2021 में ममता बनर्जी की जीत के बाद क्या हुआ था? संदेशखाली में दफनाने के पीछे का खौफनाक सच

2021 में ममता बनर्जी की जीत के बाद क्या हुआ था? संदेशखाली में दफनाने के पीछे का खौफनाक सच

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का संदेशखाली एक बार फिर चुनावी हिंसा और राजनीतिक खौफ के खौफनाक अतीत को लेकर राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं के हमले में मारे गए 40 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता आस्तिक चंद्र दास के कंकाल के अवशेष अदालत के आदेश के बाद पूरे पांच साल बाद कब्र से बाहर निकाले गए हैं। मजिस्ट्रेट, डॉक्टरों, फॉरेंसिक टीम और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में नजात थाना क्षेत्र के झांझानिया गांव के पास से शव को खोदकर निकाला गया। परिजनों का गंभीर आरोप है कि हत्या के बाद सबूत मिटाने और मामले को दबाने के लिए पुलिस के पहरे में शव को जबरन दफना दिया गया था और पोस्टमार्टम तक नहीं कराने दिया गया था।

2 मई 2021: ममता बनर्जी की जीत के बाद क्या हुआ था?

2 मई 2021 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए थे, जिसमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी। नतीजे आने के कुछ ही घंटों के भीतर राज्य के कई जिलों से चुनाव बाद हिंसा (Post-Poll Violence) की खबरें आने लगी थीं।

मृतक आस्तिक चंद्र दास के परिवार और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:

  • विजय जुलूस के दौरान हमला: चुनाव नतीजों के अगले दिन टीएमसी समर्थक इलाके में विजय जुलूस निकाल रहे थे। आस्तिक चंद्र दास भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे और विश्व हिंदू परिषद (VHP) से भी जुड़े हुए थे।

  • लाठी, डंडों और बेल्ट से बर्बर पिटाई: मृतक की बेटी पापिया मंडल और बेटे सुब्रत दास का आरोप है कि टीएमसी समर्थकों ने भाजपा का समर्थन करने पर उनके पिता को घेर लिया और बांस की लाठियों, डंडों व बेल्टों से उनकी बेरहमी से पिटाई की।

  • अस्पताल जाने से रोका गया: हमले में आस्तिक चंद्र दास गंभीर रूप से घायल हो गए थे, लेकिन परिजनों को उन्हें बेहतर इलाज के लिए अस्पताल ले जाने से कथित तौर पर रोक दिया गया। तड़पते हुए उन्होंने घर पर ही दम तोड़ दिया।

जबरन दफनाने और सबूत मिटाने का संगीन आरोप

परिजनों का कहना है कि मौत के बाद जब वे पुलिस के पास लिखित शिकायत लेकर गए, तो नजात थाने की पुलिस ने मामला दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया।

परिजनों ने आरोप लगाया कि स्थानीय रसूखदारों और पुलिसकर्मियों ने उनके घर के बाहर पहरा बैठा दिया था। शव का पोस्टमार्टम कराए बिना परिजनों को धमकाकर गांव के पास ही जमीन में दफनाने पर मजबूर कर दिया गया, ताकि हत्या और चोटों के मेडिकल सबूत हमेशा के लिए खत्म हो जाएं। हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार दाह संस्कार करने के बजाय शव को दफनाना पड़ा था।

5 साल बाद कैसे खुली कब्र?

वर्षों तक डर के साए में रहने के बाद, राज्य में राजनीतिक समीकरणों और परिस्थितियों में बदलाव के बाद परिवार ने हिम्मत जुटाकर अदालत का दरवाजा खटखटाया और नए सिरे से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शव को कब्र से निकालकर नए सिरे से पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच कराने का सख्त आदेश दिया। रविवार को मजिस्ट्रेट की निगरानी में पूरी वीडियोग्राफी के साथ कंकाल के अवशेष बाहर निकाले गए और जांच लैब में भेजे गए। परिवार ने अब पूरे मामले की केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) से निष्पक्ष जांच और हत्यारों को फांसी की सजा देने की गुहार लगाई है।

भाजपा का टीएमसी पर तीखा हमला

कब्र से शव निकाले जाने की घटना सामने आते ही बंगाल की सियासत गरमा गई है:

  • भाजपा का बयान: भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने कहा कि यह घटना 2021 के चुनाव बाद राज्य में हुए खौफनाक 'आतंक के राज' और भाजपा कार्यकर्ताओं पर हुए अत्याचारों का जीता-जागता सबूत है। उस समय पुलिस मूकदर्शक बनी रही और अपराधियों को खुला संरक्षण दिया गया, लेकिन अब कानून का शिकंजा कस कर रहेगा।

  • संदेशखाली का पुराना दाग: संदेशखाली वही इलाका है जो स्थानीय बाहुबली नेता शाहजहां शेख और उसके सहयोगियों द्वारा महिलाओं के यौन उत्पीड़न व जमीन हड़पने के आरोपों के बाद पूरे देश में चर्चा में आया था।

अब 5 साल पुराने इस हत्याकांड के फिर से खुलने और फॉरेंसिक जांच शुरू होने से तत्कालीन पुलिस अधिकारियों और स्थानीय आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।