'संविधान को रौंद दिया, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे कानूनी जंग'; सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्तीकरण पर भड़के सांसद इमरान मसूद

'संविधान को रौंद दिया, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे कानूनी जंग'; सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्तीकरण पर भड़के सांसद इमरान मसूद

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के मामले ने अब व्यापक सियासी और कानूनी जंग का रूप ले लिया है। मायावती, अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी के तीखे बयानों के बाद अब सहारनपुर के स्थानीय कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इमरान मसूद ने बेहद सख्त लहजे में आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने रात के अंधेरे में कायदे-कानून और देश के संविधान को पैरों तले रौंदते हुए यह ध्वस्तीकरण कराया है।

सांसद इमरान मसूद ने साफ शब्दों में ऐलान किया है कि यह केवल एक इमारत का सवाल नहीं है, बल्कि देश के संविधान और विधिक प्रक्रियाओं की रक्षा का सवाल है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक ज्यादती के खिलाफ वे चुप नहीं बैठेंगे और इस मामले को इंसाफ के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट से लेकर देश की शीर्ष अदालत—सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे।

'रात भर अफसरों से संपर्क साधा, पर अंधेरे में चला दिया बुलडोजर': इमरान मसूद

इमरान मसूद ने मीडिया से बातचीत करते हुए पूरी कार्रवाई की टाइमिंग और अधिकारियों की मंशा पर कई गंभीर सवाल खड़े किए:

  • अपील के अधिकार का गला घोंटा: सांसद ने कहा कि जिला अदालत से आदेश आने के बाद कानूनन पक्षकारों को उच्च अदालत में अपील दायर करने के लिए नियमानुसार समय मिलना चाहिए था। लेकिन प्रशासन ने शुक्रवार की रात पूरे इलाके को छावनी में बदला और शनिवार तड़के ही 6 बुलडोजर लगाकर इमारत को ढहा दिया ताकि किसी को अदालत जाकर 'स्टे ऑर्डर' लेने की मोहलत ही न मिले।

  • संवाद से भागने का आरोप: मसूद ने दावा किया कि जब उन्हें ध्वस्तीकरण की तैयारियों की भनक लगी, तो उन्होंने खुद रात भर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया ताकि बात कर कोई रास्ता निकाला जा सके, लेकिन अधिकारियों ने बात करने तक से परहेज किया।

  • लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन: उन्होंने कैराना सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किए जाने की निंदा करते हुए कहा कि जब जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को ही अपने लोगों के पास जाने से रोक दिया जाएगा, तो फिर लोकतंत्र और संविधान कहां बचा?

'150 साल पुराना था ढांचा, वक्फ संपत्ति पर जबरन चला बुलडोजर'

इमरान मसूद ने मस्जिद के ऐतिहासिक और विधिक अस्तित्व का हवाला देते हुए प्रशासन के अतिक्रमण वाले दावे को सिरे से खारिज किया:

  • ऐतिहासिक वक्फ संपत्ति: सांसद ने कहा कि यह कोई नई बनी इमारत नहीं थी, बल्कि लगभग 150 साल पुरानी मस्जिद थी जो वक्फ के दस्तावेजों में बाकायदा दर्ज है। उनका तर्क है कि जब कोई संपत्ति वक्फ के दायरे में आती है, तो उसके संबंध में वक्फ ट्रिब्यूनल के स्तर पर ही अंतिम फैसला हो सकता है।

  • करोड़ों के जुर्माने पर एतराज: सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए करीब 6.41 करोड़ रुपये के हर्जाने और खाली करने के आदेश पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि दशकों से मौजूद धार्मिक ढांचे पर अचानक इतना भारी जुर्माना थोपकर सीधे बुलडोजर चलाना प्रशासनिक तानाशाही का खुला प्रमाण है।

'सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी लड़ाई, इंसाफ लेकर रहेंगे'

कांग्रेस सांसद ने कानूनी रणनीति साझा करते हुए कहा कि उनके अधिवक्ताओं की टीम सभी अदालती आदेशों और प्रशासनिक कार्रवाइयों के दस्तावेज तैयार कर रही है:

  • सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: इमरान मसूद ने कहा, "हम इस मामले को कतई ठंडा नहीं पड़ने देंगे। हमारे वकील हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) और अवमानना याचिका की तैयारी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी बिना प्रक्रिया अपनाए अंधाधुंध बुलडोजर एक्शन पर कड़ी टिप्पणियां की हैं, हम इस प्रशासनिक मनमानी को अदालत के सामने बेनकाब करेंगे।"

  • अमन-चैन बनाए रखने की अपील: उन्होंने सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अवाम से अपील की कि वे किसी भी तरह के उकसावे या गुस्से में न आएं। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और कानूनी होगी, इसलिए कानून अपने हाथ में न लें और शहर के आपसी भाईचारे को कायम रखें।

कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा कड़ी, प्रशासन का दावा- 'कार्रवाई कानूनसम्मत'

इमरान मसूद के कड़े तेवरों और विपक्षी नेताओं के बयानों के बीच सहारनपुर कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बेहद सख्त रखी गई है। पीएसी और आरएएफ के जवानों ने संवेदनशील रास्तों पर मोर्चा संभाल रखा है।

दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने सांसद के आरोपों का खंडन करते हुए दोहराया है कि कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सरकारी जमीन पर किए गए अनाधिकृत निर्माण के खिलाफ यह कार्रवाई सिटी मजिस्ट्रेट और जिला जज की अदालत के विधिक फैसलों के आधार पर ही पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है।