'बच्चों एक बात याद रखना, टेंशन लेने का नहीं देने का, लेकिन प्रोफेसर्स को...', जेन-जी के ब्रेकअप, रातभर रील देखने और डिप्रेशन पर कानपुर में बोले डिप्टी CM ब्रजेश पाठक

'बच्चों एक बात याद रखना, टेंशन लेने का नहीं देने का, लेकिन प्रोफेसर्स को...', जेन-जी के ब्रेकअप, रातभर रील देखने और डिप्रेशन पर कानपुर में बोले डिप्टी CM ब्रजेश पाठक

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक अपने तेज-तर्रार और अनोखे अंदाज के लिए जाने जाते हैं। जब वे प्रशासनिक मंचों पर होते हैं तो अस्पतालों में औचक निरीक्षण कर लापरवाह अफसरों की क्लास लगाते हैं, लेकिन जब वे युवाओं और छात्रों के बीच पहुंचते हैं तो उनका मिजाज पूरी तरह बदल जाता है। कानपुर स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक आज की नई पीढ़ी यानी 'जेन-जी' (Gen-Z) के बीच उन्हीं के कूल और ठेठ अंदाज में नजर आए। उन्होंने आधुनिक दौर में युवाओं के मानसिक तनाव, ब्रेकअप के दर्द, देर रात तक मोबाइल पर रील देखने की लत और पढ़ाई के अनावश्यक दबाव पर ऐसा दिल छू लेने वाला और हास्य से भरपूर भाषण दिया, जिसने सभागार में मौजूद हजारों छात्र-छात्राओं की तालियां बटोर लीं। ब्रजेश पाठक ने मंच से छात्रों को बॉलीवुड स्टाइल में सीधा मंत्र दिया— "बच्चों, एक बात हमेशा याद रखना, टेंशन लेने का नहीं, टेंशन देने का!"

'टेंशन लेने का नहीं देने का, लेकिन किसको?': मंच पर बैठे प्रोफेसर्स को

डिप्टी सीएम के इस जुमले पर जब पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा, तो उन्होंने तुरंत बात को आगे बढ़ाते हुए समझाया कि आखिर यह टेंशन देनी किसको है। ब्रजेश पाठक ने मंच पर बैठे विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसरों और शिक्षकों की ओर इशारा करते हुए मुस्कुराते हुए कहा, "टेंशन आपको अपने दिमाग में नहीं पालनी है, बल्कि यह टेंशन मंच पर बैठे इन विद्वान प्रोफेसर्स को देनी है। जब आप क्लास में बैठते हैं और कोई विषय या सवाल समझ में नहीं आता है, तो तुरंत खड़े होकर इनसे पूछिए। अगर क्लास में जवाब न मिले, तो स्टाफ रूम में जाकर पूछिए, लेकिन जब तक आपके सवाल का सही और संतुष्टि भरा जवाब न मिल जाए, तब तक शांत मत बैठिए।"

उन्होंने कहा कि असली छात्र वही है जो सीखने की जिज्ञासा में शिक्षकों को व्यस्त रखे। शिक्षक भी तभी खुश होते हैं जब छात्र गंभीर और तार्किक सवाल पूछते हैं। इसलिए पढ़ाई को लेकर घबराने या कमरे में बंद होकर अवसाद में जाने के बजाय अपनी शंकाओं को दूर करने के लिए शिक्षकों के पीछे पड़ जाइए।

'ब्रेकअप जैसे छोटे झंझटों में मत पड़ो, जोड़ियां ऊपर वाला बनाता है'

आज के दौर में युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहे मानसिक तनाव और रिलेशनशिप की समस्याओं पर डिप्टी सीएम ने बेहद संवेदनशील लेकिन दो टूक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज की जेन-जी बहुत जल्दी मायूस हो जाती है और ब्रेकअप जैसी छोटी-छोटी बातों को दिल से लगाकर गहरे तनाव में चली जाती है।

ब्रजेश पाठक ने युवाओं को समझाते हुए कहा, "आजकल देखने में आता है कि ब्रेकअप होने के बाद बच्चे रात-रात भर सो नहीं रहे हैं, कमरे में बैठकर रो रहे हैं और अपनी पढ़ाई-लिखाई बर्बाद कर रहे हैं। अरे भाई, आप लोग इन सब फिजूल के झंझटों में क्यों पड़ते हैं? एक बात गांठ बांध लीजिए कि जोड़ियां इंसान नहीं, ऊपर वाला बनाता है। आपकी जिंदगी में जो लिखा है, वह सही समय पर आपको मिलकर ही रहेगा। इसलिए अपने करियर, अपने माता-पिता के सपनों और अपनी पढ़ाई को दांव पर लगाकर इन छोटी-मोटी बातों में अपनी ऊर्जा बर्बाद मत कीजिए।"

रातभर रील देखने की बीमारी और गुरुजी भी इसमें पीछे नहीं

डिप्टी सीएम ने छात्रों में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत पर भी करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज के युवा रात के दो-तीन बजे तक मोबाइल स्क्रीन पर उंगलियां घिसते रहते हैं और शॉर्ट्स व रील्स देखने के चक्कर में अपनी जरूरी नींद पूरी नहीं करते। सुबह जब वे भारी सिर और अधखुली आंखों के साथ कॉलेज आते हैं, तो उनका दिमाग पढ़ाई में लग ही नहीं पाता।

हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकी लेते हुए ब्रजेश पाठक ने शिक्षकों को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा, "आजकल सिर्फ बच्चे ही रातभर रील नहीं देख रहे हैं, हमारी नई पीढ़ी के नौजवान गुरुजी भी इसमें किसी से पीछे नहीं हैं। वे भी देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं और फिर इसका सीधा असर अगले दिन क्लासरूम के माहौल और पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ता है। यह स्थिति कतई ठीक नहीं है। हमें तकनीक का इस्तेमाल अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए करना चाहिए, न कि अपना कीमती समय और स्वास्थ्य बर्बाद करने के लिए।"

पहले 60% पर बजती थी ढोलक, आज 99% पर भी कमरा बंद कर रोते हैं छात्र

शिक्षा प्रणाली और अंकों के अंधाधुंध दबाव पर बोलते हुए उप मुख्यमंत्री ने अपने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि पहले के जमाने में जब किसी छात्र के 60 प्रतिशत अंक (प्रथम श्रेणी) आते थे, तो पूरे गांव और मोहल्ले में ढोलक बजती थी और मिठाइयां बांटी जाती थीं। लेकिन आज का माहौल ऐसा हो गया है कि 99 प्रतिशत अंक लाने के बाद भी छात्र रोते हैं क्योंकि उन्हें मनचाहा कॉलेज या नौकरी न मिलने का डर सताता रहता है।

ब्रजेश पाठक ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों पर केवल अधिक अंक लाने का अनुचित दबाव न बनाएं, बल्कि उन्हें बेहतर और व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा, "नौकरी सिर्फ कागज की डिग्री देखकर नहीं मिलती, बल्कि आपके भीतर मौजूद वास्तविक ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास से मिलती है। अगर आपके पास हुनर है, तो दुनिया की कोई ताकत आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। कानपुर के युवाओं में पूरे देश और दुनिया को जीतने की काबिलियत है।"

विश्वविद्यालय को मिली मोबाइल मेडिकल वैन: ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवा

सीएसजेएमयू के इस कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक', विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, विधायक सुरेंद्र मैथानी और शुभम गोल्डी मसाले समूह के निदेशक आकाश गोयनका व सुदीप गोयनका भी मौजूद रहे। इस अवसर पर गोल्डी समूह द्वारा सीएसजेएमयू को एक अत्याधुनिक मोबाइल मेडिकल वैन समर्पित की गई।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कानपुर का गोल्डी ग्रुप स्वाद के साथ-साथ शहरवासियों के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रख रहा है। यह मोबाइल मेडिकल वैन अब केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कानपुर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में जाकर गरीब और जरूरतमंद लोगों को उनके दरवाजे पर प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, जरूरी दवाइयां और टेली-कंसल्टेशन की मुफ्त सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि सरकार और निजी संस्थानों का यह तालमेल उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

तनावमुक्त जीवन और आत्मनिर्भर युवा ही बनाएंगे विकसित भारत

अपने प्रेरणादायक संबोधन के अंत में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने छात्रों से एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने कहा कि असफलताएं जीवन का अंत नहीं होतीं, बल्कि वे सिखाती हैं कि अगली बार प्रयास और मजबूती से कैसे करना है।

डिप्टी सीएम का यह भाषण केवल एक राजनीतिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि एक बड़े भाई और अभिभावक की तरह युवाओं को जिंदगी की वास्तविक प्राथमिकताओं से रूबरू कराने वाला संवाद था। कानपुर विश्वविद्यालय से निकला 'टेंशन लेने का नहीं, देने का' यह संदेश आज पूरे प्रदेश के युवाओं और सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और छात्रों को मानसिक तनाव से मुक्त होकर आगे बढ़ने की नई प्रेरणा दे रहा है।