वैभव सूर्यवंशी को क्यों नहीं मिला मौका, गौतम गंभीर ने किया संजू सैमसन पर बड़ा खुलासा

वैभव सूर्यवंशी को क्यों नहीं मिला मौका, गौतम गंभीर ने किया संजू सैमसन पर बड़ा खुलासा

दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में 13 से 17 सितंबर के बीच भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली गई तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला में टीम इंडिया ने एकतरफा खेल दिखाते हुए 3-0 से ऐतिहासिक क्लीन स्वीप दर्ज किया। अफगान टीम की घरेलू मेजबानी में खेली गई इस सीरीज में भारतीय टीम का दबदबा हर विभाग में साफ नजर आया। हालांकि, इस शानदार जीत के बावजूद क्रिकेट प्रशंसकों, खेल विश्लेषकों और सोशल मीडिया पर एक सवाल लगातार गूंजता रहा कि हालिया दिनों में घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय दौरों पर रनों की बारिश करने वाले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को किसी भी मैच की प्लेइंग इलेवन में शामिल क्यों नहीं किया गया?

दलीप ट्रॉफी के मुकाबलों और उससे पहले जिम्बाब्वे दौरे पर टी20 सीरीज के दौरान वैभव सूर्यवंशी के बल्ले ने जमकर आग उगली थी और उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी शैली से चयनकर्ताओं का दिल जीता था। प्रशंसकों को पूरी उम्मीद थी कि अफगानिस्तान जैसी सीरीज में इस युवा बल्लेबाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका दिया जाएगा। लेकिन लगातार तीनों मैचों में उन्हें डगआउट में बैठकर साथी खिलाड़ियों को पानी पिलाते देखना पड़ा। सीरीज खत्म होने के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में हेड कोच गौतम गंभीर ने आखिरकार इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी और स्पष्ट किया कि इसके पीछे की असली वजह क्या थी।

संजू सैमसन की धुआंधार फॉर्म बनी रुकावट, ओपनिंग स्लॉट में अभिषेक के साथ जमाया खूंटा

गौतम गंभीर ने तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं को उजागर करते हुए बताया कि वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग 11 से बाहर रखने का सबसे बड़ा कारण विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन की बेहतरीन फॉर्म और टीम संतुलन था। सीरीज के दौरान पारी की शुरुआत करने की जिम्मेदारी विस्फोटक बल्लेबाज अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन को सौंपी गई थी। हालांकि श्रृंखला के पहले टी20 मुकाबले में संजू बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके और जल्दी पवेलियन लौट गए, लेकिन इसके बाद उन्होंने जबर्दस्त वापसी की।

संजू सैमसन ने दूसरे टी20 मुकाबले में 57 रनों की तूफानी अर्धशतकीय पारी खेली और फिर निर्णायक तीसरे मुकाबले में भी 50 रन बनाकर टीम को मजबूत आधार दिया। लगातार दो बैक-टू-बैक अर्धशतक जड़कर संजू ने ओपनिंग स्लॉट में अपनी जगह पूरी तरह पक्की कर ली। गंभीर ने जोर देकर कहा कि जब कोई सीनियर बल्लेबाज शीर्ष क्रम में लगातार मैच-जिताऊ रन बना रहा हो, तो टीम प्रबंधन के लिए उसे बेंच पर बैठाकर किसी नए खिलाड़ी को आजमाना क्रिकेट के सिद्धांतों के खिलाफ होता। संजू के इस निरंतर प्रदर्शन ने वैभव के लिए प्लेइंग 11 के दरवाजे इस सीरीज में बंद रखे।

'कोई बिना टैलेंट के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट नहीं बनता': गंभीर ने समझाया टीम कॉम्बिनेशन का गणित

प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने संजू सैमसन के कद और अंतरराष्ट्रीय ट्रैक रिकॉर्ड का बचाव करते हुए कहा कि संजू ने बार-बार साबित किया है कि उनके भीतर मैच का पासा पलटने की क्या असाधारण काबिलियत है। गंभीर ने कहा कि कोई भी खिलाड़ी बिना असाधारण प्रतिभा के आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' का खिताब हासिल नहीं कर सकता। गंभीर ने माना कि उनके कोचिंग करियर का सबसे कठिन फैसला यही था जब उन्होंने कुछ समय पहले इंग्लैंड दौरे की सीरीज के लिए संजू को टीम से बाहर रखा था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कभी-कभी टीम संतुलन और तात्कालिक फॉर्म के आधार पर कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं।

गौतम गंभीर ने अपने विजन को विस्तार से साझा करते हुए कहा कि एक कोच के रूप में वे उसी विनिंग कॉम्बिनेशन पर भरोसा बनाए रखना चाहते थे जिसने टीम को वर्ल्ड कप की ट्रॉफी दिलाई थी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर कोई स्थापित खिलाड़ी तीन या चार पारियों में असफल हो जाता है, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह रातों-रात खराब खिलाड़ी बन गया। जो टीम एक वर्ल्ड कप से दूसरे वर्ल्ड कप तक बिना एक भी मुकाबला गंवाए चैंपियन बनी हो, वह एक खराब सीरीज के बाद बेकार टीम नहीं बन जाती। सीनियर खिलाड़ियों को आत्मविश्वास देना और उन पर भरोसा जताना एक स्वस्थ ड्रेसिंग रूम की पहली निशानी है।

वैभव सूर्यवंशी को करना होगा अपनी बारी का इंतजार: 'उम्र 15 हो या 30, प्रोसेस का सम्मान जरूरी'

युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के उज्ज्वल भविष्य पर बात करते हुए हेड कोच गौतम गंभीर ने बहुत परिपक्व और कड़ा संदेश दिया। गंभीर ने कहा कि वैभव के दृष्टिकोण से बात बहुत स्पष्ट है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बारी के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार करना होगा। गंभीर ने कहा कि टीम प्रबंधन भली-भांति वाकिफ है कि वैभव के पास किस स्तर की प्राकृतिक प्रतिभा है और वे क्रीज पर क्या चमत्कार कर सकते हैं। लेकिन टीम का एक बुनियादी नियम यह है कि जिस खिलाड़ी ने देश के लिए कई वर्षों तक पसीना बहाया है और लगातार प्रदर्शन किया है, वरीयता सूची में उसका स्थान हमेशा उस युवा से पहले रहेगा जो अभी-अभी ड्रेसिंग रूम का हिस्सा बना है।

गंभीर ने भारतीय क्रिकेट के स्वस्थ प्रतिस्पर्धी माहौल का जिक्र करते हुए कहा कि हम ड्रेसिंग रूम में कड़ी प्रतिस्पर्धा और असीम प्रतिभा चाहते हैं, लेकिन क्रिकेट की अपनी एक निश्चित प्रणाली होती है। चाहे किसी खिलाड़ी की उम्र 15 साल हो या फिर 30 साल, हर किसी को अपनी बारी की प्रतीक्षा करनी होती है। गंभीर ने भरोसा दिलाया कि जब भी वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया की नीली जर्सी पहनकर मैदान पर उतरने का मौका मिलेगा, तो उन्हें लंबा रन दिया जाएगा ताकि वे बिना किसी दबाव के लंबे समय तक देश का प्रतिनिधित्व कर सकें।