'क्या मुसलमानों के लिए इस देश में कोई संवैधानिक हक नहीं बचा?' सहारनपुर मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन पर भड़के असदुद्दीन ओवैसी
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर सियासी और संवैधानिक बहस का रूप ले चुका है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती, सपा सांसद इकरा हसन और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद अब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
शनिवार को एक वीडियो संदेश और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ओवैसी ने इस पूरी कार्रवाई पर गहरा रोष जताते हुए सवाल पूछा कि 'क्या इस मुल्क में मुसलमानों के लिए कोई बुनियादी और संवैधानिक हक बाकी नहीं बचा है?' ओवैसी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में नियम-कायदों, वक्फ कानूनों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को ताक पर रखकर चुन-चुनकर धार्मिक स्थलों और एक खास समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।
ओवैसी के मुख्य आरोप: 'अपील का मौका दिए बिना रातों-रात चला दिया बुलडोजर'
असदुद्दीन ओवैसी ने सहारनपुर प्रशासन की कार्यप्रणाली और समय-सीमा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
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अदालती प्रक्रिया की अनदेखी का दावा: ओवैसी ने कहा कि जब जिला अदालत (डिस्ट्रिक्ट जज) ने 2 सितंबर को मस्जिद कमेटी की अपील खारिज की थी, तो कानून के तहत पीड़ित पक्ष के पास इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने और स्थगनादेश (Stay Order) लेने का कानूनी अधिकार सुरक्षित था। लेकिन प्रशासन ने बिना समय दिए शनिवार सुबह तड़के ही 6 बुलडोजर चलाकर इमारत को ढहा दिया ताकि अदालत जाने का मौका ही न मिले।
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संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार: एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि भारत का संविधान अनुच्छेद 25 और 26 के तहत सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक स्थलों के प्रबंधन का मौलिक अधिकार देता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह अधिकार केवल किताबों में सिमट कर रह गया है?
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वक्फ संपत्तियों का हवाला: ओवैसी का तर्क है कि जब वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में संबंधित संपत्ति का ऐतिहासिक ब्योरा दर्ज होने की बात कही जा रही थी, तब बिना ट्रिब्यूनल के अंतिम निर्णय के इस तरह की तोड़फोड़ पूरी तरह गैर-कानूनी और मनमानी है।
'बुलडोजर इंसाफ का विकल्प नहीं हो सकता': विपक्षी दलों का चौतरफा हमला
सहारनपुर की घटना को लेकर केवल ओवैसी ही नहीं, बल्कि समूचा विपक्षी खेमा योगी सरकार पर हमलावर नजर आ रहा है:
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सपा और कांग्रेस के सुर: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इसे तानाशाही बताते हुए मामले को उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ले जाने की बात कही है। वहीं समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि जब वे मौके पर जाने की कोशिश कर रही थीं तो उन्हें घर में नजरबंद कर दिया गया।
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बसपा की चेतावनी: बसपा सुप्रीमो मायावती पहले ही कह चुकी हैं कि पूरे राज्य में मस्जिदों को आपाधापी में अवैध बताकर गिराने का सरकारी अभियान तुरंत रोका जाना चाहिए।
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ओवैसी का सेक्युलर दलों पर तंज: ओवैसी ने विपक्षी सेक्युलर दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब भी किसी मस्जिद या मदरसे पर बुलडोजर चलता है, तो तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल केवल रस्मी बयान देकर खामोश बैठ जाते हैं और कोई भी खुलकर जमीन पर मुसलमानों के हक में खड़ा नहीं होता।
प्रशासन का पक्ष: 'अवैध अतिक्रमण और 6.41 करोड़ के जुर्माने की प्रक्रिया'
दूसरी तरफ, सहारनपुर जिला प्रशासन और नगर निगम ने अपने कदम को पूरी तरह विधिक और अदालत के आदेशों के अनुरूप बताया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कलेक्ट्रेट परिसर की सरकारी भूमि पर मस्जिद और उससे जुड़े कमरों का निर्माण नियमों के विरुद्ध किया गया था। सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद इसे अवैध करार दिया था और अवैध उपयोग के एवज में लगभग 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था। जब जिला जज की अदालत से भी कमेटी की याचिका खारिज हो गई, तब जाकर सरकारी जमीन को खाली कराने के लिए ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई अंजाम दी गई।
संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर नजर
असदुद्दीन ओवैसी और अन्य विपक्षी नेताओं के तीखे बयानों के बाद सहारनपुर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
कलेक्ट्रेट परिसर और शहर के संवेदनशील इलाकों में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पीएसी की अतिरिक्त टुकड़ियों ने फ्लैग मार्च किया है। सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी नेता या नागरिक द्वारा भड़काऊ भाषण, नफरती बयानबाजी या अफवाह फैलाने की कोशिश की गई तो उसके खिलाफ कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।