डीडीयू में कुलपति का घेराव कर भीषण प्रदर्शन, प्रशासनिक भवन में जड़ा ताला, कुलपति की गाड़ी के सामने लेटीं महिला शिक्षिका! जानें क्या है पूरा विवाद
पूर्वांचल के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) में प्रशासनिक अव्यवस्थाओं, शिक्षकों के उत्पीड़न और लंबित मांगों को लेकर भारी बवाल खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय परिसर में उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला जब आक्रोशित शिक्षकों और कर्मचारियों ने कुलपति का घेराव करते हुए प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब और भी गंभीर हो गई जब एक महिला शिक्षिका कुलपति की कार के आगे सीधे जमीन पर लेट गईं।
विश्वविद्यालय परिसर में हुए इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। सुरक्षाकर्मियों और पुलिस बल को स्थिति पर काबू पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई घंटों तक प्रशासनिक भवन में कुलपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बंधक बने रहे, जिससे पूरे विश्वविद्यालय का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।
क्या हैं मांगें और क्यों भड़का शिक्षकों व कर्मचारियों का आक्रोश?
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में पिछले कुछ समय से शिक्षकों की पदोन्नति (CAS Promotion), बकाया वेतन, मानदेय भुगतान और प्रशासनिक रवैये को लेकर असंतोष पनप रहा था। शिक्षक संघ और कर्मचारी प्रतिनिधियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार उनकी जायज मांगों की अनदेखी कर रहा है।
शिक्षकों और कर्मचारियों के मुख्य विरोध के कारण इस प्रकार हैं:
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पदोन्नति में देरी: कई वर्षों से लंबित करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत होने वाली पदोन्नति प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाने का आरोप।
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उत्पीड़न और तानाशाही का आरोप: शिक्षकों का कहना है कि संवाद के रास्ते बंद कर दिए गए हैं और जायज आवाज उठाने पर दंडात्मक कार्रवाई की धमकियां दी जा रही हैं।
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संविदा व मानदेय शिक्षकों का बकाया: अतिथि प्रवक्ताओं और संविदा कर्मचारियों के समय पर भुगतान न होने से भारी नाराजगी।
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प्रशासनिक ताला-बंदी: वार्ता के कई दौर विफल होने के बाद आक्रोशित होकर प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार पर ताला जड़ना पड़ा।
प्रदर्शन के दौरान जब कुलपति अपनी कार से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे, तभी एक महिला शिक्षिका उनकी गाड़ी के बोनट के आगे आकर जमीन पर लेट गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगी। महिला शिक्षिका के इस कदम के बाद मौके पर मौजूद अन्य महिला पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों ने उन्हें समझा-बुझाकर हटाने का प्रयास किया, जिससे मौके पर काफी नोकझोंक और हंगामा देखने को मिला।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच मध्यस्थता कराने का प्रयास किया।
पूर्वांचल से लेकर राजधानी लखनऊ तक इस घटना की गूंज सुनाई दे रही है। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने भी घटना का संज्ञान लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नियमों के दायरे में रहकर सभी न्यायसंगत मांगों का समाधान निकाला जा रहा है, लेकिन विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को खराब करना और कानून-व्यवस्था को हाथ में लेना पूरी तरह गलत है। वहीं, शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगे।