मिताली राज और मेग लैनिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड ध्वस्त करने पर पहली बार छलका स्मृति मंधाना का दर्द और खुशी
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जब कोई बल्लेबाज किसी ऐतिहासिक मील के पत्थर को पार करता है, तो आमतौर पर मैदान पर मौजूद विशाल स्क्रीन, कमेंटेटर्स और डगआउट में बैठे साथी खिलाड़ी जश्न की तैयारियों में जुट जाते हैं। लेकिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान और दुनिया की नंबर एक बल्लेबाज स्मृति मंधाना के साथ जब क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा क्षण घटा, तो उन्हें खुद इस बात का रत्ती भर भी अहसास नहीं था कि उन्होंने क्या अभूतपूर्व कारनामा कर दिखाया है। महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की महान पूर्व कप्तान मिताली राज और ऑस्ट्रेलिया को कई विश्व कप जिताने वाली दिग्गज बल्लेबाज मेग लैनिंग के संयुक्त रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करने के बाद मंधाना ने एक बेहद चौंकाने वाला और दिल छू लेने वाला बयान दिया है।
मैच के बाद दिए गए आधिकारिक बयान में मंधाना ने खुलासा किया कि जब वह क्रीज पर चौके-छक्कों की बरसात कर रही थीं, तब उनके दिमाग में किसी रिकॉर्ड, माइलस्टोन या इतिहास रचने की बात दूर-दूर तक नहीं थी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "सच कहूं तो मुझे बिल्कुल भी नहीं पता था कि मैंने ऐसा कोई रिकॉर्ड तोड़ दिया है या किसी ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर लिया है। जब मैच खत्म हुआ और मैं पवेलियन लौटी, तब किसी ने आकर मुझे बताया कि मैंने मिताली दी और मेग लैनिंग के किसी बड़े कीर्तिमान को पीछे छोड़ दिया है। मैदान के बीच खड़े होकर आपका ध्यान केवल इस बात पर होता है कि अगली गेंद को कैसे खेलना है, न कि इस पर कि स्टेटिस्टिशियन अपनी डायरी में क्या लिख रहे हैं।"
'स्कोरबोर्ड पर नजर थी, रिकॉर्ड बुक पर नहीं': मंधाना ने बताया क्रीज पर अपनी सोच का सच
स्मृति मंधाना ने अपनी बल्लेबाजी के दौरान की मानसिक स्थिति को साझा करते हुए बताया कि आधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आंकड़ों के पीछे भागने वाला खिलाड़ी कभी लंबी रेस का घोड़ा नहीं बन सकता। उन्होंने कहा, "जब आप रन चेज कर रहे होते हैं या पहले बल्लेबाजी करते हुए एक बड़ा स्कोर खड़ा करने की कोशिश में होते हैं, तो आपके सामने केवल एक ही चीज होती है—स्कोरबोर्ड। आपको देखना होता है कि आवश्यक रन रेट क्या है, गेंदबाज किस लाइन पर गेंद डाल रहा है और किस ओवर में जोखिम लेना सुरक्षित रहेगा। उस तनावपूर्ण माहौल में अगर कोई बल्लेबाज यह सोचने लगे कि उसे मेग लैनिंग से आगे निकलना है या मिताली राज के आंकड़े को पार करना है, तो उसका ध्यान एक सेकंड में भटक जाएगा।"
मंधाना ने आगे कहा कि मैदान पर उनका एकमात्र व्यक्तिगत लक्ष्य यही रहता है कि वह टीम के लिए अधिक से अधिक ओवर खेलें। उन्होंने कहा, "एक ओपनर के रूप में जब आप 35 या 40 ओवर तक क्रीज पर टिक जाते हैं, तो रन अपने आप बनने लगते हैं। मुझे खुशी इस बात की है कि मेरी उस पारी ने भारत को एकतरफा जीत दिलाई। रिकॉर्ड्स तो बनते और टूटते रहते हैं; आज मेरा नाम है, कल किसी और प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी का नाम इस सूची में सबसे ऊपर होगा। लेकिन जो चीज हमेशा रिकॉर्ड में दर्ज रहती है, वह है भारत की जीत, और उसी के लिए हम सब अपनी जान लगाते हैं।"
मिताली राज और मेग लैनिंग का कद: 'जिन दिग्गजों को देखकर सीखा, उनसे आगे निकलना अवास्तविक लगता है'
अपनी पूर्व कप्तान मिताली राज और ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज मेग लैनिंग के साथ अपने नाम की तुलना होने पर मंधाना बेहद भावुक और विनम्र नजर आईं। उन्होंने कहा कि ये दोनों खिलाड़ी केवल नाम नहीं हैं, बल्कि आधुनिक महिला क्रिकेट की आधारशिला हैं। मिताली राज ने उस दौर में भारतीय महिला क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित किया जब महिला खिलाड़ियों को न तो वैसी सुविधाएं मिलती थीं और न ही मीडिया कवरेज। वहीं मेग लैनिंग ने एक कप्तान और बल्लेबाज के रूप में ऑस्ट्रेलियाई दबदबे को उस शिखर पर पहुंचाया जहां पहुंचना किसी भी टीम के लिए एक सपना होता है।
मंधाना ने आदरपूर्वक कहा, "मिताली दी हमारे देश की लीजेंड हैं। जब मैंने पहली बार बल्ला थामा था, तो टीवी पर केवल मिताली दी को रन बनाते देखा करती थी। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रखने के बाद मेग लैनिंग की आक्रामकता, उनका फुटवर्क और लगातार शतक ठोकने की भूख हम सभी के लिए एक बेंचमार्क थी। जब लोग कहते हैं कि मैंने उन दोनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, तो यह सुनने में आज भी बहुत अवास्तविक (Unreal) लगता है। मैं कभी खुद को उनके बराबर या उनसे आगे नहीं मान सकती, क्योंकि जिस रास्ते पर आज हम शान से चल रहे हैं, वह रास्ता उन महान दिग्गजों ने अपने पसीने से बनाया था।"
निरंतरता, आक्रामकता और तकनीकी निखार: मंधाना के इस स्वर्णिम दौर का क्या है राज?
स्मृति मंधाना द्वारा मिताली राज और मेग लैनिंग जैसी हस्तियों को पछाड़ना कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह पिछले तीन-चार वर्षों में उनके खेल में आए तकनीकी और मानसिक बदलाव का परिणाम है। अपने करियर के शुरुआती दौर में मंधाना एक बेहद खूबसूरत लेकिन कभी-कभार लापरवाह स्ट्रोक-प्लेयर मानी जाती थीं, जो 30-40 रन बनाकर अपना विकेट फेंक देती थीं। लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी तकनीक में जबर्दस्त अनुशासन जोड़ा है।
अब वह ऑफ-स्टंप के बाहर की गेंदों को छोड़ने में संकोच नहीं करतीं और शॉर्ट-पिच गेंदों पर उनके पुल और कट शॉट्स दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिगाड़ देते हैं। इसके अलावा, स्पिनरों के खिलाफ कदमों का बेहतरीन इस्तेमाल और लॉफ्टेड इनसाइड-आउट शॉट्स खेलने की उनकी क्षमता ने उन्हें खेल के तीनों प्रारूपों—टेस्ट, वनडे और टी-20—में सबसे खतरनाक बल्लेबाज बना दिया है। चाहे दबाव में रन चेज करना हो या मुश्किल विदेशी पिचों पर पहली पारी में पारी को संभालना हो, मंधाना की निरंतरता ने भारतीय शीर्ष क्रम को एक अभूतपूर्व स्थिरता प्रदान की है।
नए युग की शुरुआत: व्यक्तिगत कीर्तिमानों से ऊपर राष्ट्र का गौरव
स्मृति मंधाना का यह बेबाक और सहज बयान यह स्पष्ट करता है कि भारतीय महिला क्रिकेट अब व्यक्तिगत माइलस्टोन्स के संकीर्ण दायरे से पूरी तरह बाहर निकल चुका है। एक समय था जब किसी खिलाड़ी के 50 या 100 रन पूरे होने पर पूरा ध्यान उसी पर सिमट जाता था, भले ही मैच का परिणाम कुछ भी रहा हो। लेकिन मंधाना, कप्तान हरमनप्रीत कौर और इस नई पीढ़ी के खिलाड़ियों ने टीम के भीतर एक नया डीएनए स्थापित किया है, जहां केवल और केवल 'मैच-विनिंग इम्पैक्ट' को ही असली पैमाना माना जाता है।
मिताली राज के वर्षों तक अजेय रहे रिकॉर्ड्स और मेग लैनिंग की शतकीय बादशाहत को पीछे छोड़ते हुए स्मृति मंधाना ने विश्व क्रिकेट को यह संदेश दे दिया है कि भारत का यह स्वर्णिम दौर किसी एक व्यक्ति की चमक तक सीमित नहीं है। उनका यह कहना कि 'मुझे नहीं पता था कि मैंने रिकॉर्ड तोड़ दिया है', इस बात का सबसे जीवंत प्रमाण है कि जब कोई खिलाड़ी केवल अपने खेल और अपने देश की जर्सी के प्रति पूरी निष्ठा से समर्पित हो जाता है, तो इतिहास उसके कदमों में खुद-ब-खुद आकर झुक जाता है। आने वाले बड़े वैश्विक टूर्नामेंट्स में मंधाना की यह बेखौफ और निस्वार्थ बल्लेबाजी शैली भारतीय महिला टीम को विश्व चैंपियन बनाने की सबसे मजबूत गारंटी नजर आ रही है।