नागोया में तिरंगा थाम भावुक हुईं मनु भाकर: एशियाई खेलों में आई कोच जसपाल राणा की याद

नागोया में तिरंगा थाम भावुक हुईं मनु भाकर: एशियाई खेलों में आई कोच जसपाल राणा की याद

जापान के नागोया स्थित भव्य मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में शनिवार की शाम जब 20वें एशियाई खेलों के उद्घाटन समारोह का बिगुल बजा, तो पूरा माहौल भारतीय खेल प्रेमियों के लिए गर्व और भावनाओं से भर गया। भारत के 650 से अधिक एथलीटों के दल का नेतृत्व करते हुए देश की स्टार निशानेबाज और डबल ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मनु भाकर ने स्टार कबड्डी खिलाड़ी पवन सहरावत के साथ संयुक्त रूप से भारतीय तिरंगा थामा। हाथ में लहराता राष्ट्रीय ध्वज और चेहरे पर असीम गौरव के बीच मनु की आंखें उस वक्त नम हो गईं जब उन्हें अपने मार्गदर्शक, मेंटर और दिग्गज कोच जसपाल राणा की याद आई।

उद्घाटन समारोह के औपचारिक समापन के तुरंत बाद 24 वर्षीय निशानेबाज मनु भाकर ने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा कि स्टेडियम में तिरंगा लेकर मार्चपास्ट करते समय जसपाल सर की कमी हर पल बेहद शिद्दत से महसूस हुई। उन्होंने कहा कि आज का यह ऐतिहासिक दिन उनके बिना वाकई अत्यधिक भावुक और खालीपन से भरा था। भारतीय निशानेबाजी के स्तंभ माने जाने वाले जसपाल राणा का 12 जून 2026 को मात्र 49 वर्ष की आयु में असामयिक निधन हो गया था। उनके अचानक चले जाने से पूरे भारतीय खेल जगत को गहरा आघात पहुंचा था, विशेष रूप से मनु के लिए यह उनके करियर और निजी जीवन की सबसे अपूरणीय क्षति साबित हुई थी।

पेरिस ओलंपिक का स्वर्णिम सफर और कोच जसपाल राणा का वह अनुशासन भरा मंत्र

मनु भाकर के खेल जीवन को अर्श तक पहुंचाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मानसिक रूप से मजबूत निशानेबाज के रूप में तराशने का पूरा श्रेय जसपाल राणा को जाता है। जब टोक्यो ओलंपिक की नाकामी के बाद मनु बेहद हताश थीं और खेल छोड़ने तक का विचार कर रही थीं, तब जसपाल राणा ने दोबारा उनका हाथ थामा और उनके आत्मविश्वास को पुनर्जीवित किया। उसी कठोर तपस्या और तकनीकी मार्गदर्शन का परिणाम था कि पेरिस ओलंपिक 2024 में मनु भाकर ने इतिहास रचते हुए एक ही ओलंपिक संस्करण में दो कांस्य पदक (10 मीटर एयर पिस्टल और मिक्स्ड टीम स्पर्धा) जीतकर स्वतंत्र भारत की पहली महिला एथलीट बनने का गौरव हासिल किया।

मनु ने उद्घाटन समारोहों को लेकर राणा सर की एक बेहद सख्त और अनुशासित सीख का जिक्र किया, जिसने उनके पूरे पेशेवर दृष्टिकोण को बदल दिया था। जसपाल राणा हमेशा कहा करते थे कि किसी भी बहु-खेल प्रतियोगिता (मल्टी-स्पोर्ट्स इवेंट) के उद्घाटन समारोह में एक शीर्ष एथलीट को तभी शामिल होना चाहिए जब उसे अपने देश का ध्वजवाहक बनने का दुर्लभ सम्मान मिले, अन्यथा उसे टीवी पर ही समारोह देखकर अपनी ऊर्जा और एकाग्रता को अगले दिन शुरू होने वाले मुख्य मुकाबलों के लिए बचाकर रखना चाहिए। राणा का तर्क रहता था कि ओपनिंग सेरेमनी में घंटों खड़े रहने से निशानेबाजों की मांसपेशियों और मानसिक एकाग्रता पर असर पड़ता है, जिसका खामियाजा तुरंत बाद शुरू होने वाली प्रतियोगिताओं में भुगतना पड़ सकता है।

तीसरे एशियाई खेलों का सफर: पालेमबांग की दूरी से नागोया में ध्वजवाहक बनने तक का फलसफा

मनु भाकर वर्तमान में अपने करियर के तीसरे एशियाई खेलों में शिरकत कर रही हैं। उनका यह सफर उपलब्धियों और अनुभवों से भरा रहा है। साल 2018 के जकार्ता-पालेमबांग एशियाई खेलों में जब मनु ने पहली बार कदम रखा था, तब वे उद्घाटन समारोह का हिस्सा नहीं बन सकी थीं क्योंकि उनकी निशानेबाजी स्पर्धाएं मुख्य एथलीट विलेज से काफी दूर पालेमबांग में आयोजित की गई थीं। इसके बाद 2018 के गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्होंने हिस्सा लिया, जहां उन्होंने कोच राणा की प्रतियोगिता को शीर्ष प्राथमिकता देने वाली सीख को हमेशा अपने जेहन में बांधकर रखा।

शनिवार को जब नागोया के विशाल स्टेडियम में 80 हजार से अधिक दर्शकों के सामने उद्घोषक ने 'टीम इंडिया' का नाम पुकारा और मनु भाकर ने आधिकारिक फ्लैग-बियरर के रूप में भारतीय दल की अगुवाई की, तो उन्हें अपने दिवंगत गुरु के वही शब्द बार-बार याद आ रहे थे। आज जब वे वास्तव में उस मुकाम पर पहुंच चुकी थीं जहां तिरंगा सीधे उनके अपने हाथों में था, तब उस गौरवशाली पल को साझा करने के लिए उनके गुरु उनके साथ शारीरिक रूप से मौजूद नहीं थे। मनु ने स्पष्ट किया कि स्टेडियम में उनके द्वारा उठाया गया हर कदम और तिरंगे का हर लहराव उनके स्वर्गीय कोच के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि थी।

अब निशाने पर तीन गोल्ड मेडल: 10 मीटर और 25 मीटर पिस्टल स्पर्धाओं में चुनौती पेश करेंगी मनु

उद्घाटन समारोह के भावुक पलों के बीतने के साथ ही अब मनु भाकर का पूरा फोकस शूटिंग रेंज पर सोने का तमगा जीतने पर केंद्रित हो चुका है। स्वतंत्र भारत के खेल इतिहास में एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित करने वाली मनु एशियाई खेलों में भारत के सबसे बड़े पदक दावेदारों में से एक हैं। वे आगामी दिनों में तीन प्रमुख स्पर्धाओं में अपनी पिस्टल से सटीक निशाना साधेंगी, जिनमें महिला 10 मीटर एयर पिस्टल व्यक्तिगत स्पर्धा, महिला 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल स्पर्धा और 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट शामिल हैं।

भारतीय निशानेबाजी दल के विशेषज्ञों का मानना है कि जसपाल राणा के मार्गदर्शन में मनु ने जिस तरह की मानसिक दृढ़ता और दबाव से निपटने की तकनीक सीखी है, वह नागोया में उन्हें पोडियम के शीर्ष पर पहुंचाने में निर्णायक साबित होगी। पवन सहरावत के साथ भारतीय खेल दल का मान बढ़ाने के बाद मनु अब पूरी तरह से अपनी तकनीकी तैयारियों और रेंज प्रैक्टिस में जुट चुकी हैं। करोड़ों भारतीय खेल प्रशंसकों की निगाहें अब एक बार फिर अपनी स्टार शूटर पर टिकी हैं, जो अपने खेल से अपने स्वर्गीय गुरु जसपाल राणा के सपनों को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर साकार करने उतरेंगी।