BJP Tiranga Yatra UP: स्वतंत्रता दिवस पर 'तिरंगा यात्रा' के बहाने विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करेगी भाजपा, नए टिकट दावेदारों पर भी रहेगी गुप्त पैनी नजर
उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी और सांगठनिक तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले 'हर घर तिरंगा' और 'तिरंगा यात्रा' अभियान को केवल एक राष्ट्रभक्ति कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे अपनी सांगठनिक समीक्षा का बड़ा माध्यम बनाने की रणनीति बनाई है। भाजपा प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय संगठन इस वृहद अभियान के जरिए प्रदेश भर के अपने मौजूदा विधायकों, एमएलसी और भावी टिकट दावेदारों की धरातली ताकत, जनसमर्थन और सांगठनिक निष्ठा को परखने जा रहा है। 11 से 15 अगस्त के बीच प्रदेश के सभी 75 जिलों, विधानसभा क्षेत्रों और मंडल स्तर तक निकलने वाली इन तिरंगा यात्राओं में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी की कड़ी मॉनिटरिंग की जाएगी। पार्टी हाईकमान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जो विधायक या नेता अपने क्षेत्र में जनता और कार्यकर्ताओं को जोड़ने में ढिलाई बरतेंगे, उनकी लापरवाही को सीधे उनके 'प्रदर्शन रिपोर्ट कार्ड' (Performance Report Card) में दर्ज किया जाएगा, जिसका असर भविष्य में टिकट वितरण और सांगठनिक पदों की जिम्मेदारी तय करते समय दिखाई देगा।
विधायकों की ग्राउंड रियलिटी और भीड़ जुटाने की क्षमता की होगी 'सीक्रेट मॉनिटरिंग'
भाजपा संगठन ने इस बार तिरंगा यात्रा के निरीक्षण के लिए एक बहुस्तरीय और गोपनीय निगरानी तंत्र (Secret Monitoring Mechanism) तैयार किया है। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह के निर्देशों के तहत हर जिले और विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों, क्षेत्रीय प्रभारियों और स्वतंत्र सर्वे टीमों को तैनात किया गया है। ये टीमें यात्रा के दौरान इस बात का बारीकी से आकलन करेंगी कि संबंधित विधायक या प्रत्याशी अपनी विधानसभा में कितनी भीड़ जुटा पा रहा है, उसमें युवाओं और स्थानीय जनता की भागीदारी कितनी है और कार्यकर्ताओं में कितना उत्साह है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अक्सर देखने में आता है कि कई जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद अपने क्षेत्रों में निष्क्रिय हो जाते हैं या केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित रहते हैं। ऐसे में तिरंगा यात्रा एक ऐसा खुला मंच बनेगी जहां बिना किसी औपचारिक सर्वे के सीधे यह पता चल सकेगा कि किस विधायक की पकड़ अपने क्षेत्र में आज भी मजबूत है और किसका ग्राफ नीचे गिरा है। यात्राओं के डिजिटल फोटो, वीडियो फुटेज और रूट कवरेज की विस्तृत रिपोर्ट सीधे प्रदेश कार्यालय लखनऊ और केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी।
नए टिकट दावेदारों और असंतुष्टों के लिए खुद को साबित करने का 'गोल्डन चांस'
स्वतंत्रता दिवस के इस अभियान ने केवल मौजूदा विधायकों ही नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी का टिकट मांगने वाले नए दावेदारों और पूर्व प्रत्याशियों के लिए भी खुद को साबित करने का एक बड़ा 'गोल्डन चांस' दे दिया है। जिन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के विधायक नहीं हैं या जहां वर्तमान विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) की शिकायतें मिल रही हैं, वहां नए दावेदारों को अपनी ताकत दिखाने का पूरा मौका दिया गया है।
टिकट की चाह रखने वाले स्थानीय नेता, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख और युवा मोर्चा के पदाधिकारी अपने-अपने स्तर पर विशाल बाइक रैलियों, पदयात्राओं और तिरंगा यात्राओं का आयोजन करने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। संगठन के रणनीतिकार इन दावेदारों की कार्यशैली, संसाधन जुटाने की क्षमता और सर्वसमाज को साथ लेकर चलने की कला पर विशेष नजर रख रहे हैं। जो दावेदार अपने क्षेत्र में विधायक से भी अधिक भीड़ जुटाकर बेहतर संयोजन दिखाएंगे, उनका नाम संगठन की गुड बुक (Good Book) में शामिल कर लिया जाएगा।
75 जिलों में 11 से 15 अगस्त तक सघन अभियान, बूथ स्तर तक तिरंगा फहराने का लक्ष्य
भाजपा के इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में 11 अगस्त से ही प्रभात फेरियों, स्वच्छता अभियानों और बाइक रैलियों का दौर शुरू हो गया है जो 15 अगस्त तक लगातार चलेगा। अभियान का मुख्य लक्ष्य प्रदेश के हर घर, दुकान, निजी व सरकारी भवनों और बूथ स्तर तक राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' फहराना है। इसके साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, शहीद जवानों के परिजनों और भूतपूर्व सैनिकों को सम्मानित करने के विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि तिरंगा यात्रा के माध्यम से समाज के हर वर्ग—विशेषकर युवाओं, महिलाओं, किसानों और वंचित वर्ग को जोड़ा जाए। पार्टी नेताओं का मानना है कि राष्ट्रभक्ति के इस वृहद अभियान से जहां एक तरफ देश प्रेम का जज्बा मजबूत होगा, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के उन आरोपों की हवा भी निकल जाएगी जो भाजपा के सांगठनिक जनाधार पर सवाल उठाते रहे हैं।
चुनाव और संगठन पुनर्गठन के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा हमेशा से अपने सांगठनिक अनुशासन और जमीनी फीडबैक के आधार पर कड़े फैसले लेने के लिए जानी जाती है। आगामी दिनों में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों, उपचुनावों और उसके बाद आने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह फीडबैक अत्यंत निर्णायक साबित होगा। पार्टी हाईकमान पहले ही संकेत दे चुका है कि सुस्त, निष्क्रिय और जनता से कटे हुए विधायकों का टिकट काटने में कोई गुरेज नहीं किया जाएगा।
ऐसे में 'तिरंगा यात्रा' एक प्रकार से पार्टी का 'इन-हाउस लिटमस टेस्ट' बन गई है। 15 अगस्त के बाद जब प्रदेश नेतृत्व के पास सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों का समेकित रिपोर्ट कार्ड पहुंचेगा, तो उसी डेटा के आधार पर निष्क्रिय विधायकों को चेतावनी जारी की जाएगी और बेहतर प्रदर्शन करने वाले नए चेहरों को संगठन में तरजीह दी जाएगी। यही कारण है कि पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड तक भाजपा के वर्तमान विधायक और टिकट दावेदार इस समय तिरंगा यात्रा को सफल बनाने में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।