सोनल दिनुषा ने भारत की मुट्ठी से छीनी ऐतिहासिक जीत! फॉलोऑन के बाद 264 गेंदों की मैराथन पारी खेलकर बचाई श्रीलंका की लाज
कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब (SSC) ग्राउंड पर भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट इतिहास की अपनी सबसे प्रभावशाली विदेशी जीतों में से एक दर्ज करने की दहलीज पर खड़ी थी। पहली पारी में 503 रनों का विशाल स्कोर खड़ा करने और श्रीलंका को 290 रनों पर समेटकर फॉलोऑन देने के बाद शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम इंडिया की नजरें क्लीन स्वीप पर टिकी थीं। लेकिन पांचवें दिन के अंतिम दो सत्रों में 25 वर्षीय श्रीलंकाई बाएं हाथ के बल्लेबाज सोनल दिनुषा भारतीय स्पिनरों और तेज गेंदबाजों के बीच अभेद्य दीवार बनकर खड़े हो गए। दिनुषा ने अपने धैर्य, क्लासिकल टेस्ट तकनीक और फौलादी एकाग्रता के दम पर न केवल नाबाद 133 रनों की यादगार पारी खेली, बल्कि 154 ओवरों तक क्रीज पर खूंटा गाड़कर श्रीलंका को एक निश्चित और शर्मनाक पारी की हार से बचा लिया। दिनुषा के इस असाधारण संघर्ष के चलते दूसरा टेस्ट मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ, जिससे भारत ने दो मैचों की सीरीज 1-0 से अपने नाम तो की, लेकिन जीत का स्वाद पूरी तरह फीका रह गया।
फॉलोऑन का भारी दबाव और दिनुषा का ऐतिहासिक पलटवार
चौथे दिन के खेल में जब भारत ने श्रीलंका को फॉलोऑन खेलने के लिए दोबारा मैदान पर उतारा था, तब ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मैच पांचवें दिन के पहले या दूसरे सत्र तक सिमट जाएगा। दूसरी पारी में भी श्रीलंका के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज पथुम निसंका और कुसल मेंडिस सस्ते में पवेलियन लौट गए थे और टीम 120 रनों के भीतर 4 विकेट गंवाकर गहरे संकट में थी।
ऐसे नाजुक मोड़ पर क्रीज पर उतरे सोनल दिनुषा ने मैच का पूरा परिदृश्य ही बदल दिया। दिनुषा ने आते ही आक्रामक शॉट्स खेलने के बजाय गेंद की मेरिट पर खेलने और शरीर के करीब डिफेंस करने की क्लासिकल रणनीति अपनाई। उन्होंने भारतीय गेंदबाजों के आत्मविश्वास को धीरे-धीरे तोड़ना शुरू किया। पांचवें दिन की सुबह जब गेंद टर्न और बाउंस ले रही थी, तब दिनुषा ने अपने फ्रंटफुट और बैकफुट के संतुलन से स्पिनरों की फिरकी को पूरी तरह बेअसर कर दिया।
264 गेंदें, 133* रन और अभेद्य रक्षात्मक तकनीक का मुजाहिरा
सोनल दिनुषा की यह नाबाद 133 रनों की पारी आधुनिक टेस्ट क्रिकेट में रक्षात्मक बल्लेबाजी (Defensive Batting) का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण बन गई है। उन्होंने 264 गेंदों का सामना करते हुए अपनी पारी में 14 चौके और 1 छक्का लगाया। दिनुषा ने 412 मिनट (लगभग 7 घंटे) से अधिक समय क्रीज पर बिताया।
इस मैराथन पारी के दौरान दिनुषा की शॉट सेलेक्शन देखने लायक थी। उन्होंने ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों को बिना किसी लालच के छोड़ा और केवल ढीली गेंदों पर ही बाउंड्री बटोरीं। जब भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने चारों तरफ क्लोज-इन फील्डर्स (शॉर्ट लेग, सिली पॉइंट, स्लिप और लेग स्लिप) का घेरा बना दिया, तब भी दिनुषा का संयम नहीं डगमगाया। उन्होंने लगातार सिंगल और डबल लेकर स्ट्राइक को रोटेट किया और निचले क्रम के पुछल्ले बल्लेबाजों को स्ट्राइक से दूर रखकर भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह थका दिया।
दोनों पारियों में शतक जड़कर रचा दुर्लभ कीर्तिमान
कोलंबो टेस्ट सोनल दिनुषा के अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। दिनुषा ने इस मुकाबले की पहली पारी में भी दबाव के क्षणों में 108 रनों की जुझारू शतकीय पारी खेली थी, जिसके दम पर श्रीलंका 290 तक पहुंच पाया था। इसके बाद दूसरी पारी में फॉलोऑन के बाद नाबाद 133 रन बनाकर वे टेस्ट क्रिकेट के उन गिने-चुने दिग्गजों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ एक ही टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक जड़े हैं।
श्रीलंकाई टेस्ट इतिहास में कुमार संगकारा और अरविंद डिसिल्वा के बाद दिनुषा ऐसे तीसरे बल्लेबाज बने हैं जिन्होंने फॉलोऑन की स्थिति में चौथी पारी में शतक बनाकर अपनी टीम के लिए टेस्ट मैच ड्रॉ कराया है। उनके इस अद्वितीय और ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
भारतीय गेंदबाजों की तमाम रणनीतियां हुईं बेअसर
भारतीय गेंदबाजी आक्रमण, जिसमें रवींद्र जडेजा और तेज गेंदबाजी के अगुवा शामिल थे, पांचवें दिन श्रीलंकाई निचले क्रम को समेटने के लिए संघर्ष करता नजर आया।
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रवींद्र जडेजा की मैराथन स्पेल: जडेजा ने दूसरी पारी में 42 से अधिक ओवर फेंके और 3 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए, लेकिन वे दिनुषा के डिफेंस में सेंध नहीं लगा सके।
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शॉर्ट-पिच और बाउंसर का जाल: भारतीय तेज गेंदबाजों ने पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग और लगातार बाउंसर फेंककर दिनुषा को शॉर्ट लेग पर कैच कराने की रणनीति अपनाई, जिसे श्रीलंकाई बल्लेबाज ने बेहतरीन डक और लीव के जरिए नाकाम कर दिया।
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निचले क्रम की साझेदारियां: दिनुषा ने सातवें और आठवें विकेट के लिए निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ क्रमशः 78 और 54 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारियां कर मैच को सुरक्षित ड्रॉ की तरफ मोड़ दिया।
दिन के अंतिम घंटे में जब श्रीलंका का स्कोर 9 विकेट पर 429 रन पहुंच गया और जीत की कोई संभावना नहीं बची, तब दोनों टीमों के कप्तानों ने हाथ मिलाकर मैच को ड्रॉ घोषित करने पर सहमति जताई।
सीरीज 1-0 से भारत के नाम, पर WTC फाइनल की राह में झटका
भारतीय टीम ने इस दौरे पर पहला टेस्ट मैच जीतकर सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली है और ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। कप्तान के रूप में शुभमन गिल और पहली पारी के शतकवीर देवदत्त पडिक्कल (117 रन) के लिए यह सीरीज व्यक्तिगत तौर पर अच्छी रही।
हालांकि, आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC 2025-27) की अंक तालिका के दृष्टिकोण से यह ड्रॉ भारत के लिए एक बड़ा नुकसान साबित हुआ है। जीत के 12 अंकों के बजाय मैच ड्रॉ होने पर भारत को महज 4 अंक मिले, जिससे टीम इंडिया का जीत प्रतिशत 53.33% से फिसलकर 51.52% पर आ गया है। इस अंक तालिका में भारत पांचवें स्थान पर ही अटका रह गया है, जिससे लॉर्ड्स में होने वाले फाइनल की डगर और अधिक कठिन हो गई है।
श्रीलंका क्रिकेट को मिला नया 'संकटमोचक'
श्रीलंकाई क्रिकेट के लिए, जो पिछले कुछ समय से टेस्ट प्रारूप में पुनर्गठन के दौर से गुजर रहा है, सोनल दिनुषा का यह प्रदर्शन एक नई सुबह की तरह है। पूर्व श्रीलंकाई दिग्गज बल्लेबाजों ने दिनुषा के धैर्य की तुलना महान महेला जयवर्धने और थिलन समरवीरा से की है। फॉलोऑन के भारी दबाव, विश्वस्तरीय गेंदबाजी आक्रमण और टर्निंग ट्रैक पर जिस मानसिक मजबूती का प्रदर्शन दिनुषा ने किया, उसने यह साबित कर दिया है कि वे भविष्य में विश्व क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाजों में शुमार होने की पूरी क्षमता रखते हैं।