'वैभव सूर्यवंशी में दिखती है मेरी जैसी सोच': वीरेंद्र सहवाग ने की युवा सनसनी की जमकर तारीफ
भारतीय क्रिकेट के सबसे विध्वंसक सलामी बल्लेबाजों में शुमार 'मुल्तान के सुल्तान' वीरेंद्र सहवाग ने बिहार के युवा सनसनी और उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ की है। एक खेल कार्यक्रम के दौरान सहवाग ने युवा बल्लेबाज के बेखौफ अंदाज और निडर मानसिकता की सराहना करते हुए कहा कि वैभव इस समय अपने खेल के सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं और उनकी बल्लेबाजी शैली में उन्हें अपनी खुद की आक्रामक सोच की झलक दिखाई देती है। इतनी कम उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट और आयु-वर्ग प्रतियोगिताओं में रिकॉर्डतोड़ पारियां खेलकर सुर्खियां बटोरने वाले वैभव के लिए सहवाग जैसे दिग्गज की यह टिप्पणी किसी बड़े सम्मान से कम नहीं है।
'देखने में गेंद, मारने में बाउंड्री'—सहवाग को दिखी अपनी जैसी बेखौफ सोच
कार्यक्रम में युवा प्रतिभाओं और आधुनिक क्रिकेट के बदलते रुख पर चर्चा करते हुए वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि खेल में तकनीक से ज्यादा मानसिकता (माइंडसेट) मायने रखती है। सहवाग ने कहा, "वैभव सूर्यवंशी को बल्लेबाजी करते देखना सुखद अनुभव है। वह जिस तरह से पहली गेंद से ही विरोधी गेंदबाजों पर हावी होने का प्रयास करते हैं, उसमें मुझे अपनी सोच नजर आती है। जब मैं खेलता था, तो मेरा मानना था कि अगर गेंद बाउंड्री के लायक है तो उसे सीमा रेखा के पार जाना ही चाहिए, चाहे गेंदबाज कोई भी हो या मैच का कोई भी चरण हो। वैभव में भी वही बेखौफ और बेबाक रवैया दिखता है। वे परिणामों की चिंता किए बिना गेंद की मेरिट पर आक्रामक प्रहार करते हैं।"
कम उम्र में बड़े कीर्तिमान और राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान
बिहार के समस्तीपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में रणजी ट्रॉफी में पदार्पण कर इतिहास रच दिया था। इसके बाद भारत की अंडर-19 टीम की ओर से खेलते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ चेन्नई में महज 58 गेंदों पर शतक जड़कर दुनिया को चौंका दिया था, जो अंडर-19 टेस्ट के इतिहास का सबसे तेज भारतीय शतक बन गया था। इसके बाद घरेलू क्रिकेट और युवा श्रृंखलाओं में लगातार आतिशी पारियां खेलकर उन्होंने चयनकर्ताओं और पूर्व क्रिकेटरों का ध्यान अपनी ओर खींचा। सहवाग ने इसी निरंतरता को रेखांकित करते हुए कहा कि वैभव का आत्मविश्वास और टाइमिंग उन्हें अपनी उम्र के अन्य खिलाड़ियों से कहीं आगे खड़ा करती है।
'वह अपने सर्वश्रेष्ठ दौर में हैं, खेल को स्वाभाविक रहने दें'
सहवाग ने जोर देकर कहा कि कोई भी युवा खिलाड़ी जब फॉर्म और आत्मविश्वास के चरम पर होता है, तो उसे अपनी स्वाभाविक शैली के साथ ही खेलना चाहिए। उन्होंने कहा, "जब कोई बल्लेबाज रन बना रहा होता है और गेंद बल्ले के बीचों-बीच आ रही होती है, तो वही उसका सबसे सुनहरा दौर होता है। इस समय वैभव पूरी तरह लय में हैं। कोचिंग स्टाफ और मार्गदर्शकों को चाहिए कि वे उनकी स्वाभाविक आक्रामकता से ज्यादा छेड़छाड़ न करें। उन्हें बस अपनी फिटनेस, बेसिक्स और शॉट चयन को परिपक्व करने पर ध्यान देना चाहिए।"
शोहरत के साथ संयम और लंबी रेस का घोड़ा बनने की नसीहत
सहवाग ने जहां वैभव की प्रतिभा की मुक्तकंठ से सराहना की, वहीं खेल जगत के उतार-चढ़ाव को लेकर एक जरूरी सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक क्रिकेट में शुरुआती सफलता के साथ अचानक भारी शोहरत और आकर्षण मिलता है। ऐसे में कई युवा खिलाड़ी रास्ते से भटक जाते हैं। सहवाग ने कहा कि वैभव के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर टिके रहने के लिए अनुशासित जीवनशैली और मानसिक दृढ़ता बनाए रखनी होगी। यदि वे अपनी एकाग्रता बनाए रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में वे भारतीय क्रिकेट के बड़े आधारस्तंभ बन सकते हैं।