंने 126 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत को जीत दिलाई, जिसमें इंग्लैंड के लॉर्ड्स के मैदान पर ऐतिहासिक टेस्ट जीत भी शामिल है।
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उन्होंने अपनी कप्तानी में भारत को 2025 में ऐतिहासिक वनडे वर्ल्ड कप का खिताब दिलाया।
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एशियाई खेलों में लगातार दो बार गोल्ड मेडल जीतने वाली वह इकलौती कप्तान बनीं।
भावुक पोस्ट में लिखा: 'टीम के लिए दिया अपना खून-पसीना'
कप्तानी छोड़ने की घोषणा करते हुए हरमनप्रीत ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि यह फैसला लेना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था, लेकिन उनके लिए हमेशा टीम का हित सबसे ऊपर रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस टीम के लिए अपना खून-पसीना, समय और कई बार अपनी निजी आकांक्षाओं का भी बलिदान दिया। एक कप्तान के तौर पर उन्हें कई कड़े फैसले लेने पड़े, ताकि टीम को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि आज वे संतुष्ट हैं कि भारतीय टीम एक बेहद मजबूत स्थिति में खड़ी है और अब नए नेतृत्व को आगे आने का सही समय है।
बीसीसीआई रिव्यू मीटिंग और भविष्य की रूपरेखा
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में बीसीसीआई, चयनकर्ताओं, मुख्य कोच अमोल मजूमदार और सीनियर खिलाड़ियों के बीच एक समीक्षा बैठक हुई थी। इस बैठक में भविष्य के बड़े आईसीसी टूर्नामेंट्स और युवा खिलाड़ियों को लीडरशिप की बागडोर सौंपने के रोडमैप पर चर्चा हुई। बोर्ड का मानना था कि 2026 और उसके बाद के टूर्नामेंट्स के लिए एक नई दीर्घकालिक योजना तैयार करने का यह सही समय है। हरमनप्रीत कौर के इस सम्मानजनक पदत्याग के बाद टीम की स्टार बल्लेबाज और उपकप्तान स्मृति मंधाना को तीनों प्रारूपों में नई कमान सौंपे जाने की पूरी उम्मीद है।
बतौर खिलाड़ी जारी रहेगा मैदान पर जलवा
हरमनप्रीत कौर ने साफ किया है कि कप्तानी का यह अध्याय भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनका जुनून कभी खत्म नहीं होगा। वह बिना किसी दबाव के एक शुद्ध बल्लेबाज और ऑलराउंडर के तौर पर भारतीय टीम का हिस्सा बनी रहेंगी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि कप्तानी के बोझ से मुक्त होने के बाद हरमनप्रीत कौर का बल्ला मैदान पर और अधिक आक्रामक अंदाज में रन उगलेगा, जिसका सबसे बड़ा फायदा भारतीय टीम को आने वाले मुकाबलों में मिलेगा।