गोरखपुर में 400 यूनिट क्षमता का IMA चैरिटेबल ब्लड सेंटर तैयार, सीएम योगी ने किया लोकार्पण; 'नो प्रॉफिट
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गंभीर मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। पूर्वांचल के प्रमुख केंद्र गोरखपुर के तारामंडल स्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) भवन में 400 यूनिट की क्षमता वाला अत्याधुनिक चैरिटेबल ब्लड सेंटर बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को विधिवत फीता काटकर इस ब्लड सेंटर का लोकार्पण किया।
इस नई सुविधा के शुरू होने से न केवल गोरखपुर, बल्कि महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बस्ती और सिद्धार्थनगर समेत पूरे पूर्वांचल और पड़ोसी देश नेपाल से आने वाले गंभीर मरीजों को रक्त व उसके घटकों (कंपोनेंट्स) की कमी से नहीं जूझना पड़ेगा। आईएमए की जिला इकाई द्वारा संचालित यह पहला पूर्ण विकसित चैरिटेबल ब्लड सेंटर है।
80 लाख की लागत से 2500 वर्गफीट में निर्माण, ब्लड सेपरेशन यूनिट भी लैस
आईएमए के सचिव डॉ. वाई सिंह और संयुक्त सचिव डॉ. दिनेश चंद्रा के अनुसार, इस चैरिटेबल ब्लड सेंटर को तारामंडल स्थित आईएमए परिसर के करीब 2500 वर्गफीट क्षेत्रफल में तैयार किया गया है।
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लागत और क्षमता: इसके निर्माण और अत्याधुनिक मशीनों की स्थापना में लगभग 80 लाख रुपये का खर्च आया है। सेंटर में एक समय में करीब 400 यूनिट सुरक्षित रक्त संग्रहित करने की क्षमता मौजूद है।
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ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट: इस सेंटर में अत्याधुनिक ब्लड सेपरेशन यूनिट स्थापित की गई है। यहां केवल होल ब्लड (सामान्य रक्त) ही नहीं, बल्कि पैक्ड रेड ब्लड सेल्स (PRBC), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसिपिटेट भी अलग-अलग तैयार और स्टोर किए जा सकेंगे। इससे डेंगू, थैलेसीमिया, कैंसर और गंभीर सर्जरी वाले मरीजों को उनकी जरूरत के मुताबिक सटीक रक्त घटक मिल सकेंगे।
'नो प्रॉफिट, नो लॉस' पर संचालन, 3-स्तरीय कमेटी करेगी निगरानी
आईएमए गोरखपुर के अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने स्पष्ट किया कि इस ब्लड सेंटर का संचालन पूरी तरह 'नो प्रॉफिट, नो लॉस' (ना लाभ, ना हानि) के सेवा सिद्धांत पर किया जाएगा। किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में भर्ती जरूरतमंद मरीज को बेहद न्यूनतम और किफायती प्रोसेसिंग शुल्क पर रक्त उपलब्ध कराया जाएगा।
सेंटर की पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए तीन स्तरीय प्रबंधकीय ढांचा बनाया गया है:
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सलाहकार बोर्ड (Advisory Board): इसमें डॉ. अवधेश अग्रवाल, डॉ. विनय राय और डॉ. बृजेश जायसवाल शामिल हैं।
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स्थायी समिति (Standing Committee): डॉ. वाई सिंह की अध्यक्षता वाली इस समिति में 9 वरिष्ठ चिकित्सक सदस्य हैं।
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पैथोलॉजिस्ट विंग: डॉ. अशोक गुप्ता, डॉ. संतोष चौरसिया और डॉ. हिमांशु श्रीवास्तव तकनीकी जांच और रक्त सुरक्षा मानकों की निगरानी करेंगे।
भविष्य में अस्पतालों में आपात स्थिति के दौरान सीधे रक्त की डिलीवरी और मोबाइल रक्तदान (एंबुलेटरी वैन) की व्यवस्था भी शुरू की जाएगी।
'रक्त फैक्ट्रियों में नहीं बनाया जा सकता': लोकार्पण पर बोले सीएम योगी
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चिकित्सकों और आईएमए की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। सीएम योगी ने कहा कि विज्ञान ने चाहे जितनी भी तरक्की कर ली हो और अस्पताल कितने भी आधुनिक हो गए हों, लेकिन इंसानी खून किसी मशीन या फैक्ट्री में नहीं बनाया जा सकता। यह केवल एक संवेदनशील इंसान द्वारा दूसरे इंसान को दिए जाने वाले दान से ही संभव है।
सीएम ने डॉक्टरों से अपील की:
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स्वैच्छिक रक्तदान को आंदोलन बनाएं: मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटने के लिए समाज में युवाओं और नागरिकों को नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित करें।
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पेशेवर रक्तदाताओं (Professional Donors) पर नकेल: व्यावसायिक तौर पर खून बेचने वाले सिंडिकेट और संक्रमित व्यक्तियों से रक्तदान पर कड़ाई से रोक लगाई जाए, ताकि मरीजों तक पूरी तरह सुरक्षित और संक्रमण-मुक्त रक्त ही पहुंचे।
3.09 करोड़ के आठवें 'कल्याण मंडपम' का भी उपहार
ब्लड सेंटर के उद्घाटन के साथ ही मुख्यमंत्री ने उर्वरक नगर (जंगल नकहा) में 3.09 करोड़ रुपये की लागत से बने गोरखपुर के आठवें 'कल्याण मंडपम' का भी लोकार्पण किया। 2461 वर्गमीटर में बने दो मंजिला इस भव्य भवन में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अपनी बेटियों की शादी और मांगलिक कार्यक्रम बेहद रियायती दरों पर कर सकेंगे। एक ही दिन में स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार से जुड़ी इन दो बड़ी सौगातों से गोरखपुर वासियों में भारी खुशी की लहर है।