एनसीआर की तर्ज पर बनने वाले स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) का पहला पड़ाव पार, बेस मैप को मिली मंजूरी
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के केंद्र में सुनियोजित शहरीकरण, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तीव्र आर्थिक विकास की नींव रखने के लिए प्रस्तावित उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र (यूपी-एससीआर) परियोजना ने अपनी पहली ऐतिहासिक और निर्णायक कामयाबी हासिल कर ली है। राज्य राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCRA) के गठन के बाद परियोजना के पहले चरण के तहत तैयार किए गए 'बेस मैप' और प्रारंभिक लैंड यूज फ्रेमवर्क को आधिकारिक स्तर पर मंजूरी दे दी गई है। यह बेस मैप भविष्य के महायोजना (मास्टर प्लान-2047) का मुख्य आधार बनेगा। इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के बाद अब लखनऊ सहित इसके आसपास के 6 प्रमुख जनपदों में सुनियोजित विकास, औद्योगिक गलियारों, नए ट्रांसपोर्ट नेटवर्क्स और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की जमीनी रूपरेखा तय करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
एससीआर का बेस मैप मंजूर: सैटेलाइट इमेजरी और जीआईएस मैपिंग से तय हुई रूपरेखा
एससीआर के लिए तैयार किया गया बेस मैप आधुनिक भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) और उच्च रेजोल्यूशन वाली सैटेलाइट इमेजरी के जरिए तैयार किया गया है। इस मानचित्र में पूरे क्षेत्र की मौजूदा भौगोलिक स्थिति, कृषि भूमि, वन क्षेत्र, जल निकाय, मौजूदा सड़कें, रेलवे लाइनें और पहले से विकसित हो चुके रिहायशी व व्यावसायिक इलाकों को डिजिटल रूप से दर्ज किया गया है। अधिकारियों के अनुसार बेस मैप को मंजूरी मिलने का सीधा अर्थ यह है कि अब योजनाकारों के पास पूरे 6 जिलों के भू-उपयोग (लैंड यूज) का वास्तविक और प्रमाणित डेटा उपलब्ध हो गया है। इसी नक्शे के ऊपर अब भविष्य के आवासीय सेक्टर, औद्योगिक क्लस्टर, ग्रीन बेल्ट, लॉजिस्टिक्स हब और नए हाईवे व रिंग रोड का अलाइनमेंट तय किया जाएगा।
शामिल हैं 6 जिले: 28 हजार वर्ग किलोमीटर में फैलेगा नया आर्थिक हब
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अधिसूचित राज्य राजधानी क्षेत्र में राजधानी लखनऊ के अलावा उसके सीमावर्ती 5 जनपदों को शामिल किया गया है:
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लखनऊ: एससीआर का मुख्य प्रशासनिक और वित्तीय केंद्र।
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बाराबंकी: औद्योगिक विस्तार, वेयरहाउसिंग और एजुकेशन हब के रूप में।
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उन्नाव: लेदर इंडस्ट्री, लॉजिस्टिक्स और कानपुर-लखनऊ कॉरिडोर का प्रमुख लिंक।
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सीतापुर: एग्रो-प्रोसेसिंग, सौर ऊर्जा और कृषि आधारित उद्योगों का केंद्र।
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रायबरेली: विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और रेल-इंजीनियरिंग सेक्टर का विस्तार।
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हरदोई: कृषि उत्पाद विपणन और नए उपनगरीय टाउनशिप क्षेत्र।
इन 6 जिलों के लगभग 27,826 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल को एक साझा रीजनल मास्टर प्लान के तहत विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य राजधानी लखनऊ पर लगातार बढ़ रहे आबादी और यातायात के भारी दबाव को पड़ोसी जिलों में समान रूप से स्थानांतरित करना है।
दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर रीजनल कनेक्टिविटी: मेट्रो, एक्सप्रेसवे और आउटर रिंग रोड
बेस मैप की मंजूरी के बाद अब अगला बड़ा कदम ट्रांसपोर्ट और मोबिलिटी प्लान को धरातल पर उतारना होगा। एससीआर की जीवन रेखा यहां की रीजनल कनेक्टिविटी होगी:
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एक्सप्रेसवे नेटवर्क: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को आपस में इंटरलिंक कर निर्बाध फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा।
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रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) व मेट्रो: एनसीआर में दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस की तरह लखनऊ से कानपुर, बाराबंकी और सीतापुर के बीच हाई-स्पीड रीजनल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा लखनऊ मेट्रो को बाराबंकी सीमा तक ले जाने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है।
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रिंग रोड संजाल: लखनऊ की किसान पथ (आउटर रिंग रोड) की तर्ज पर पड़ोसी जनपदों के कस्बों को बाईपास देने के लिए नए सर्कुलर हाईवे नेटवर्क की डिजाइन तैयार की जा रही है।
बेतरतीब निर्माण पर लगेगी रोक, किसानों और रियल एस्टेट को मिलेगा भारी बूस्ट
एससीआर का बेस मैप फाइनल होने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब 6 जिलों के ग्रामीण और पेरिफेरल क्षेत्रों में होने वाले अवैध और अनियोजित निर्माण पर पूरी तरह लगाम लगेगी। विकास प्राधिकरणों की सीमा से बाहर होने वाली अवैध कॉलोनियों की कटिंग पर रोक लगेगी। इसके साथ ही:
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किसानों की जमीन का लैंड यूज स्पष्ट होने से उन्हें विकास परियोजनाओं और लैंड पूलिंग में उचित मुआवजा व भागीदारी मिलेगी।
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प्राइवेट टाउनशिप, आईटी पार्क, डाटा सेंटर और ग्लोबल लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए बड़े लैंड बैंक चिन्हित करना आसान हो जाएगा।
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बाराबंकी, उन्नाव और सीतापुर हाईवे से सटे इलाकों के रियल एस्टेट में भारी निवेश आने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों नए अवसर सृजित होंगे।
मास्टर प्लान-2047 की ओर अगला कदम: सुझाव और आपत्तियों के बाद अंतिम नोटिफिकेशन
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट (टीसीपीओ) और संबंधित विकास प्राधिकरण अब इस स्वीकृत बेस मैप के आधार पर आगामी 20 वर्षों की जरूरतों को देखते हुए विस्तृत 'ड्राफ्ट रीजनल प्लान' तैयार करेंगे। इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक मंचों पर रखा जाएगा ताकि आम जनता, किसान, शहरी विशेषज्ञ और उद्योग जगत के प्रतिनिधि अपनी राय, आपत्तियां और सुझाव दे सकें। सभी सुझावों के निस्तारण के बाद राज्य सरकार द्वारा एससीआर के मास्टर प्लान को कानूनी रूप से अधिसूचित (गजट) कर दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में सबसे महत्वपूर्ण इंजन साबित होगी।