पुलिस में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 35 IPS के बाद 31 PPS अफसरों का तबादला, उन्नाव समेत 16 जिलों के ASP बदले

पुलिस में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 35 IPS के बाद 31 PPS अफसरों का तबादला, उन्नाव समेत 16 जिलों के ASP बदले

उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद करने तथा जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शासन ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय द्वारा शनिवार को जारी आदेशों के क्रम में पहले 35 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए और उसके ठीक बाद 31 प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) अधिकारियों की नई पदस्थापना सूची जारी कर दी गई। इस व्यापक सर्जरी के तहत प्रदेश के 16 प्रमुख जिलों में अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) और विभिन्न पुलिस कमिश्नरेट में अपर पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) स्तर के अनुभवी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

शासन के इस फैसले का सीधा असर जिलों की अपराध नियंत्रण प्रणाली और क्षेत्रीय प्रशासनिक संतुलन पर पड़ेगा। गृह विभाग के अनुसार, फील्ड में लंबे समय से तैनात अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव करने के साथ-साथ आगामी पर्वों और कानून व्यवस्था की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यह नई तैनाती की गई है। सभी स्थानांतरित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर रिपोर्ट मुख्यालय भेजने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

उन्नाव, हरदोई, मुरादाबाद और बरेली से गोरखपुर तक बदले गए एएसपी, देखें प्रमुख तैनातियां

जारी की गई आधिकारिक तबादला सूची के अनुसार, कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण जिलों के पुलिस कप्तानों के रणनीतिक सहयोगियों यानी अपर पुलिस अधीक्षकों को बदला गया है। उन्नाव जिले में अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) के पद पर तैनात रहे अखिलेश सिंह को हरदोई जिले का नया अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) नियुक्त किया गया है। हरदोई में ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में अपराध रोकथाम की कमान अब उनके हाथों में होगी।

वहीं मुरादाबाद में अपर पुलिस अधीक्षक (यातायात) का दायित्व संभाल रहे सुभाष चंद्र गंगवार को मुरादाबाद से हटाकर पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में एएसपी पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, जहां वे नए रंगरूटों के प्रशिक्षण और अनुशासन की देखरेख करेंगे। इसके अतिरिक्त बरेली में तैनात रहे मुकेश चंद्र मिश्रा को मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर का अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) बनाया गया है। गोरखपुर उत्तरी क्षेत्र का इलाका काफी विस्तृत और संवेदनशील माना जाता है, जहां उनकी तैनाती को प्रशासनिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

अयोध्या, गोंडा, मीरजापुर और गोरखपुर अपराध शाखा में अनुभवी अफसरों को नई कमान

पूर्वांचल और अवध क्षेत्र के अन्य प्रमुख जिलों में भी कानून व्यवस्था को नई धार देने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नितेश सिंह को गोंडा जिले का नया अपर पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है, जहां वे जिले के अपराध नियंत्रण तंत्र को मजबूती प्रदान करेंगे। भगवान राम की पावन नगरी अयोध्या में ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए राधेश्याम राय को अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) के पद पर तैनात किया गया है। अयोध्या में प्रतिदिन उमड़ रही लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ और ग्रामीण सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा के लिहाज से यह तैनाती अत्यंत संवेदनशील है।

इसके अलावा गोरखपुर जनपद में अपराध नियंत्रण और लंबित विवेचनाओं के त्वरित निस्तारण के लिए अयोध्या प्रसाद सिंह को अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध/क्राइम) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विंध्याचल मंडल के प्रमुख जिले मीरजापुर में योगेंद्र सिंह को नया अपर पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। इन अधिकारियों की तैनाती से नक्सल प्रभावित व सीमावर्ती क्षेत्रों सहित सामान्य जनपदों में त्वरित पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित करने का लक्ष्य तय किया गया है।

कमिश्नरेट और जिलों में अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों के निस्तारण पर रहेगा विशेष जोर

उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के उच्चाधिकारियों का मानना है कि पीपीएस संवर्ग के ये अधिकारी फील्ड पुलिसिंग की रीढ़ माने जाते हैं। पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली वाले शहरों जैसे लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा, प्रयागराज और गाजियाबाद में एडीसीपी के रूप में इनकी भूमिका सीधे जनता से संवाद और कानून व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती है। वहीं गैर-कमिश्नरेट जिलों में एएसपी स्तर का अधिकारी पुलिस अधीक्षक और थानों के बीच का सबसे प्रमुख रणनीतिक लिंक होता है।

इस बड़े फेरबदल के माध्यम से शासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को लागू करने में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नए पदभार संभालने वाले अधिकारियों को महिला सुरक्षा, भू-माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई, पेशेवर अपराधियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई और थानों पर आने वाले फरियादियों की समस्याओं के समयबद्ध निस्तारण की प्राथमिकता तय करने के निर्देश दिए गए हैं।