उत्तर प्रदेश में सीएनजी की कीमतों में बड़ा उछाल! लखनऊ, आगरा समेत कई जिलों में ₹105/किलो तक पहुंचे रेट; जानें अपने शहर की नई दरें, चार महीनों का गणित और आपकी जेब पर पड़ने वाले असर की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में सीएनजी की कीमतों में बड़ा उछाल! लखनऊ, आगरा समेत कई जिलों में ₹105/किलो तक पहुंचे रेट; जानें अपने शहर की नई दरें, चार महीनों का गणित और आपकी जेब पर पड़ने वाले असर की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में वाहन चालकों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल की लगातार स्थिर बनी कीमतों के बीच संपीड़ित प्राकृतिक गैस यानी सीएनजी (CNG) के दामों में एक बार फिर बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। राज्य की प्रमुख गैस आपूर्तिकर्ता कंपनी ग्रीन गैस लिमिटेड (Green Gas Limited - GGL) ने लखनऊ और आगरा समेत राज्य के कई प्रमुख जिलों में सीएनजी की दरों में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। कंपनी द्वारा संशोधित की गई नई दरें 8 अगस्त 2026 से प्रभावी रूप से लागू कर दी गई हैं। इस नई बढ़ोतरी के बाद राजधानी लखनऊ और ताजनगरी आगरा में सीएनजी के दाम सीधा ₹102 प्रति किलो से छलांग लगाकर ₹105 प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गए हैं।

ग्रीन गैस लिमिटेड के महाप्रबंधक (विपणन) प्रवीण सिंह के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू आपूर्ति शृंखला में इनपुट गैस की लागत में हुई लगातार वृद्धि के कारण बिक्री दरों में यह संशोधन करना मजबूरी बन गया था। केवल लखनऊ और आगरा ही नहीं, बल्कि अवध और बुंदेलखंड से सटे कई अन्य जिलों में भी सीएनजी के दाम बढ़ा दिए गए हैं। राम नगरी अयोध्या, उन्नाव और सुल्तानपुर में सीएनजी की कीमतों में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद इन शहरों में नई दरें ₹99.75 प्रति किलो से बढ़कर ₹101.75 प्रति किलो हो गई हैं। अचानक हुई इस मूल्य वृद्धि से दैनिक यात्रियों, व्यावसायिक वाहन चालकों, ऑटो-कैब ऑपरेटरों और निजी कार मालिकों का मासिक बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।

चार महीनों में ₹8.25 प्रति किलो उछले दाम, लगातार बढ़ रहा है ईंधन का बोझ

यदि पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों और सीएनजी की मूल्य वृद्धि के रुझानों पर गौर करें तो आम उपभोक्ताओं की जेब पर चौतरफा मार पड़ी है। मई 2026 से लेकर अगस्त 2026 के बीच महज चार महीनों की संक्षिप्त समयावधि में ही सीएनजी के दामों में करीब ₹8.25 प्रति किलो की भारी वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। मई महीने में जहाँ लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में सीएनजी ₹96.75 प्रति किलो के आसपास बिक रही थी, वहीं जून और जुलाई के महीनों में चरणबद्ध तरीके से दरों में संशोधन होते-होते यह आंकड़ा अब ₹105 के रिकॉर्ड स्तर को छू चुका है।

ऐतिहासिक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि वर्ष 2021 के मध्य तक, जब कोरोना महामारी की दूसरी लहर का दौर चल रहा था, तब उत्तर प्रदेश में सीएनजी की खुदरा बिक्री दर लगभग ₹60.95 प्रति किलो के आसपास हुआ करती थी। लेकिन पिछले साढ़े पांच वर्षों या कहें लगभग 64 महीनों के सफर में सीएनजी की कीमतों में कुल मिलाकर ₹44 प्रति किलो से भी अधिक का उछाल आया है। एक समय जो सीएनजी ईंधन पेट्रोल-डीजल के मुकाबले बेहद किफायती, पर्यावरण-अनुकूल और 'पॉकेट-फ्रेंडली' माना जाता था, वह अब प्रीमियम पेट्रोल के भाव के करीब पहुंचता नजर आ रहा है। गैस कंपनियों का तर्क है कि वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक गैस के दामों में उतार-चढ़ाव और पाइपलाइन परिवहन शुल्कों में वृद्धि के चलते इनपुट कॉस्ट का दबाव सीधे ग्राहकों पर स्थानांतरित करना पड़ रहा है।

आगरा में दो कंपनियों के बीच रेट में ₹6 प्रति किलो का बड़ा अंतर, उपभोक्ता हैरान

ताजनगरी आगरा की स्थिति बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाली बन गई है, जहाँ एक ही शहर के भीतर दो अलग-अलग गैस आपूर्तिकर्ता कंपनियों के कारण सीएनजी के दामों में ₹6 प्रति किलो का बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। ताज संरक्षित क्षेत्र (TTZ - Taj Trapezium Zone) में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत तीन दशक पूर्व सीएनजी और हरित ऊर्जा को प्रोत्साहन देने की योजना शुरू की गई थी। हालांकि, आज आगरा के अलग-अलग इलाकों में गैस का वितरण दो अलग-अलग कंपनियां— ग्रीन गैस लिमिटेड (GGL) और गेल गैस (Gail Gas)— कर रही हैं।

ग्रीन गैस लिमिटेड के नेटवर्क वाले शहर के अधिकांश सीएनजी स्टेशनों पर अब सीएनजी ₹105 प्रति किलो की दर से मिल रही है। वहीं दूसरी ओर, आगरा जिले के कुछ हिस्सों में आपूर्ति करने वाली गेल गैस ने 1 अगस्त 2026 को सीएनजी के दाम ₹98 से बढ़ाकर ₹99 प्रति किलो किए थे। इसका सीधा अर्थ यह है कि आगरा में गेल गैस के स्टेशन पर सीएनजी ₹99 प्रति किलो है, जबकि ग्रीन गैस के स्टेशन पर वही सीएनजी ₹105 प्रति किलो की दर से बिक रही है। इस ₹6 के बड़े अंतर के कारण वाहन चालकों को सस्ती सीएनजी के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। स्थानीय ऑटोमोबाइल डीलरों और परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि ताज संरक्षित क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन को अनिवार्य किए जाने के बावजूद, सीएनजी की इतनी ऊंची दरों के कारण शहर के कुल पंजीकृत वाहनों में से 10 प्रतिशत वाहन भी सीएनजी आधारित नहीं हो पाए हैं।

ऑटो-कैब चालकों की बिगड़ी गणित, क्या अब बढ़ेगा ऑटो और बस का किराया?

सीएनजी के दामों में लगातार हो रहे इजाफे का सबसे प्रत्यक्ष और गंभीर असर व्यावसायिक वाहन चालकों पर पड़ रहा है। लखनऊ, कानपुर, आगरा और वाराणसी जैसे बड़े महानगरों में कैब (ओला-उबर), ऑटो-रिक्शा, विक्रम और ई-कारगो वाहन चलाने वाले चालकों का दैनिक मुनाफा आधा रह गया है। लखनऊ के हजरतगंज और चारबाग रेलवे स्टेशन के बाहर संचालित होने वाले ऑटो चालकों का कहना है कि हर बार जब सीएनजी ₹3 या ₹4 महंगी होती है, तो उनकी दैनिक बचत में ₹100 से ₹150 का सीधा घाटा होता है।

दूसरी ओर, सवारियों से अचानक किराया बढ़ाना संभव नहीं हो पाता क्योंकि किराए का निर्धारण क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) और शासन स्तर से तय होता है। हालांकि, व्यावसायिक वाहन चालक यूनियनों ने संकेत दिए हैं कि यदि शासन ने न्यूनतम किराए में संशोधन नहीं किया या सीएनजी पर सब्सिडी की कोई व्यवस्था नहीं बनाई, तो वे किराए में बढ़ोतरी करने या अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे। इसका सीधा असर रोजाना दफ्तर, स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों के लिए आवाजाही करने वाले आम मध्यमवर्गीय नागरिकों की जेब पर पड़ेगा।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रमुख शहरों में सीएनजी की नई दरें

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में स्थानीय नेटवर्क ऑपरेटरों और कर ढांचों के अनुसार सीएनजी के भाव भिन्न-भिन्न हैं। वर्तमान में प्रदेश के प्रमुख शहरों में सीएनजी की अनुमानित नई दरों की स्थिति इस प्रकार है:

  • लखनऊ: ₹105.00 प्रति किलो (ग्रीन गैस नेटवर्क)

  • आगरा: ₹105.00 प्रति किलो (ग्रीन गैस) / ₹99.00 प्रति किलो (गेल गैस)

  • अयोध्या: ₹101.75 प्रति किलो

  • उन्नाव: ₹101.75 प्रति किलो

  • सुल्तानपुर: ₹101.75 प्रति किलो

  • नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा: ₹91.70 प्रति किलो (आईजीएल - Indraprastha Gas Limited)

  • गाजियाबाद: ₹91.70 प्रति किलो (आईजीएल)

  • मेरठ: ₹91.50 प्रति किलो

  • कानपुर: ₹99.50 से ₹102.00 प्रति किलो के मध्य

  • बरेली एवं लखीमपुर: ₹107.98 प्रति किलो

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से सटे जिलों जैसे नोएडा, गाजियाबाद और बागपत में आईजीएल (IGL) की पाइपलाइन होने के कारण वहाँ सीएनजी के दाम पूर्वांचल और मध्य यूपी के मुकाबले लगभग ₹10 से ₹13 प्रति किलो सस्ते बने हुए हैं।

सीएनजी बनाम ईवी: क्या अब पेट्रोल-डीजल के मुकाबले सीएनजी रही किफायती?

सीएनजी के शतक पार करने और ₹105 प्रति किलो तक पहुंच जाने से ऑटोमोबाइल सेक्टर में नई बहस छिड़ गई है। अब नए कार खरीदार इस उहापोह में हैं कि क्या उन्हें सीएनजी कार खरीदनी चाहिए या फिर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) या हाइब्रिड (Hybrid) तकनीक की ओर रुख करना चाहिए।

एक सामान्य गणित के अनुसार, यदि कोई पेट्रोल कार 15 किमी/लीटर का माइलेज देती है और पेट्रोल ₹95 प्रति लीटर है, तो प्रति किलोमीटर रनिंग कॉस्ट लगभग ₹6.33 बैठती है। वहीं यदि कोई सीएनजी कार 20 से 22 किमी/किलोग्राम का माइलेज देती है और सीएनजी ₹105 प्रति किलो है, तो प्रति किलोमीटर रनिंग कॉस्ट लगभग ₹4.75 से ₹5.25 के करीब आती है। यानी पेट्रोल और सीएनजी की रनिंग कॉस्ट में अंतर अब सिमटकर महज ₹1 से ₹1.50 प्रति किलोमीटर रह गया है।

सीएनजी किट की अतिरिक्त शुरुआती लागत (रु. 50,000 से 90,000), बूट स्पेस का खत्म होना और हर 3 साल में सीएनजी सिलेंडर की री-टेस्टिंग जैसी दिक्कतों को देखते हुए कई उपभोक्ता अब सीएनजी के बजाय पेट्रोल हाइब्रिड या शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तरजीह देने लगे हैं, जहाँ प्रति किलोमीटर खर्च ₹1 से भी कम आता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्राकृतिक गैस की कीमतों पर केंद्र और राज्य सरकारों ने वैट (VAT) व एक्साइज ड्यूटी में राहत नहीं दी, तो आने वाले दिनों में सीएनजी आधारित यात्री परिवहन का आकर्षण काफी हद तक कम हो सकता है।

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