सीएम योगी का लापरवाही और मनमानी पर बड़ा ऐक्शन, मत्स्य निदेशक एनएस रहमानी समेत 5 अधिकारी निलंबित; पीएम मत्स्य संपदा योजना में अनियमितता और बिना अनुमति ठेके देने पर गिरी गाज

सीएम योगी का लापरवाही और मनमानी पर बड़ा ऐक्शन, मत्स्य निदेशक एनएस रहमानी समेत 5 अधिकारी निलंबित; पीएम मत्स्य संपदा योजना में अनियमितता और बिना अनुमति ठेके देने पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में शिथिलता, मनमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बार फिर अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने और बिना अनुमति के वित्तीय व प्रशासनिक फैसले लेने के गंभीर आरोपों में मत्स्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों पर गाज गिरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद की संस्तुति पर बड़ी कार्रवाई करते हुए मत्स्य निदेशक एन. एस. रहमानी (N. S. Rahmani) समेत पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

यह पूरी कार्रवाई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' (PMMSY) के क्रियान्वयन में पाई गई कथित अनियमितताओं, योजनाओं की निगरानी में कमी और वित्तीय प्राथमिकताओं की अनदेखी के प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर की गई है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निलंबित अधिकारियों में मत्स्य निदेशक एनएस रहमानी के अलावा वाराणसी में तैनात मत्स्य अधिकारी श्वेता सिंह, आकाश दीप, राजेंद्र और खुर्शीद आलम शामिल हैं। इस अचानक हुई बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई से पूरे पशुपालन व मत्स्य विकास विभाग में हड़कंप मच गया है।

बिना अनुमति बांटे गए ठेके और पीएमएमएसवाई में धांधली: जानें क्या हैं आरोप

निलंबित किए गए मत्स्य निदेशक एनएस रहमानी पर कई स्तरों पर पदीय शक्तियों के दुरुपयोग, पदीय जिम्मेदारियों में घोर लापरवाही और विभागीय नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, एनएस रहमानी पर सबसे प्रमुख आरोप यह है कि उन्होंने लखनऊ स्थित मत्स्य विभाग की बेशकीमती सरकारी भूमि का ठीक ढंग से संरक्षण नहीं किया, जिससे विभागीय संपत्तियों पर अतिक्रमण का खतरा पैदा हो गया। इसके अतिरिक्त, पूर्व में मत्स्य विभाग के उपनिदेशक पद पर रहते हुए उन्होंने वित्तीय वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 के दौरान प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिलने वाली अनुदानित परियोजनाओं के संचालन में भारी शिथिलता बरती।

इसके अलावा, सबसे गंभीर मामला बिना सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के ठेके स्वीकृत करने से जुड़ा हुआ है। एनएस रहमानी पर आरोप है कि उन्होंने महानिदेशक मत्स्य की अनिवार्य अनुमति और तय विभागीय प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए सोनभद्र जिले में स्थित प्रसिद्ध 'रिहंद जलाशय' में मछली पकड़ने (मत्स्याखेट) का ठेका सीधे जारी कर दिया। इसी तरह का मनमाना रवैया अपनाते हुए उन्होंने प्रयागराज स्थित गुलरिहा जलाशय और बहराइच स्थित गण्डौर जलाशय में भी मछली पकड़ने के ठेकों को बिना महानिदेशक की स्वीकृति के नियमों के विपरीत अनुमोदित कर दिया।

दूसरी तरफ, वाराणसी जनपद में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत लाभार्थियों को बांटी गई अनुदान राशि और परियोजनाओं के जमीनी सत्यापन में भी बड़े पैमाने पर गोलमाल पाया गया। विभागीय जांच में सामने आया कि अधिकारियों ने लाभार्थियों को किए गए भुगतानों का समय पर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) नहीं किया और न ही योजनाओं की समुचित मॉनिटरिंग की। इसी आधार पर वाराणसी की मत्स्य अधिकारी श्वेता सिंह, आकाश दीप, राजेंद्र और खुर्शीद आलम को उत्तरदायी मानते हुए निलंबित किया गया है।

निलंबन की अवधि के दौरान शासन ने मत्स्य निदेशक एनएस रहमानी को मंडलायुक्त कार्यालय, सहारनपुर मंडल से संबद्ध किया है। मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए मंडलायुक्त लखनऊ मंडल को जांच अधिकारी नामित किया गया है। जांच अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वे सभी अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों की गहन जांच कर एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपें।

मामले पर जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश के मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विस्तृत जांच का दायरा केवल इन पांच अधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि योजना के क्रियान्वयन में शामिल अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो भी व्यक्ति नियमों की अनदेखी, भ्रष्टाचार या मनमानी का दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार भ्रष्टाचार और कार्यों में लापरवाही के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा गरीबों, किसानों और मत्स्य पालकों के कल्याण के लिए भेजी जाने वाली योजनाओं की सरकारी धनराशि में किसी भी प्रकार का घोटाला या ढिलाई कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।