'ऋषभ पंत में है वो असली एक्स-फैक्टर'; व्हाइट बॉल क्रिकेट में वापसी को लेकर सुरेश रैना ने किया खुलकर समर्थन
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व आक्रामक बल्लेबाज और मिस्टर आईपीएल के नाम से मशहूर सुरेश रैना ने स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई है। सीमित ओवरों के क्रिकेट (वनडे और टी20) में पंत की जगह और उनकी बल्लेबाजी शैली पर उठ रहे सवालों के बीच रैना ने दो-टूक कहा है कि पंत के पास वह दुर्लभ 'एक्स-फैक्टर' (X-Factor) है, जो दुनिया के किसी भी गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा सकता है।
एक खेल परिचर्चा के दौरान रैना ने कहा कि पंत केवल एक बल्लेबाज नहीं, बल्कि दबाव के पलों में विपक्षी टीम से मैच छीन लेने वाले विशुद्ध मैच-विनर खिलाड़ी हैं। ऐसे खिलाड़ी को व्हाइट बॉल फॉर्मेट में बेंच पर बिठाने के बजाय लंबे समय तक भरोसा और आत्मविश्वास देने की जरूरत है।
'एक्स-फैक्टर वाले खिलाड़ी रोज पैदा नहीं होते'
सुरेश रैना ने पंत के आक्रामक तेवर और मैच पर प्रभाव डालने की क्षमता पर बात करते हुए कई अहम पहलू सामने रखे:
-
निडर और बेबाक अप्रोच: रैना ने कहा, "ऋषभ पंत की सबसे बड़ी खूबी उनका निडर रवैया है। चाहे टेस्ट क्रिकेट हो या टी20, वह गेंद की मेरिट और मैच के हालात के हिसाब से अपना स्वाभाविक खेल खेलते हैं। व्हाइट बॉल क्रिकेट में आपको मिडिल ओवर्स में ऐसे ही खिलाड़ी की जरूरत होती है जो स्पिनर्स और पेसर्स दोनों के खिलाफ खुलकर रन बना सके।""
-
दबाव सोखने का हुनर: पूर्व बाएं हाथ के बल्लेबाज ने तर्क दिया कि पंत ने गाबा से लेकर इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका की मुश्किल पिचों पर अपनी प्रतिभा साबित की है। यदि कोई खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट में दुनिया भर के घातक गेंदबाजों के खिलाफ लगातार मैच जिताऊ पारियां खेल सकता है, तो व्हाइट बॉल क्रिकेट में उसकी क्षमता पर शक करना बेमानी है।
-
लेफ्ट-हैंडर का रणनीतिक फायदा: भारतीय मध्यक्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की कमी को पूरा करने के लिए भी पंत सबसे मुफीद विकल्प हैं। वे किसी भी चरण में मैदान के चारों ओर 360-डिग्री शॉट्स लगाने की काबिलियत रखते हैं।
टीम मैनेजमेंट को दी निरंतरता और बैक करने की सलाह
अक्सर पंत के खराब शॉट्स या व्हाइट बॉल में उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन को लेकर आलोचक उन पर सवाल उठाते हैं। इस पर रैना ने टीम मैनेजमेंट को धैर्य रखने की सलाह दी:
-
लगातार मैचों में दें मौका: रैना का मानना है कि किसी भी आक्रामक खिलाड़ी को दो या तीन पारियों की नाकामी के आधार पर जज नहीं किया जाना चाहिए। जब तक किसी खिलाड़ी को 10-15 मैचों की निरंतर रनिंग (Long Rope) नहीं दी जाएगी, तब तक वह व्हाइट बॉल में अपनी लय पूरी तरह हासिल नहीं कर सकता।
-
भूमिका स्पष्ट करना जरूरी: रैना ने जोर दिया कि कप्तान और मुख्य कोच को पंत को यह भरोसा दिलाना होगा कि उनका स्थान सुरक्षित है और उन्हें मैदान पर जाकर बिना किसी झिझक के अपनी आक्रामक शैली दिखाने की पूरी छूट है।
चैंपियंस ट्रॉफी और आगामी बड़े टूर्नामेंट्स के लिए अहम कड़ी
आगामी आईसीसी टूर्नामेंट्स और द्विपक्षीय सीरीज को देखते हुए भारतीय टीम को मध्यक्रम में ऐसे फिनिशर और गेम-चेंजर की दरकार है जो मुश्किल हालात से टीम को निकाल सके।
रैना के इस मजबूत समर्थन ने एक बार फिर क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच बहस छेड़ दी है कि क्या व्हाइट बॉल सेटअप में ऋषभ पंत को शीर्ष प्राथमिकताओं में रखना भारत की आक्रामक क्रिकेट की रणनीति को और धारदार बनाएगा। क्रिकेट फैंस और विश्लेषकों का भी मानना है कि पंत अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के दम पर अकेले दम पर किसी भी मुकाबले का नतीजा बदलने की क्षमता रखते हैं।