'एक सीरीज या एक साल का कमाल नहीं, सचिन तेंदुलकर जैसा महान बनाना है': 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के लिए BCCI ने तैयार किया 10 साल का सीक्रेट मेगा प्लान

'एक सीरीज या एक साल का कमाल नहीं, सचिन तेंदुलकर जैसा महान बनाना है': 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के लिए BCCI ने तैयार किया 10 साल का सीक्रेट मेगा प्लान

भारतीय क्रिकेट के क्षितिज पर महज 15 वर्ष की उम्र में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से तूफान खड़ा करने वाले बिहार के लाल वैभव सूर्यवंशी को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर से लेकर घरेलू लाल गेंद क्रिकेट तक जिस बेखौफ अंदाज में इस बाएं हाथ के किशोर ने गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाई हैं, उसके बाद क्रिकेट गलियारों और सोशल मीडिया पर मांग उठने लगी थी कि उन्हें सीधे 2027 वनडे वर्ल्ड कप के मुख्य स्क्वॉड में शामिल कर दिया जाए। हालांकि, मुंबई स्थित बीसीसीआई मुख्यालय में आयोजित एक अहम उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद बोर्ड के शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि वैभव को लेकर किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं की जाएगी।

बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए आधिकारिक तौर पर खुलासा किया कि बोर्ड का अंतिम विजन वैभव सूर्यवंशी को केवल 'एक सीरीज या एक साल का कमाल' (One-Season Wonder) बनाकर छोड़ना नहीं है, बल्कि उन्हें 'क्रिकेट के भगवान' सचिन तेंदुलकर के नक्शेकदम पर चलाते हुए अगले दो दशकों तक देश की सेवा करने वाला महानतम लीजेंड बनाना है। सैकिया ने दो-टूक कहा कि वैभव की प्रतिभा अद्वितीय है, लेकिन उनके करियर की हर एक सीढ़ी को वैज्ञानिक, रणनीतिक और बेहद नपे-तुले तरीके से चढ़ाया जाएगा ताकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के निर्मम दबाव में उनका हुनर बिखरने न पाए।

'एक कदम भी गलत न पड़े': सचिव देवजीत सैकिया ने बताया क्यों जल्दबाजी में नहीं है भारतीय बोर्ड

बीसीसीआई मुख्यालय में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद देवजीत सैकिया ने बोर्ड के नजरिए को विस्तार से साझा किया। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि वैभव सूर्यवंशी या उनके स्तर का कोई भी असाधारण खिलाड़ी देश के लिए ठीक उसी समर्पण और निरंतरता के साथ खेलता रहे, जैसा सचिन तेंदुलकर ने 24 वर्षों तक किया या अतीत के उन महान खिलाड़ियों ने किया जो आज क्रिकेट के अमर लीजेंड्स हैं। यही कारण है कि हम वैभव के विकास को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता से देख रहे हैं। उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में आगे बढ़ने वाले हर एक कदम, उनकी तकनीक और हर एक पहलू पर बोर्ड की सूक्ष्म नजर है।"

सैकिया ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आधुनिक क्रिकेट में अक्सर युवा खिलाड़ियों को बहुत तेजी से शोहरत और चकाचौंध मिलती है, जिसके बाद अत्यधिक उम्मीदों का बोझ कई होनहारों का करियर असमय खत्म कर देता है। उन्होंने आगे कहा, "हम बहुत ज्यादा सतर्क हैं कि वैभव हर कदम सही दिशा में उठाए। बीसीसीआई उन्हें किसी बड़े टूर्नामेंट या असाइनमेंट के लिए अनियंत्रित रूप से फास्ट-ट्रैक करने की ऐतिहासिक गलती कतई नहीं दोहराएगा। इस बाएं हाथ के बल्लेबाज की प्रगति को एक समय में एक ही कदम (One step at a time) आगे बढ़ाया जाएगा। क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों को यह समझना होगा कि 15 साल की उम्र में शरीर और खेल दोनों परिपक्वता के दौर से गुजर रहे होते हैं।"

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और वीवीएस लक्ष्मण की सीधी निगरानी: 10-15 उभरते हीरों का स्पेशल टारगेट ग्रुप

वैभव सूर्यवंशी के इस दीर्घकालिक रोडमैप को सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसके लिए बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के अत्याधुनिक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (COE - पूर्व में NCA) में एक समर्पित सिस्टम सक्रिय कर दिया गया है। बोर्ड सचिव ने बताया कि पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और वर्तमान में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण को इस पूरे प्रोजेक्ट का मेंटॉर नियुक्त किया गया है। लक्ष्मण न केवल वैभव के वर्कलोड और फिटनेस डेटा की समीक्षा कर रहे हैं, बल्कि उनकी शॉट मेकिंग, फुटवर्क और विदेशी उछाल भरी पिचों के लिए उनकी बल्लेबाजी तकनीक को तराशने में व्यक्तिगत रूप से गहरी दिलचस्पी ले रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि बीसीसीआई की यह दीर्घकालिक योजना सिर्फ एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है। बोर्ड ने भविष्य की भारतीय टीम को ध्यान में रखते हुए वैभव सूर्यवंशी के ही आयु वर्ग (15 से 17 वर्ष) के लगभग 10 से 15 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का एक विशेष 'टारगेटेड कोर ग्रुप' तैयार किया है। इन सभी युवा खिलाड़ियों को देश भर के घरेलू टूर्नामेंट्स से छांटकर विशेष कैंप्स में लाया जा रहा है। लक्ष्मण और उनकी उच्चस्तरीय कोचिंग टीम इन युवाओं की मेंटल कंडीशनिंग, न्यूट्रिशन, मांसपेशियों की मजबूती और मैच अवेयरनेस पर काम कर रही है ताकि जब भी वे मुख्य राष्ट्रीय टीम में कदम रखें, तो अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों का सामना करने के लिए तकनीकी और मानसिक रूप से 100 प्रतिशत तैयार हों।

डेब्यू से लेकर दलीप ट्रॉफी के तूफान तक: 15 साल की उम्र में तोड़े 57 साल पुराने रिकॉर्ड्स

वैभव सूर्यवंशी को लेकर बोर्ड की यह संवेदनशीलता उनकी मैदान पर दिखाई गई उस हैरतअंगेज प्रतिभा का परिणाम है जिसने चयनकर्ताओं को हैरान कर रखा है। जुलाई 2026 में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में जब वैभव ने सीनियर भारतीय टीम की जर्सी पहनकर पदार्पण किया, तो उन्होंने सचिन तेंदुलकर के सबसे युवा भारतीय पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को तोड़ दिया था। उस डेब्यू सीरीज में भले ही वे 14, 13 और 15 रन की पारियों के साथ थोड़ा संकोच में दिखे, लेकिन उसके ठीक बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 श्रृंखला में उन्होंने गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' का खिताब अपने नाम कर लिया।

इसके बाद श्रीलंका में भारत-ए के लिए खेलते हुए उन्होंने लिस्ट-ए क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज शतक जड़कर सनसनी फैला दी। हाल ही में घरेलू सीजन के शुरुआती टूर्नामेंट 'दलीप ट्रॉफी' में ईस्ट जोन के उपकप्तान के रूप में उतरते हुए सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने महज 81 गेंदों पर 7 चौके और 7 छक्के ठोकते हुए 92 रनों की अविश्वसनीय पारी खेली। मात्र 42 गेंदों में अर्धशतक जड़कर उन्होंने दलीप ट्रॉफी के 57 साल के इतिहास में सबसे कम उम्र (15 वर्ष 175 दिन) में फिफ्टी बनाने का ऑल-टाइम रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। इस प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि उनके पास लाल गेंद और सफेद गेंद दोनों प्रारूपों में समान अधिकार से हावी होने की प्राकृतिक क्षमता है।

सीनियर ड्रेसिंग रूम का माहौल और माता-पिता का साथ: युवा सनसनी के मानसिक स्वास्थ्य पर खास ध्यान

बीसीसीआई की इस विस्तृत योजना का सबसे मानवीय और संवेदनशील पहलू यह है कि बोर्ड ने वैभव की उम्र को देखते हुए उनके पारिवारिक माहौल को सुरक्षित रखने का अभूतपूर्व निर्णय लिया है। अमूमन भारतीय सीनियर टीम के विदेशी दौरों पर खिलाड़ियों के साथ उनके माता-पिता के ठहरने का पूरा इंतजाम बोर्ड नहीं करता, लेकिन वैभव के मामले में नियमों को विशेष रूप से शिथिल किया गया है। सचिव देवजीत सैकिया ने पूर्व में भी स्पष्ट किया था कि जब 15 साल का कोई किशोर देश के स्थापित अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों और सीनियर खिलाड़ियों के बीच ड्रेसिंग रूम साझा करता है, तो उसे भावनात्मक सुरक्षा और अपनेपन की सबसे ज्यादा दरकार होती है।

बोर्ड ने व्यवस्था की है कि विदेशी दौरों और लंबे अभियानों के दौरान वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी, और जरूरत पड़ने पर उनके दोनों माता-पिता, उनके साथ टीम होटल और यात्रा में साथ रह सकते हैं। इस पारिवारिक समर्थन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मैच के बाद वैभव अपने परिचित और सहज माहौल में रह सकें, जिससे उनका बचपन, मानसिक संतुलन और मासूमियत क्रिकेट के भारी व्यावसायिक दबाव में कुचली न जाए। इसके साथ ही टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और सीनियर खिलाड़ियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे मैदान पर वैभव को अपनी स्वाभाविक और निडर शैली में खेलने की पूरी छूट दें और किसी भी विफलता पर उन्हें मानसिक संबल प्रदान करें।

2027 वर्ल्ड कप की मांग बनाम बीसीसीआई का संयम: एक संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर गढ़ने का रोडमैप

आगामी व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में वैभव सूर्यवंशी 13 सितंबर से अफगानिस्तान के खिलाफ शुरू होने वाली तीन मैचों की घरेलू टी-20 सीरीज में नीली जर्सी में नजर आएंगे, जिसके बाद 22 सितंबर को जापान में होने वाले ऐतिहासिक 'सुजुकी कप' और एशियन गेम्स 2026 के संभावितों में भी उनका नाम शामिल है। हालांकि, जहां तक टेस्ट और 50 ओवर के एकदिवसीय प्रारूप का सवाल है, चयन समिति ने उन्हें फिलहाल घरेलू क्रिकेट के रणजी ट्रॉफी और भारत-ए के चार दिवसीय मैचों में लगातार समय बिताने की सलाह दी है।

बीसीसीआई का स्पष्ट मानना है कि प्रतिभा को तराशना एक धीमी और सतत चलने वाली प्रक्रिया है। किसी खिलाड़ी को 15 साल की उम्र में टीम इंडिया की कैप पहनाना आसान हो सकता है, लेकिन उसे 35 वर्ष की उम्र तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मंच पर टिके रहने के काबिल बनाना सबसे कठिन काम है। बोर्ड का यह 10-वर्षीय ब्लूप्रिंट यह साबित करता है कि भारतीय क्रिकेट अब केवल फौरी चमक-दमक के पीछे नहीं भाग रहा, बल्कि वह सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और विराट कोहली जैसी उस स्वर्णिम विरासत को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह गंभीर है, जो दशकों तक तिरंगे का मान पूरी दुनिया में ऊंचा रखती है।