'हमने जीतने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन किस्मत श्रीलंका के साथ थी…'; कोलंबो टेस्ट ड्रॉ होने पर छलका कप्तान शुभमन गिल का दर्द
कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब (SSC) ग्राउंड पर खेला गया दूसरा टेस्ट मैच पांचवें दिन के अंतिम पलों में ड्रॉ समाप्त होने के बाद भारतीय खेमे में जहां 1-0 से सीरीज जीतने का संतोष दिखा, वहीं मुट्ठी में आई एक बड़ी जीत फिसल जाने की मायूसी भी साफ नजर आई। पहली पारी में 503/9 का विशाल स्कोर खड़ा करने और श्रीलंका को फॉलोऑन देने के बाद भारतीय टीम जीत से महज एक विकेट दूर रह गई थी। मैच के बाद पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन और प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने खुलकर अपनी बात रखी। गिल ने स्वीकार किया कि पांचवें दिन मैच जीतने के लिए उनके गेंदबाजों और फील्डरों ने अपनी क्षमता से बढ़कर हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन खेल के नाजुक पलों में किस्मत पूरी तरह श्रीलंकाई टीम और उनके शतकवीर सोनल दिनुषा के पक्ष में खड़ी नजर आई।
'हमने हर योजना आजमाई, पर किस्मत का साथ नहीं मिला': कप्तान गिल का दर्द
मैच के बाद बातचीत करते हुए शुभमन गिल ने पांचवें दिन के कड़े संघर्ष और फील्ड पर बने दबाव का जिक्र किया। गिल ने कहा कि जब आप विपक्षी टीम को फॉलोऑन देते हैं और अंतिम दिन के आखिरी सत्र तक मैच ले जाते हैं, तो एक कप्तान के तौर पर आप चाहते हैं कि वह आखिरी विकेट भी आपके खाते में आए।
गिल ने कहा, "क्रिकेट में कभी-कभी आपको यह स्वीकार करना पड़ता है कि आपने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन दिन आपका नहीं था। हमने आज गेंदबाजी में हर वैरिएशन आजमाया, फील्डिंग में हर आक्रामक चक्रव्यूह रचा और खिलाड़ियों ने 154 ओवर तक मैदान पर अपनी ऊर्जा का एक-एक कतरा झोंक दिया। लेकिन कई बार गेंद बल्ले का किनारा लेकर स्लिप के ठीक आगे गिर रही थी, कुछ करीबी फैसले हमारे पक्ष में नहीं गए और कई मौकों पर गेंद स्टंप्स से बाल-बाल बचकर निकल गई। श्रीलंका के बल्लेबाजों, खासकर सोनल दिनुषा ने गजब का धैर्य दिखाया, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि आज के दिन किस्मत भी उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी थी।"
सोनल दिनुषा की तारीफ: 'जब कोई बल्लेबाज ऐसी पारी खेले तो सम्मान करना बनता है'
भारतीय कप्तान ने दोनों पारियों में शतक जड़कर मैच बचाने वाले श्रीलंकाई बल्लेबाज सोनल दिनुषा (नाबाद 133 रन, 264 गेंदें) की जमकर प्रशंसा की। गिल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट का असली मतलब यही है कि जब आपकी टीम सबसे गहरे संकट में हो, तब आप अपनी तकनीक और मानसिक दृढ़ता से मैच का रुख बदल दें।
शुभमन गिल ने कहा, "दिनुषा ने जिस तरह से पांचवें दिन टर्निंग पिच पर हमारी स्पिन और रिवर्स स्विंग का सामना किया, वह काबिले-तारीफ है। हमने उनके इर्द-गिर्द 4 से 5 क्लोज-इन फील्डर्स लगा रखे थे, लगातार दबाव बना रहे थे, लेकिन उन्होंने अपना संयम नहीं खोया। जब कोई युवा बल्लेबाज फॉलोऑन के दबाव में दोनों पारियों में शतक लगाता है और 7 घंटे क्रीज पर डटकर अपनी टीम के लिए टेस्ट ड्रॉ कराता है, तो एक विरोधी कप्तान के रूप में आपको उनके खेल और अनुशासन का पूरा सम्मान करना होता है।"
फॉलोऑन देने के फैसले का किया बचाव: 'हम मैच जीतना चाहते थे'
मैच ड्रॉ होने के बाद क्रिकेट पंडितों के एक वर्ग द्वारा श्रीलंका को फॉलोऑन देने के फैसले पर सवाल उठाए जा रहे थे कि क्या भारत को दूसरी पारी में तेजी से 150-200 रन बनाकर श्रीलंका को चौथी पारी में 350+ रनों का लक्ष्य देना चाहिए था। गिल ने इस बहस पर विराम लगाते हुए अपने फैसले का पूरी मजबूती से बचाव किया।
गिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमारे पास पहली पारी के आधार पर 213 रनों की बहुत बड़ी और निर्णायक बढ़त थी। टेस्ट क्रिकेट में जब आपको विपक्षी टीम को बैकफुट पर धकेलने और पारी से मैच जीतने का मौका मिलता है, तो आपको वह आक्रामक कदम उठाना ही चाहिए। यदि हम दोबारा बल्लेबाजी करने उतरते, तो हमें श्रीलंका को आउट करने के लिए 40 से 50 ओवर कम मिलते। फॉलोऑन देकर हमने खुद को 154 ओवर गेंदबाजी करने का पूरा मौका दिया। हमारी सोच पूरी तरह सकारात्मक और मैच जीतने वाली थी, और मुझे अपने उस फैसले पर आज भी कोई पछतावा नहीं है।"
गेंदबाजों के वर्कलोड और जज्बे पर गर्व: जडेजा और पेसर्स की सराहना
गिल ने इस टेस्ट मैच में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण, विशेषकर रवींद्र जडेजा और तेज गेंदबाजों के अथक परिश्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्रीलंका की तपती धूप और उमस भरे मौसम में लगातार दो पारियों में 250 से अधिक ओवर फेंकना किसी भी गेंदबाजी यूनिट के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद थका देने वाला काम होता है।
कप्तान ने कहा, "जडेजा भाई ने लगातार 42 ओवर से अधिक गेंदबाजी की और हर ओवर में वही सटीकता और अनुशासन बनाए रखा। हमारे तेज गेंदबाजों ने पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग निकालने और बाउंसर फेंकने में अपनी पूरी ताकत लगाई। फील्डरों ने भी पांचवें दिन के अंतिम ओवर तक एक-एक रन रोकने के लिए डाइव लगाई। एक कप्तान के तौर पर मैं अपनी टीम के इस जुझारू रवैये से बेहद संतुष्ट हूं।"
1-0 से सीरीज जीत: पडिक्कल का शतक और युवा टीम के सकारात्मक पहलू
ड्रॉ की निराशा के बावजूद गिल ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय टीम ने विदेशी धरती पर एक और टेस्ट सीरीज 1-0 से अपने नाम की है, जो इस युवा टीम के आत्मविश्वास के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। पहले टेस्ट में मिली शानदार जीत और दूसरे टेस्ट में 503 रनों का विशाल स्कोर टीम के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को दर्शाता है।
गिल ने पहली पारी में 117 रनों की शानदार शतकीय पारी खेलने वाले देवदत्त पडिक्कल के प्रदर्शन की विशेष रूप से तारीफ की। उन्होंने कहा कि कई सीनियर खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में युवा बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी संभाली है और विदेशी परिस्थितियों में लंबा खेलने की क्षमता दिखाई है। गिल ने कहा कि यह सीरीज भारतीय टेस्ट क्रिकेट के एक नए युग की शुरुआत है और टीम हर मुकाबले से सीख लेकर आगे बढ़ रही है।
WTC फाइनल की राह: 'हमें बाकी बचे 7 मैचों में गलतियों से बचना होगा'
आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC 2025-27) की अंक तालिका में इस ड्रॉ से हुए नुकसान पर भी गिल ने खुलकर बात की। इस ड्रॉ के कारण भारत का जीत प्रतिशत 53.33% से घटकर 51.52% पर आ गया है और टीम 5वें स्थान पर बनी हुई है।
गिल ने माना कि लॉर्ड्स में होने वाले WTC फाइनल में जगह बनाने के लिए अब आने वाले 7 टेस्ट मैच (न्यूजीलैंड में 2 टेस्ट और घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 टेस्ट) बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि डब्ल्यूटीसी में हर एक अंक और हर एक जीत कितना मायने रखती है। आज हमें 8 अंकों का नुकसान हुआ है, लेकिन हमारा ध्यान आगे की चुनौतियों पर है। न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी सीरीज में हमें अपने मौकों को भुनाना होगा और किसी भी ढिलाई से बचना होगा। हमारी टीम इस चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है।"