3 साल बाद सामने आए अतीक के बेटे: कसारी-मसारी कब्रिस्तान में रो पड़े उमर और अली, बड़े भाई ने गले लगाकर बोला 'हौसला रखना, घबराना नहीं'

3 साल बाद सामने आए अतीक के बेटे: कसारी-मसारी कब्रिस्तान में रो पड़े उमर और अली, बड़े भाई ने गले लगाकर बोला 'हौसला रखना, घबराना नहीं'

माफिया अतीक अहमद के परिवार के बिखरने के बीच प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान से एक बेहद भावुक और बड़ी खबर सामने आई है। लगभग 3 साल के लंबे अंतराल के बाद अतीक अहमद के दो बड़े बेटों—मोहम्मद उमर और अली अहमद—की आमने-सामने मुलाकात हुई और दोनों के बीच बातचीत दर्ज की गई। मौका था उनके सबसे छोटे भाई आबान के अंतिम संस्कार (सुपुर्द-ए-खाक) का, जिसमें शामिल होने के लिए अदालत के आदेश पर उमर को लखनऊ जिला जेल से और अली को झांसी जेल से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रयागराज लाया गया था। कसारी-मसारी कब्रिस्तान के भीतर सुरक्षा घेरे में जब दोनों भाई एक-दूसरे के सामने आए, तो भावनाओं का गुबार फूट पड़ा। 3 साल बाद एक-दूसरे को देखकर दोनों भाइयों की आंखें नम हो गईं। इसी दौरान बड़े भाई उमर ने छोटे भाई अली का हाथ थामकर उसे गले से लगा लिया और ढांढस बंधाते हुए कहा— "हौसला रखना, घबराना नहीं।"

उमेश पाल हत्याकांड और कई संगीन आपराधिक मामलों में अलग-अलग जेलों में बंद होने के कारण दोनों भाई लंबे समय से एक-दूसरे से नहीं मिल सके थे। वर्ष 2021-22 के बाद यह पहला मौका था जब दोनों सार्वजनिक या कानूनी प्रक्रिया के तहत एक साथ मौजूद थे। जनाजे की नमाज और मिट्टी देने की रस्म के दौरान दोनों भाई एक-दूसरे के करीब खड़े रहे। छोटे भाई आबान के असमय चले जाने के गम और परिवार पर आए संकट के बीच अली अहमद काफी मायूस और भावुक नजर आ रहा था। अली की मानसिक स्थिति को देखते हुए बड़े भाई उमर ने लगातार उसका हौसला बढ़ाने की कोशिश की। उसने अली को शांत रहने, ऊपर वाले पर भरोसा रखने और हिम्मत न हारने की सलाह दी।

3 साल बाद कब्रिस्तान में भावुक क्षण: भारी सुरक्षा बल के बीच उमर और अली ने एक-दूसरे को संभाला

कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अतीक के बेटों की मौजूदगी के दौरान प्रयागराज पुलिस प्रशासन और पीएसी (PAC) के जवानों ने सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा बना रखा था। पुलिस अधिकारियों ने दोनों भाइयों के बीच किसी भी अन्य व्यक्ति के बातचीत करने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा रखी थी, लेकिन मानवीय और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए दोनों भाइयों को एक-दूसरे से बात करने और ढांढस बंधाने का मौका मिला। कब्रिस्तान में अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ और असद की कब्र के पास ही सबसे छोटे भाई आबान को भी सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान वहां केवल परिवार के अति-निकटतम रिश्तेदार ही मौजूद थे।

उल्लेखनीय है कि अतीक अहमद का बड़ा बेटा उमर लखनऊ की जिला जेल में बंद है, जिसने सीबीआई कोर्ट के समक्ष सरेंडर किया था, जबकि दूसरा बेटा अली अहमद झांसी जेल में निरुद्ध है। दोनों ही अति-संवेदनशील बंदियों की श्रेणी में आते हैं। अदालत ने उन्हें अपने छोटे भाई के अंतिम संस्कार की धार्मिक रस्मों में शामिल होने के लिए केवल कुछ घंटों की सशर्त पैरोल दी थी। कसारी-मसारी कब्रिस्तान में जनाजे की नमाज और सुपुर्द-ए-खाक की प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद, पुलिस और वज्र वाहनों का दस्ता दोनों भाइयों को लेकर वापस लखनऊ और झांसी जेलों के लिए रवाना हो गया। 3 साल बाद हुई इस छोटी सी लेकिन भावुक मुलाकात और उमर द्वारा दिए गए इस संदेश ने राजनीतिक व प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।