योगी के मंत्री संजय निषाद को अखिलेश यादव की तीखी नसीहत; कहा- समर्थन वापसी की धमकी दें
उत्तर प्रदेश की सियासत में कानून-व्यवस्था और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की सुरक्षा के मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। गोंडा जिले में कारोबारी विनोद कुमार साहनी की निर्मम हत्या और उसके बाद अपनी ही सरकार के खिलाफ लखनऊ से लेकर गोंडा तक धरने पर बैठने वाले कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के कदम पर अखिलेश यादव ने बेहद चुटीली और राजनीतिक रूप से तीखी प्रतिक्रिया दी है। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के स्वास्थ्य का हालचाल जानने उनके आवास पहुंचे अखिलेश यादव ने संजय निषाद को नसीहत देते हुए कहा कि सत्ता के सहयोगी दल के मंत्री को धरने पर बैठकर लाचारी नहीं दिखानी चाहिए। अखिलेश ने कहा कि यदि वे अपनी समाज की बात मनवाना चाहते हैं, तो धरने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें सरकार को डराना होगा और सरकार से बाहर आने की सीधी धमकी देनी होगी।
'सहयोगी मंत्री धरने पर बैठ रहे, इससे बड़ी लाचारी क्या होगी': अखिलेश यादव
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और स्थिति इतनी हास्यास्पद और गंभीर हो गई है कि सरकार में शामिल कैबिनेट मंत्री को ही न्याय की गुहार लगाने के लिए जमीन पर धरने पर बैठना पड़ रहा है। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मत्स्य मंत्री संजय निषाद का बिना नाम लिए लेकिन सीधा इशारा करते हुए अखिलेश ने कहा कि एक मंत्री को धरने पर बैठने की क्या मजबूरी है?
अखिलेश ने दो टूक शब्दों में कहा, "सहयोगी दल के मंत्री को धरने पर नहीं बैठना चाहिए, उन्हें सरकार को डराना चाहिए। यदि भाजपा सरकार के किसी सहयोगी दल का मंत्री यह कह दे कि वह सरकार से बाहर जा रहा है और समर्थन वापस ले लेगा, तो सरकार फौरन घुटनों पर आ जाएगी और उनकी हर बात मान ली जाएगी। धरने पर बैठकर अपनी बेबसी जाहिर करने के बजाय उन्हें सत्ता पर राजनीतिक दबाव बनाना चाहिए।"
गोंडा में विनोद साहनी हत्याकांड पर गरमाई राजनीति
इस पूरे सियासी घमासान का केंद्र गोंडा में हुआ चर्चित विनोद कुमार साहनी हत्याकांड है। विनोद साहनी को गंभीर रूप से घायल किए जाने के बाद लखनऊ के केजीएमयू (KGMU) ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना से नाराज होकर कैबिनेट मंत्री संजय निषाद केजीएमयू में ही धरने पर बैठ गए थे और स्थानीय पुलिस व चौकी इंचार्ज पर आरोपियों को संरक्षण देने और मृतक को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इसके बाद वे गोंडा में भी पीड़ित परिवार के साथ धरने पर बैठे, जहां डीएम और आला अधिकारियों द्वारा जमीन पर बैठकर समझाने के बाद उन्होंने धरना समाप्त किया।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले में मृतक के परिजनों से फोन पर बात कर शोक संवेदना व्यक्त की और सपा नेताओं को मौके पर भेजा। अखिलेश ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में पीडीए समाज के लोगों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, वे अपमानित और प्रताड़ित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी बात को कहने, लिखने या व्यापार करने पर लोगों की जान ले ली जाएगी, तो फिर संविधान और कानून का राज कहां बचा? अखिलेश ने आरोप लगाया कि कई आपराधिक घटनाओं में भाजपा से जुड़े लोग शामिल हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने पीड़ित परिवार की सभी मांगों को अविलंब पूरा करने की मांग उठाई।
स्वास्थ्य सेवाओं और भाजपा के टिकट कटने पर भी साधा निशाना
प्रेस से मुखातिब होते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सरकारी चिकित्सा व्यवस्था भी वेंटिलेटर पर है। प्रदेश के कई बड़े सरकारी अस्पताल खुद ही बीमार हैं, जहां आम जनता को न तो दवाएं मिल रही हैं और न ही समुचित इलाज। गरीब मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई, रिकॉर्ड बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा जानबूझकर वरिष्ठ नेता आजम खां और अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ नए-नए मुकदमे दर्ज करवा रही है। उन्होंने वादा किया कि सपा सरकार बनने पर विपक्ष पर दर्ज सभी फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
अखिलेश यादव ने भाजपा की आंतरिक बैठकों पर भी बड़ा दावा करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर घबराहट का माहौल है। उन्होंने कहा कि भाजपा की बैठकों में विधायकों के टिकट काटने की सूचियां तैयार की जा रही हैं। भाजपा अपने कई मौजूदा विधायकों के टिकट तो काटेगी ही, साथ ही उसके गठबंधन के सहयोगी दलों के विधायकों के टिकट पर भी संकट गहराने वाला है। अखिलेश की इस सलाह और तीखे हमले ने एक बार फिर जाहिर कर दिया है कि 2027 के चुनाव से पहले सपा एनडीए के सहयोगी दलों के बीच पनप रहे असंतोष को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।