टीम इंडिया के अंडर-19 स्टार रोहित यादव पर BCCI ने ठोका 2 साल का बैन: ऑस्ट्रेलिया सीरीज के लिए हुआ था चयन, श्रीलंका में चटकाए थे 6 विकेट
भारतीय क्रिकेट के जूनियर सर्किट में उस वक्त जबरदस्त हड़कंप मच गया जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने राष्ट्रीय अंडर-19 टीम के उभरते हुए लेग स्पिनर रोहित यादव को उम्र में धोखाधड़ी और जन्म से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर का दोषी पाते हुए दो साल के लिए निलंबित कर दिया। यह कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब कुछ ही सप्ताह पहले रोहित यादव को ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीम के खिलाफ होने वाली आगामी घरेलू श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में चुना गया था। इस महीने के अंत में गुजरात के राजकोट और अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले जाने वाले वनडे और मल्टी-डे मुकाबलों के लिए घोषित टीम में उनका नाम प्रमुखता से शामिल था। बोर्ड के इस कड़े फैसले के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया है और उनकी जगह जल्द ही किसी अन्य स्पिनर को स्क्वॉड में शामिल किया जाएगा।
बीसीसीआई के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, यह प्रतिबंध 'तत्काल प्रभाव' से लागू हो चुका है और इस संबंध में देश के सभी संबद्ध राज्य क्रिकेट संघों को आधिकारिक तौर पर सूचित कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अगले दो वर्षों तक रोहित यादव भारतीय क्रिकेट के किसी भी घरेलू, आयु-वर्ग या बीसीसीआई से मान्यता प्राप्त आधिकारिक टूर्नामेंट में मैदान पर नहीं उतर सकेंगे। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले और बंगाल क्रिकेट संघ (CAB) के जरिए जूनियर क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने वाले इस युवा गेंदबाज के लिए यह फैसला उनके तेजी से उभरते करियर पर एक अचानक और करारा ब्रेक साबित हुआ है।
3 बर्थ सर्टिफिकेट और 4 बार आधार में बदलाव: 27 महीने के फर्जीवाड़े का ऐसे हुआ पर्दाफाश
रोहित यादव के खिलाफ इस जांच की शुरुआत बीसीसीआई द्वारा आयु सत्यापन (Age Verification) को लेकर जारी किए गए कड़े दिशा-निर्देशों के बाद हुई थी। बंगाल क्रिकेट संघ द्वारा जब खिलाड़ियों के दस्तावेजों की गहन पड़ताल की गई, तो रोहित यादव के रिकॉर्ड्स में ऐसी चौंकाने वाली विसंगतियां सामने आईं जिन्होंने जांच अधिकारियों को हैरान कर दिया। पीटीआई और स्पोर्टस्टार की रिपोर्ट्स के अनुसार, रोहित के पास से तीन अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र पाए गए, जिनमें जन्म का वर्ष 2007, 2009 और 2010 दर्ज था। आधिकारिक रिकॉर्ड्स और उनके वास्तविक दस्तावेजों के बीच लगभग 27 महीने (सवा दो साल से अधिक) का बड़ा अंतर दर्ज किया गया, जिसके चलते वह अंडर-19 आयु वर्ग में खेलने के अयोग्य पाए गए।
दस्तावेजों के इतिहास की जांच से पता चला कि रोहित ने जब वर्ष 2014 में पहली बार क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल में अपना पंजीकरण कराया था, तब उनकी जन्मतिथि 7 जुलाई 2007 दर्ज कराई गई थी और उनका गृह पता उत्तर प्रदेश का था। इसके बाद 2017 में जब उनका आधार कार्ड अपडेट हुआ, तो उनके जन्म का वर्ष बदलकर 2006 कर दिया गया, जो 2020 तक के रिकॉर्ड में बरकरार रहा। लेकिन 2021 में एक बार फिर आधार विवरण में खेल किया गया और जन्म का साल घटाकर सीधे 2009 कर दिया गया, जिसे बाद के वर्षों में भी कायम रखा गया। इस दौरान उनके पते में भी लगातार बदलाव किए गए—उत्तर प्रदेश से बदलकर हावड़ा और बाद में लिलुआ दर्ज किया गया। इतने बड़े पैमाने पर जन्मतिथि और पते के बार-बार बदले जाने ने धोखाधड़ी की मंशा को पूरी तरह उजागर कर दिया, जिसके बाद कैब ने अपनी रिपोर्ट बीसीसीआई को सौंपी और बोर्ड ने बिना किसी रियायत के दो साल का प्रतिबंध ठोक दिया।
श्रीलंका में 6 विकेट लेकर बने थे जीत के हीरो: कैसे करियर के सबसे सुनहरे मोड़ पर लगा ग्रहण
रोहित यादव का इस तरह प्रतिबंधित होना खेल प्रेमियों के लिए इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि वह महज कुछ महीने पहले तक भारतीय अंडर-19 टीम के प्रमुख मैच-विनर बनकर उभरे थे। जुलाई में जब भारतीय अंडर-19 टीम ने श्रीलंका का दौरा किया था, तो रोहित उस दल के अहम सदस्य थे। कोलंबो में खेले गए दूसरे यूथ टेस्ट में उन्होंने अपनी लेग-स्पिन के जाल में श्रीलंकाई बल्लेबाजों को बुरी तरह फंसाया था। उन्होंने पहली पारी में 2 और दूसरी पारी में 4 विकेट चटकाते हुए कुल 6 विकेट हासिल किए थे, जिसके दम पर भारत ने श्रीलंका को 211 रनों के विशाल अंतर से रौंदकर टेस्ट सीरीज पर कब्जा किया था। पूरे दौरे पर टेस्ट और वनडे मिलाकर उन्होंने कुल 7 विकेट झटके थे।
श्रीलंका में उनके इस मैच-जिताऊ प्रदर्शन और कलात्मक लेग-ब्रेक व गुगली फेंकने की क्षमता को देखते हुए राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी हाई-प्रोफाइल सीरीज के लिए भी चुन लिया था। भारतीय क्रिकेट के गलियारों में उन्हें भविष्य का एक बड़ा लेग स्पिनर माना जा रहा था। घरेलू सर्किट में बंगाल की अंडर-16 और अंडर-19 टीमों से खेलते हुए उन्होंने कई बार पांच-पांच विकेट झटके थे। लेकिन जैसे ही श्रीलंका दौरे के दौरान और उसके बाद उनके दस्तावेजों की तकनीकी जांच आगे बढ़ी, उनकी उम्र का यह खेल बेनकाब हो गया। जिस खिलाड़ी के सामने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने का सुनहरा मंच था, वह अब अगले दो वर्षों तक मैदान से दूर रहने को विवश हो चुका है।
कैब (CAB) का सबसे बड़ा क्रैकडाउन: 62 क्रिकेटर्स अयोग्य, अंडर-19 वर्ल्ड कप विनर रवि कुमार का नाम भी शामिल
रोहित यादव पर लगा यह प्रतिबंध कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह बंगाल क्रिकेट में चल रहे अब तक के सबसे बड़े शुद्धिकरण अभियान का हिस्सा है। क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) ने दस्तावेजों, जन्मतिथि और फर्जी पते की विसंगतियों के खिलाफ व्यापक जांच अभियान चलाते हुए कुल 62 खिलाड़ियों को आगामी 2026-27 और 2027-28 सत्र के लिए किसी भी आधिकारिक टूर्नामेंट में पंजीकरण या क्लब ट्रांसफर के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। कैब ने इन सभी संदिग्ध खिलाड़ियों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी है।
इस सूची में सबसे चौंकाने वाला और बड़ा नाम बाएं हाथ के तेज गेंदबाज रवि कुमार का है। रवि कुमार कोई साधारण खिलाड़ी नहीं हैं; वह वेस्टइंडीज में आयोजित 2022 के आईसीसी अंडर-19 विश्व कप को जीतने वाली भारतीय टीम के मुख्य तेज गेंदबाज रहे हैं। उस विश्व कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ रवि ने 9 ओवर में मात्र 34 रन देकर 4 बड़े विकेट चटकाए थे और पूरे टूर्नामेंट में 10 विकेट झटककर भारत की खिताबी जीत में रीढ़ की हड्डी बने थे। कैब के जांच रिकॉर्ड में रवि कुमार के दस्तावेजों में उम्र का अंतर 40 से 45 महीने (लगभग 4 साल) से भी अधिक पाया गया है। इसके चलते उनके 2022 के पदार्पण से लेकर 2025-26 तक के सभी आयु-वर्ग रिकॉर्ड्स को आधिकारिक रूप से अमान्य घोषित कर दिया गया है। इसके अलावा बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर विशाल भट्टी समेत कई अन्य खिलाड़ियों पर भी गाज गिरी है।
उम्र के फर्जीवाड़े पर बीसीसीआई की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी: युवाओं के लिए कड़ा सबक और भविष्य की राह
भारतीय क्रिकेट में आयु धोखाधड़ी (Age Fraud) एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है, जहां खिलाड़ी अपनी उम्र कम दिखाकर जूनियर टूर्नामेंट्स में अनुचित लाभ उठाने की कोशिश करते रहे हैं। इससे उन वास्तविक युवा खिलाड़ियों का हक छिन जाता है जो अपनी सही उम्र के साथ ईमानदारी से पसीना बहाते हैं। इससे पहले भी 2018 अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में शतक लगाने वाले मनजोत कालरा, दिल्ली के प्रिंस यादव और नीतीश राणा जैसे खिलाड़ी उम्र संबंधी विसंगतियों के चलते बोर्ड और संघों की अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर चुके हैं।
बीसीसीआई ने हाल के वर्षों में टीडब्ल्यू3 (TW3) बोन डेंसिटी टेस्ट, डिजिटल आधार ट्रैकिंग और स्कूल-अस्पताल रिकॉर्ड्स के क्रॉस-वेरिफिकेशन के जरिए इस फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। बोर्ड की मौजूदा नीति के तहत, यदि कोई खिलाड़ी उम्र के दस्तावेजों में जानबूझकर हेरफेर का दोषी पाया जाता है, तो उस पर सीधे दो साल का पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाता है। रोहित यादव और 62 अन्य खिलाड़ियों पर हुई यह ताजा कार्रवाई देश भर की क्रिकेट अकादमियों और महत्वाकांक्षी युवा खिलाड़ियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि शॉर्टकट और कागजी हेरफेर के दम पर बनाई गई सफलता की इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह जाती है। मैदान पर की गई मेहनत तभी सार्थक है जब वह नियमों और सत्यनिष्ठा की बुनियाद पर टिकी हो।