दाखिल-खारिज और पैमाइश में लापरवाही पर सीएम योगी सख्त: 10 तहसीलदारों के बाद अब सात SDM रडार पर
उत्तर प्रदेश में आम जनता को अपनी जमीन-जायदाद के दाखिल-खारिज, वरासत, पैमाइश और सीमांकन के लिए तहसीलों के चक्कर काटने से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' नीति अब शीर्ष राजस्व अधिकारियों पर भारी पड़ने लगी है। राजस्व न्यायालयों में लंबित मुकदमों के निस्तारण में लापरवाही, उदासीनता और जानबूझकर की जा रही हीलाहवाली पर सीएम योगी के कड़े तेवरों के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। पिछले एक सप्ताह के भीतर ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 10 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निलंबित करने तथा 13 को कारण बताओ नोटिस थमाने के बाद, अब शासन के रडार पर प्रदेश के सात उपजिलाधिकारी (एसडीएम) आ चुके हैं। राजस्व कोर्ट कंप्यूटराइज्ड मैनेजमेंट सिस्टम (RCCMS) पोर्टल के आधिकारिक डेटा के विश्लेषण में इन सात एसडीएम और एसडीएम (न्यायिक) का प्रदर्शन बेहद घटिया और निराशाजनक पाया गया है। राजस्व परिषद ने संबंधित जिलाधिकारियों को इन सभी अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण लेकर 23 सितंबर तक मुख्यमंत्री कार्यालय को अंतिम रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
आरसीसीएमएस पोर्टल से खुली पोल: 221 मुकदमों में से निपटाए सिर्फ 9
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 29 अगस्त 2026 को राजस्व अदालतों में लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण की उच्चस्तरीय समीक्षा की गई थी। इस बैठक में सीएम ने साफ निर्देश दिए थे कि मुकदमों को लटकाकर जनता को परेशान करने वाले अफसरों की जवाबदेही तय की जाए। इसके बाद राजस्व परिषद ने 22 दिसंबर 2025 से 31 मई 2026 के बीच के आंकड़ों की सघन पड़ताल की। इस समीक्षा में सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक रिकॉर्ड राजधानी लखनऊ की सरोजनीनगर तहसील की एसडीएम (न्यायिक) का सामने आया। इस अवधि के दौरान उनके न्यायालय में कुल 221 मामले दर्ज हुए, लेकिन उन्होंने महज 9 मामलों का ही निस्तारण किया, यानी उनकी निस्तारण दर केवल 4.07 प्रतिशत रही। इसी प्रकार लखनऊ सदर तहसील के एसडीएम न्यायालय में 1,000 मामले आए, जिनमें से सिर्फ 403 मामलों का निस्तारण हो सका और उनकी दर 40.30 प्रतिशत पर अटक गई।
मऊ और प्रतापगढ़ के एसडीएम का भी खराब रिकॉर्ड: देखें आंकड़े
राजस्व परिषद की विस्तृत जांच रिपोर्ट में लखनऊ के अलावा पूर्वांचल के मऊ और प्रतापगढ़ जिले के उपजिलाधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं:
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मधुबन तहसील (मऊ): यहां के एसडीएम (न्यायिक) के न्यायालय में कुल 276 मामले आए, लेकिन वे केवल 55 वादों का ही निस्तारण कर सके।
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कुंडा तहसील (प्रतापगढ़): कुंडा के एसडीएम (न्यायिक) ने 297 में से मात्र 80 मामलों का निपटारा किया। वहीं कुंडा की तत्कालीन एसडीएम ने 1,247 मुकदमों में से महज 511 मामले ही निपटाए।
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रानीगंज तहसील (प्रतापगढ़): रानीगंज के एसडीएम (न्यायिक) 418 मामलों में से सिर्फ 133 मुकदमों को हल कर पाए, जबकि रानीगंज के एसडीएम ने 558 मामलों में से केवल 183 वादों का निस्तारण किया।
10 तहसीलदार व नायब तहसीलदार निलंबित, 13 को कारण बताओ नोटिस
एसडीएम स्तर पर शिकंजा कसने से पहले ही सीएम योगी के निर्देश पर राजस्व परिषद ने मैदान में लापरवाह अफसरों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। पिछले एक हफ्ते के अंदर 10 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबित होने वाले प्रमुख अधिकारियों में अमित यादव (तहसीलदार संडीला, हरदोई), कृष्ण कुमार मिश्रा (तहसीलदार देवरिया), सौरभ कुमार (तहसीलदार जौनपुर), रंजन वर्मा (तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या व सम्प्रति तहसीलदार गाजीपुर) और अलख शुक्ला (तहसीलदार जनपद प्रतापगढ़) शामिल हैं। इसके अलावा 13 अन्य राजस्व अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे उनकी सुस्त कार्यप्रणाली पर जवाब तलब किया गया है।
23 सितंबर तक सीएम कार्यालय को जाएगी रिपोर्ट, डिमोशन और सस्पेंशन की तलवार
राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव ने लखनऊ, मऊ और प्रतापगढ़ के जिलाधिकारियों को कड़ा पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि वे चिह्नित सातों एसडीएम से बिंदुवार लिखित स्पष्टीकरण तलब करें। अधिकारियों को यह बताना होगा कि जब सरकार की ओर से पैमाइश, सीमांकन और वरासत के लिए समय-सीमा तय है, तो इतने कम मुकदमों का फैसला क्यों हुआ? डीएम को इन अफसरों के स्पष्टीकरण पर अपनी स्वतंत्र टिप्पणी जोड़कर 23 सितंबर 2026 तक शासन और मुख्यमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट भेजनी होगी। शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि यदि इन अधिकारियों का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो इनके खिलाफ निलंबन और पदावनति (डिमोशन) जैसी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
आम जनता को राहत देने के लिए ऑनलाइन मॉनिटरिंग और जीरो टॉलरेंस
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राजस्व से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार और अनावश्यक लेटलतीफी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कई तहसीलों में जमीन की पैमाइश और दाखिल-खारिज के नाम पर किसानों और आम नागरिकों को वर्षों तक दौड़ाया जाता था, जिससे जमीनी विवाद खूनी संघर्ष का रूप ले लेते थे। अब सरकार ने हर एक राजस्व वाद की डिजिटल ट्रैकिंग शुरू कर दी है। किस अदालत में कौन सा मुकदमा किस तारीख से लंबित है, इसकी लाइव निगरानी सीधे लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम से की जा रही है। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे केवल तारीख पर तारीख देने की कार्यशैली छोड़कर मेरिट के आधार पर समयबद्ध निर्णय दें, अन्यथा सख्त कार्रवाई झेलने के लिए तैयार रहें।