बहू शालू के बाद अब बेटे सुब्रत पर कसा शिकंजा, किलर से बातचीत के सबूत मिलने पर पुलिस का गहराया शक
उत्तर प्रदेश के कानपुर में कल्याणपुर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में हुए करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा (63) के सनसनीखेज हत्याकांड में जांच की सुई अब परिवार के इकलौते बेटे सुब्रत मिनोचा पर पूरी तरह टिक गई है। इस मामले में कारोबारी की बहू शालू मिनोचा, पूर्व नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। शुरुआती जांच में जहां बहू द्वारा 6 लाख रुपये की सुपारी देकर ससुर की हत्या कराने की बात सामने आई थी, वहीं अब पुलिस और सर्विलांस टीम की गहन जांच में बेटे सुब्रत की भूमिका को लेकर भी कई चौंकाने वाले डिजिटल व कॉल रिकॉर्ड साक्ष्य हाथ लगे हैं। इन कड़ियों के जुड़ने के बाद पुलिस का संदेह गहरा गया है और मामले में बेटे पर शिकंजा कसने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।
लगातार तीन दिन से थाने बुलाकर पूछताछ, 1000 पन्नों के कॉल रिकॉर्ड्स में मिले सुराग
कल्याणपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें पिछले तीन दिनों से सुब्रत मिनोचा को थाने बुलाकर घंटों तक गहन पूछताछ कर रही हैं। पुलिस द्वारा खंगाले गए लगभग 1,000 पन्नों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) में यह खुलासा हुआ है कि सुब्रत और मुख्य हत्यारोपी पूर्व नौकर विशाल गौतम के बीच पिछले कुछ महीनों में सैकड़ों बार बातचीत हुई थी। सबसे ज्यादा संदिग्ध पहलू यह है कि हत्याकांड से ठीक दो दिन पहले 3 सितंबर को जब विशाल ने एक नया सिम कार्ड खरीदा, तो उस नए नंबर से बहू शालू के साथ-साथ बेटे सुब्रत को भी कई बार फोन कॉल किए गए थे। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, यदि साजिश केवल बहू ने रची थी, तो नए नंबर से बेटे से लगातार संपर्क साधने की क्या वजह थी—यही सवाल अब जांच का मुख्य केंद्र बन चुका है।
सीसीटीवी फुटेज में पहचान छुपाने और पार्टी में जाने का दोहरा रवैया
वारदात की रात यानी 5 सितंबर को जब विनीत मिनोचा की उनके ही फ्लैट में चाकुओं से गोदकर बेरहमी से हत्या की जा रही थी, उस वक्त सुब्रत अपनी पत्नी शालू के साथ एक लाउंज में किटी पार्टी में शामिल था। हत्या के तुरंत बाद जब पुलिस ने अपार्टमेंट के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज दिखाई, तो सुब्रत ने अपने ही पुराने नौकर विशाल को पहचानने से साफ इनकार कर दिया था। बाद में जब शालू ने उसकी पहचान उजागर की, तभी पुलिस हत्यारोपियों तक पहुंच सकी। इसके अलावा फ्लैट में जबरन घुसने (Forced Entry) का कोई निशान न मिलना और डुप्लीकेट चाबी के जरिए हत्यारों का अंदर पहुंचना भी अंदरूनी मिलीभगत की ओर सीधा इशारा कर रहा है।
कड़े वित्तीय नियंत्रण और बंदिशों से उपजी रंजिश का एंगल
पुलिस जांच में सामने आया है कि विनीत मिनोचा अपने कारोबार और परिवार पर सख्त वित्तीय व अनुशासनात्मक नियंत्रण रखते थे। करोड़ों का कारोबार होने के बावजूद वे अपने इकलौते बेटे सुब्रत को एक सामान्य कर्मचारी की तरह महज 35 हजार रुपये महीना वेतन देते थे और बहू शालू को 10 हजार रुपये घर खर्च के लिए मिलते थे, जिसका पाई-पाई का हिसाब देना पड़ता था। इसके साथ ही घर में लगे सीसीटीवी कैमरों और बाहर जाने पर रोक-टोक से दंपती नाराज चल रहा था। पिता की 2022 की पंजीकृत वसीयत और संपत्तियों के मालिकाना हक को लेकर भी जांच एजेंसियां वित्तीय एंगल खंगाल रही हैं।
19 सितंबर को कस्टडी रिमांड पर सुनवाई, कराया जाएगा आमना-सामना
कल्याणपुर पुलिस ने मामले की मुख्य सूत्रधार शालू और दोनों सुपारी किलर (विशाल व राजकिशोर) की पुलिस कस्टडी रिमांड (पीसीआर) के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की है, जिस पर 19 सितंबर को अदालत में अहम सुनवाई होनी है। पुलिस का कहना है कि रिमांड मिलते ही तीनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर बेटे सुब्रत से तीखे सवाल पूछे जाएंगे। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों की पूर्ण तस्दीक नहीं हो जाती, तब तक हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और साक्ष्य पुख्ता होते ही बेटे के खिलाफ भी कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।