विज्ञापनों में ही मिल रही नौकरी': अखिलेश यादव का योगी सरकार पर बड़ा हमला, रायबरेली जाने का किया ऐलान
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के रोजगार दावों पर जोरदार प्रहार किया। अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में युवाओं को नौकरी और रोजगार केवल सरकारी विज्ञापनों और होर्डिंग्स पर ही दिखाई दे रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार जितनी सरकारी नौकरियां देने का दावा अपने विज्ञापनों में कर रही है, यदि वे आंकड़े सच होते तो उत्तर प्रदेश में अब तक एक भी बेरोजगार नौजवान नहीं बचा होता।
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल केवल प्रचार तंत्र और झूठे आंकड़ों के सहारे प्रदेश के शिक्षित बेरोजगारों को गुमराह कर रहा है। प्रदेश का युवा लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक, भर्तियों में देरी और आरक्षण के नियमों की अनदेखी से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले दस वर्षों में हजारों करोड़ रुपये केवल इसलिए खर्च कर दिए ताकि विपक्षी नेताओं की छवि खराब की जा सके और अपनी नाकामियों पर पर्दा डाला जा सके। ऐसे में समाजवादी पार्टी अब इन भ्रामक प्रचारों के खिलाफ जमीन से लेकर डिजिटल और सोशल मीडिया के हर मोर्चे पर सीधी लड़ाई लड़ेगी।
रायबरेली में छात्रसभा कार्यक्रम रोके जाने पर बिफरे सपा प्रमुख, 24 सितंबर को दौरा तय
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने रायबरेली में समाजवादी छात्रसभा का निर्धारित कार्यक्रम रोके जाने की घटना पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि सत्ता के संरक्षण में पल रहे अराजक तत्वों ने सपा के शांतिपूर्ण छात्र सम्मेलन को बलपूर्वक रोका। इतना ही नहीं, प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस प्रशासन ने भी प्रोटोकॉल को ताक पर रखकर पार्टी के निर्वाचित विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया।
अखिलेश यादव ने इसे प्रदेश की कानून व्यवस्था का दोहरा चरित्र बताते हुए कहा कि भाजपा के राज में न्याय और सम्मान जाति देखकर तय होता है। यदि कोई सत्ताधारी वर्ग या सजातीय है तो उसका सम्मान होता है, लेकिन यदि कोई पिछड़ा, दलित या अल्पसंख्यक यानी पीडीए वर्ग से आता है तो उसके साथ खुलेआम अपमान और दमन का व्यवहार किया जाता है। इस प्रशासनिक मनमानी का सीधा मुकाबला करने के लिए उन्होंने घोषणा की कि वे आगामी 24 सितंबर को स्वयं रायबरेली का दौरा करेंगे और कार्यकर्ताओं व छात्रों के बीच जाकर सीधे संवाद करेंगे।
एआई वीडियो पर मुकदमे से लेकर यूपीआई तक: डिजिटल सेंसरशिप और आर्थिक नीतियों पर सवाल
डिजिटल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने पूर्व विधायक जगराम पासवान के भाई साधू पासवान पर कथित एआई जनरेटेड वीडियो शेयर करने के आरोप में दर्ज हुए मुकदमे का कड़ा संज्ञान लिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि भाजपा का यही तानाशाही रवैया जारी रहा, तो आने वाले दिनों में निष्पक्ष राजनीतिक वीडियो देखने वाले आम नागरिकों को भी जेल भेजने का काम शुरू कर दिया जाएगा। सरकार हर उस आवाज को दबाना चाहती है जो डिजिटल माध्यमों से उनके सच को उजागर करती है।
वहीं वित्तीय नीतियों और डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई से जुड़े सवाल पर सपा प्रमुख ने केंद्र व राज्य की आर्थिक सोच को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की आर्थिक नीतियों का मूल मंत्र यही रहता है कि कैसे आम और गरीब जनता की गाढ़ी कमाई को अप्रत्यक्ष तरीकों से निकालकर बड़े पूंजीपतियों की तिजोरियों में भरा जाए। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि जब देश की राजधानी में छात्रसंघ चुनाव हो सकते हैं, तो उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र लोकतंत्र पर पाबंदी क्यों लगाई गई है? यूपी के उच्च शिक्षण संस्थानों में भी तत्काल छात्रसंघ चुनाव कराए जाने चाहिए।
एटा-कासगंज के लिए विशेष घोषणापत्र, चिकोरी किसानों का मुद्दा और नए सियासी समीकरण
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संदर्भ में बोलते हुए अखिलेश यादव ने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी आगामी चुनावों के लिए एटा और कासगंज जिलों की स्थानीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर एक अलग क्षेत्रीय घोषणापत्र तैयार करेगी। उन्होंने विशेष तौर पर इन इलाकों में बड़े पैमाने पर उगाई जाने वाली चिकोरी की फसल का जिक्र करते हुए कहा कि चिकोरी किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए विशेष योजना लाई जाएगी। किसानों की कर्जमाफी पर उन्होंने याद दिलाया कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव 'नेताजी' के समय में किसानों का कर्ज माफ कर राहत दी गई थी और भविष्य में भी किसानों के हित में ऐसे साहसिक निर्णय लिए जाएंगे।
प्रेस वार्ता के अंत में अन्य दलों के कई प्रमुख नेताओं ने समाजवादी पार्टी का दामन थामा। बांदा से बहुजन समाज पार्टी के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी मयंक द्विवेदी, कानपुर देहात के प्रमुख नेता जुनैद और श्रावस्ती के पूर्व नगर पालिका चेयरमैन जितेंद्र कुमार गुप्ता समेत कई समर्थकों ने सपा की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। अखिलेश यादव ने सभी नए सदस्यों का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का यह सामाजिक गठबंधन प्रदेश में बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरेगा।