यूपी पुलिस भर्ती में बड़ी सेंध: बिना लिखित परीक्षा दिए ही बन गया सिपाही, एक गुमनाम चिट्ठी ने खोल दी पोल
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में शुचिता और पारदर्शिता के तमाम दावों के बीच फर्जीवाड़े का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक जालसाज युवक ने भर्ती प्रणाली की खामियों का फायदा उठाकर बिना लिखित परीक्षा में बैठे ही न केवल शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) और मेडिकल पास कर लिया, बल्कि पुलिस विभाग में सिपाही (कांस्टेबल) के पद पर नियुक्ति पत्र हासिल कर प्रशिक्षण केंद्र (RTC) तक जा पहुंचा।
इस पूरे सुनियोजित फर्जीवाड़े की भनक विभाग के आला अधिकारियों को तब तक नहीं लगी, जब तक कि एक गोपनीय गुमनाम शिकायती पत्र ने भर्ती बोर्ड और पुलिस मुख्यालय के होश नहीं उड़ा दिए। पत्र में दी गई सूचना की शुरुआती जांच होते ही इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया, जिसके बाद आरोपी सिपाही को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया गया है।
गुमनाम चिट्ठी से मचा हड़कंप: ट्रेनिंग सेंटर तक पहुंची जांच की आंच
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय और संबंधित जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को एक विस्तृत गुमनाम पत्र प्राप्त हुआ था। इस पत्र में भर्ती हुए एक नवनियुक्त आरक्षी के बारे में ठोस और चौंकाने वाले तथ्य दर्ज थे। पत्र में दावा किया गया था कि सिपाही पद पर चयनित हुआ यह युवक लिखित परीक्षा के दिन परीक्षा केंद्र में मौजूद ही नहीं था, बल्कि उसकी जगह किसी सॉल्वर को बैठाया गया था या फिर तकनीकी स्तर पर बायोमेट्रिक डेटा में हेरफेर कर उसका चयन सुनिश्चित किया गया था।
शिकायती पत्र में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने तत्काल एक गोपनीय आंतरिक जांच टीम गठित की। जांच अधिकारियों ने जब भर्ती बोर्ड से उस अभ्यर्थी के मूल दस्तावेज, आवेदन पत्र, परीक्षा केंद्र की उपस्थिति पंजिका (अटेंडेंस शीट) और सीसीटीवी फुटेज तलब किए, तो परत-दर-परत पूरा सच सामने आ गया।
बायोमेट्रिक और सीसीटीवी ने खोला राज: परीक्षा हॉल में दिखा दूसरा चेहरा
जांच टीम ने जब परीक्षा के दिन दर्ज किए गए फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन और परीक्षा हॉल के सीसीटीवी फुटेज का मिलान ट्रेनिंग कर रहे युवक से किया, तो गंभीर विसंगतियां सामने आईं।
दस्तावेजों की पड़ताल में यह बात पूरी तरह साबित हो गई कि लिखित परीक्षा के दिन कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठने वाला चेहरा और बायोमेट्रिक निशान किसी अन्य पेशेवर 'सॉल्वर' के थे। इसके बाद जब शारीरिक मानक परीक्षण (DV/PST) और दौड़ की बारी आई, तो वहां मूल अभ्यर्थी उपस्थित हुआ।
सॉल्वर गैंग ने तकनीकी साठगांठ या सिंडिकेट की मदद से फोटो मिक्सिंग और बायोमेट्रिक डेटा टेंपरिंग के जरिए पहली बाधा पार करवा दी थी। युवक को पूरा विश्वास था कि ट्रेनिंग शुरू होने के बाद कभी कोई पुराना रिकॉर्ड दोबारा नहीं खंगालेगा, लेकिन एक सतर्क नागरिक की गोपनीय शिकायत ने उसके खाकी पहनने के सपने को सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
गिरोह के नेटवर्क की तलाश: किन-किन अफसरों और सॉल्वर गैंग की मिलीभगत?
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी युवक ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने कबूल किया कि पुलिस भर्ती परीक्षा पास कराने के लिए उसने एक अंतरराज्यीय सॉल्वर सिंडिकेट से लाखों रुपये में सौदा तय किया था। एडवांस रकम लेकर गिरोह के सरगना ने परीक्षा में उसकी जगह डमी कैंडिडेट बैठाने और बायोमेट्रिक डेटा को बाईपास कराने का पूरा प्रबंध किया था।
अब पुलिस और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) इस गिरोह के बाकी सदस्यों की धरपकड़ में जुट गई हैं। जांच एजेंसियां इस बिंदु की भी गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस सिंडिकेट ने परीक्षा केंद्र के व्यवस्थापकों, बायोमेट्रिक एजेंसी के कर्मचारियों या भर्ती प्रक्रिया से जुड़े किसी अंदरूनी व्यक्ति के साथ मिलकर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। यदि अंदरूनी मिलीभगत पाई जाती है, तो कई बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
भर्ती बोर्ड सतर्क: सभी नवनियुक्त सिपाहियों के रिकॉर्ड की दोबारा स्क्रूटनी संभव
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद भर्ती बोर्ड और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की सेंधमारी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशिक्षण केंद्रों पर तैनात सभी संदिग्ध अभ्यर्थियों के दस्तावेजों, बायोमेट्रिक डेटा और परीक्षा केंद्र के वीडियो रिकॉर्ड्स का एक बार फिर से औचक मिलान (Cross Verification) कराने की योजना बनाई जा रही है, ताकि यदि इस गिरोह के जरिए कोई अन्य जालसाज भी खाकी की वर्दी हासिल करने में कामयाब रहा हो, तो उसे भी तत्काल बाहर का रास्ता दिखाया जा सके और जेल भेजा जाए।