मोहसिन नकवी को भारतीय टीम ने अचानक नहीं दिखाया ठेंगा: BCCI ने पहले ही साफ कर दी थी तस्वीर; पाकिस्तान से मैचों के बहिष्कार पर दिया दो टूक जवाब

मोहसिन नकवी को भारतीय टीम ने अचानक नहीं दिखाया ठेंगा: BCCI ने पहले ही साफ कर दी थी तस्वीर; पाकिस्तान से मैचों के बहिष्कार पर दिया दो टूक जवाब

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार भारत के खिलाफ बयानबाजी करने और भारतीय टीम के रुख पर सवाल उठाने के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। हकीकत यह है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को अचानक कोई झटका नहीं दिया है, बल्कि महीनों पहले ही अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट और लिखित रूप से सामने रख दी थी। नकवी भले ही इसे अचानक लिया गया फैसला बताकर विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन बीसीसीआई ने सुरक्षा चिंताओं, सरकारी दिशा-निर्देशों और द्विपक्षीय संबंधों की मर्यादा को लेकर पहले ही लक्ष्मण रेखा खींच दी थी। पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने और उनके आयोजनों में जाने के मुद्दे पर भारतीय बोर्ड ने एक बार फिर अपना दो टूक रुख दोहराया है।

अचानक नहीं था फैसला: BCCI ने महीनों पहले स्पष्ट किया था स्टैंड

पीसीबी चीफ मोहसिन नकवी के दावों के विपरीत, बीसीसीआई ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) की बैठकों में बहुत पहले ही पूरा रोडमैप रख दिया था:

  • सरकार की क्लीयरेंस की पूर्व शर्त: बीसीसीआई ने आईसीसी के मंच पर स्पष्ट कर दिया था कि टीम इंडिया का पाकिस्तान जाना या वहां कोई द्विपक्षीय सीरीज खेलना केवल खेल बोर्ड का फैसला नहीं हो सकता। यह सीधे तौर पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी पर निर्भर है।

  • लगातार और लिखित संवाद: बोर्ड ने हर आधिकारिक मंच पर पहले ही लिखित नोट दर्ज कराया था कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद और सुरक्षा खतरे पूरी तरह समाप्त नहीं होते, भारतीय टीम किसी भी सूरत में पाकिस्तान की यात्रा नहीं करेगी। इसे अचानक लिया गया फैसला बताकर पीसीबी केवल अपनी घरेलू जनता का ध्यान भटका रहा है।

हाइब्रिड मॉडल (Hybrid Model) का व्यावहारिक विकल्प पहले ही दिया

बीसीसीआई ने टूर्नामेंटों के आयोजन को बाधित करने के बजाय हमेशा व्यावहारिक समाधान पेश किया:

  • भारतीय बोर्ड ने आईसीसी और संबंधित आयोजकों के सामने स्पष्ट किया था कि यदि पाकिस्तान किसी बड़े बहुपक्षीय टूर्नामेंट की मेजबानी करता है, तो भारत के मैचों को किसी तटस्थ स्थान (Neutral Venue) जैसे यूएई या श्रीलंका में शिफ्ट किया जाए।

  • पाकिस्तान बोर्ड को यह विकल्प काफी पहले दे दिया गया था ताकि अंतिम समय पर लॉजिस्टिक या ब्रॉडकास्टिंग की कोई समस्या न आए। इसके बावजूद मोहसिन नकवी हठधर्मिता दिखाते हुए लगातार भारत को पाकिस्तान बुलाने की जिद पर अड़े रहे।

द्विपक्षीय सीरीज और पाकिस्तान दौरों पर भारत का दो टूक जवाब

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड द्वारा लगातार 'क्रिकेट को राजनीति से अलग रखने' की दुहाई दिए जाने पर भारतीय क्रिकेट प्रशासन का जवाब पूरी तरह अडिग और साफ है:

  1. सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोच्च: भारतीय खिलाड़ियों की सुरक्षा को किसी भी स्थिति में दांव पर नहीं लगाया जा सकता। अतीत में पाकिस्तान में श्रीलंकाई टीम पर हुए आतंकी हमले और वहां के मौजूदा सुरक्षा हालात किसी से छिपे नहीं हैं।

  2. शहीदों के सम्मान से समझौता नहीं: देश की आम जनता और क्रिकेट प्रशंसकों की भावनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हैं। जब तक सीमा पर स्थिति सामान्य नहीं होती, पाकिस्तान के साथ सामान्य द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध बहाल करने का कोई औचित्य नहीं बनता।

  3. आईसीसी इवेंट्स में पेशेवर रुख: भारत ने कभी भी आईसीसी या बहुपक्षीय वैश्विक टूर्नामेंटों में खेलने से इनकार नहीं किया है। भारत हमेशा अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत तटस्थ मैदानों पर खेलने के लिए तैयार रहा है, लेकिन पाकिस्तान की धरती पर कदम रखने की अनुमति देश की सुरक्षा नीतियां नहीं देतीं।

मोहसिन नकवी की बयानबाजी पर क्यों नहीं पड़ता कोई असर?

पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी अपनी घरेलू राजनीति और कुर्सी बचाने के लिए मीडिया में आक्रामक तेवर दिखाते रहे हैं। कभी वे आईसीसी में शिकायत करने की बात करते हैं, तो कभी बहिष्कार की धमकी देते हैं। लेकिन वैश्विक क्रिकेट में राजस्व (Revenue) और दर्शकों का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा भारतीय बाजार से आता है। आईसीसी और दुनिया के अन्य क्रिकेट बोर्ड भी भली-भांति जानते हैं कि भारत के बिना किसी भी बड़े टूर्नामेंट का वित्तीय अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार, भारत ने हमेशा नियमों, प्रोटोकॉल और पारदर्शिता के तहत काम किया है। पीसीबी चीफ को यह समझना चाहिए कि खेल संस्थाएं देश की विदेश नीति और संप्रभुता से ऊपर नहीं हो सकतीं। भारत का स्टैंड कल भी यही था, आज भी यही है और आगे भी यही रहेगा।