'बाबर आजम और शाहीन अफरीदी के अहंकार ने डुबोई पाकिस्तान क्रिकेट की नैया': पूर्व दिग्गज का बड़ा दावा, ड्रेसिंग रूम की गुटबाजी और कप्तानी की जंग पर हुआ सनसनीखेज खुलासा

'बाबर आजम और शाहीन अफरीदी के अहंकार ने डुबोई पाकिस्तान क्रिकेट की नैया': पूर्व दिग्गज का बड़ा दावा, ड्रेसिंग रूम की गुटबाजी और कप्तानी की जंग पर हुआ सनसनीखेज खुलासा

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के लगातार गिरते प्रदर्शन, बड़े आईसीसी टूर्नामेंट्स में शुरुआती दौर से बाहर होने और घरेलू मैदान पर भी टेस्ट व सीमित ओवरों की सीरीज गंवाने के पीछे की सबसे बड़ी वजह अब खुलकर सामने आ गई है। पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर ने राष्ट्रीय टीम के पतन का सबसे बड़ा कारण ड्रेसिंग रूम के भीतर दो सबसे बड़े सुपरस्टार्स—पूर्व कप्तान बाबर आजम और स्टार तेज गेंदबाज शाहीन शाह अफरीदी के बीच जारी आपसी खींचतान, अहंकार और गहरी दरार को ठहराया है। पूर्व दिग्गज के अनुसार, मैदान पर दिखने वाली एकजुटता केवल दिखावा मात्र है, जबकि पर्दे के पीछे कप्तानी की कुर्सी और वर्चस्व की लड़ाई ने पूरे ड्रेसिंग रूम को दो गुटों में बांट दिया है, जिसका सीधा खामियाजा पाकिस्तान क्रिकेट को भुगतना पड़ रहा है।

बाबर आजम और शाहीन अफरीदी के बीच वर्चस्व की जंग: कप्तानी के फेरबदल ने बढ़ाई खाई

पाकिस्तान क्रिकेट में दरार की शुरुआत उस वक्त से मानी जाती है जब वनडे विश्व कप में नाकामी के बाद बाबर आजम से तीनों प्रारूपों की कप्तानी छीन ली गई थी। उस दौरान शाहीन शाह अफरीदी को टी20 टीम की कमान सौंपी गई, जबकि शान मसूद को टेस्ट कप्तान बनाया गया। हालांकि, शाहीन का कप्तानी कार्यकाल महज एक सीरीज तक ही सीमित रहा और न्यूजीलैंड दौरे पर मिली करारी शिकस्त के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने बिना किसी पूर्व सूचना के शाहीन को कप्तानी से हटाकर दोबारा बाबर आजम को सीमित ओवरों का कप्तान नियुक्त कर दिया।

पूर्व दिग्गज का दावा है कि बोर्ड के इस अचानक और अपमानजनक फैसले ने शाहीन अफरीदी के मन में गहरी कड़वाहट पैदा कर दी। शाहीन और उनके समर्थक खेमे को लगा कि बाबर आजम ने बैकडोर से लॉबिंग करके दोबारा कप्तानी हासिल की है। इसके बाद से दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच बातचीत लगभग औपचारिक बनकर रह गई। मैदान पर एक-दूसरे की सफलता पर जश्न मनाने से लेकर फील्ड प्लेसमेंट और रणनीतिक चर्चाओं में यह दूरी साफ नजर आने लगी, जिसने पूरी टीम के आपसी तालमेल को तहस-नहस कर दिया।

ड्रेसिंग रूम में दो फाड़: गुटबाजी और आपसी अविश्वास ने डुबोई टीम की नैया

पूर्व क्रिकेटर ने खुलासा किया है कि इस निजी रंजिश का सबसे खतरनाक असर टीम के युवा और नए खिलाड़ियों पर पड़ा है। टीम का ड्रेसिंग रूम अब दो स्पष्ट खेमों में बंट चुका है—एक गुट जो पूरी तरह बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान के करीब है, और दूसरा गुट जो शाहीन अफरीदी और उनके करीबी तेज गेंदबाजों के साथ खड़ा है। जब किसी टीम में चयन और प्लेइंग 11 का फैसला योग्यता के बजाय इस बात पर होने लगे कि कौन सा खिलाड़ी किस खेमे का वफादार है, तो उस टीम का पतन तय हो जाता है।

दबाव भरे मैचों में जब टीम को एकजुट होकर लड़ने की जरूरत होती थी, तब दोनों गुट एक-दूसरे के फैसलों पर सवाल उठाते नजर आए। कई अहम मौकों पर गेंदबाजों द्वारा कप्तान की फील्डिंग रणनीति को नजरअंदाज करना और कप्तानों द्वारा गेंदबाजों के सुझावों को खारिज करना आम बात हो गई। इसी अंदरूनी कलह का नतीजा रहा कि पाकिस्तान को कमजोर समझी जाने वाली टीमों के खिलाफ भी शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा।

पीसीबी की दिशाहीन नीतियां और म्यूजिकल चेयर: आग में घी डालने का काम

पूर्व दिग्गजों ने इस पूरे विवाद में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के आलाकमान को भी बराबर का गुनहगार ठहराया है। बोर्ड में लगातार अध्यक्षों का बदलना, हर नए चेयरमैन द्वारा अपनी पसंद की चयन समिति बनाना और कप्तानी को म्यूजिकल चेयर का खेल बना देना खिलाड़ियों के बीच असुरक्षा की सबसे बड़ी वजह बना। पीसीबी प्रबंधन ने कभी भी दोनों सीनियर खिलाड़ियों को एक कमरे में आमने-सामने बैठाकर उनके मतभेदों को सुलझाने की गंभीर कोशिश नहीं की।

उल्टे, बोर्ड के अधिकारियों ने मीडिया में लीक होने वाली खबरों के जरिए दोनों खिलाड़ियों की छवि को नुकसान पहुंचाने का खेल खेला। विदेशी दौरों के दौरान टीम के अंदरूनी विवादों का सार्वजनिक होना और सोशल मीडिया पर खिलाड़ियों के समर्थकों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ कैंपेन चलाना यह साबित करता है कि टीम प्रबंधन का ड्रेसिंग रूम पर से पूरा नियंत्रण खत्म हो चुका था।

मैदान पर दिखा असर: आईसीसी टूर्नामेंट्स में नाकामी और ऐतिहासिक हार का सिलसिला

बाबर और शाहीन के बीच इस तनातनी का सीधा असर मैदान पर टीम के नतीजों में देखने को मिला। वनडे वर्ल्ड कप हो या फिर टी20 वर्ल्ड कप, पाकिस्तानी टीम किसी भी बड़े मैच में एक संगठित इकाई की तरह नहीं खेल सकी। बल्लेबाजों ने जब रन बनाए तो गेंदबाजों ने मैच गंवाए, और जब गेंदबाजों ने विपक्षी टीम को बांधा तो बल्लेबाजों ने गैर-जिम्मेदाराना शॉट्स खेलकर घुटने टेक दिए।

घरेलू मैदान पर बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 2-0 से मिली ऐतिहासिक क्लीन स्वीप और इंग्लैंड के खिलाफ रावलपिंडी में पारी से हार जैसी शर्मनाक घटनाएं इसी टीम भावना के अभाव का जीता-जागता सबूत थीं। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि तकनीकी रूप से सक्षम होने के बावजूद मानसिक रूप से बिखरी हुई पाकिस्तानी टीम किसी भी अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में दबाव का सामना करने में असमर्थ साबित हुई।

क्या कभी सुधरेंगे हालात? पाकिस्तान क्रिकेट को उबारने के लिए दिग्गजों की खरी-खरी

पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट पंडितों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक बाबर आजम, शाहीन अफरीदी और अन्य सीनियर खिलाड़ी अपने व्यक्तिगत अहंकार को त्यागकर देश के मान-सम्मान को आगे नहीं रखेंगे, तब तक पाकिस्तान क्रिकेट का इस दलदल से निकलना नामुमकिन है। बोर्ड को भी एक सख्त, निष्पक्ष और पेशेवर रुख अपनाते हुए यह संदेश देना होगा कि कोई भी खिलाड़ी, चाहे उसका कद कितना भी बड़ा क्यों न हो, देश और खेल से बड़ा नहीं हो सकता।

यदि दोनों खिलाड़ियों के बीच की यह कड़वाहट जल्द खत्म नहीं होती, तो पीसीबी को कड़े फैसले लेते हुए टीम की पूरी लीडरशिप और कोर ग्रुप को नए सिरे से तैयार करना होगा। पाकिस्तान के लाखों जुनूनी क्रिकेट फैंस उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनके सितारे अपनी गलतियों से सबक लेंगे और आपसी मतभेदों को भुलाकर एक बार फिर पाकिस्तान के परचम को दुनिया भर में बुलंद करेंगे।