'कोर्ट में मारेंगे, जज को पसीना आएगा...': हरियाणवी गाने के बोल से भड़का गोगी गैंग का ईगो
उत्तर प्रदेश के शामली में हरियाणवी सिंगर और कलाकार अंकित बालियान की दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर की गई हत्या ने पूरे उत्तर भारत की म्यूजिक इंडस्ट्री और सोशल मीडिया जगत को सन्न कर दिया था। इस सनसनीखेज हत्याकांड के खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में सक्रिय गैंगस्टर सिंडिकेट्स का ईगो किस कदर बेलगाम हो चुका है। पुलिस जांच और यूपी एसटीएफ (UP STF) की कार्रवाई में साफ हुआ है कि अंकित बालियान की हत्या के पीछे कोई पुरानी खानदानी रंजिश या करोड़ों की रंगदारी का विवाद नहीं था, बल्कि यूट्यूब पर 5.4 करोड़ से ज्यादा व्यूज बटोर चुका एक गाना था।
गाने के बोल—'...भरी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान...' और '...कोर्ट में मारेंगे, जज को पसीना आएगा...' को कुख्यात जितेंद्र मान उर्फ गोगी गैंग ने अपने मारे जा चुके सरगना की मौत का सार्वजनिक मजाक और गैंग का सीधा अपमान मान लिया था। इसी कथित अपमान का बदला लेने के लिए गोगी गैंग के आकाओं ने अंकित की हत्या का फरमान जारी कर दिया। हालांकि, वारदात के महज पांच दिनों के भीतर यूपी एसटीएफ और शामली पुलिस ने मुठभेड़ (Encounter) में 50-50 हजार रुपये के दोनों इनामी शार्प शूटरों—मोहित और सुमित को ढेर कर दिया।
₹55 हजार में खरीदा गाना और 5.4 करोड़ व्यूज: रोहिणी कोर्ट शूटआउट से कैसे जुड़ा विवाद?
जांच अधिकारियों और पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ें सितंबर 2021 के चर्चित रोहिणी कोर्ट शूटआउट और उसके बाद रिलीज हुए हरियाणवी गाने से जुड़ी हैं।
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रोहिणी कोर्ट में गोगी का कत्ल: 24 सितंबर 2021 को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट रूम नंबर 207 में विरोधी टिल्लू ताजपुरिया गैंग के दो शूटरों ने वकील के वेश में घुसकर गैंगस्टर जितेंद्र मान उर्फ गोगी की जज और वकीलों के सामने अंधाधुंध गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था को हिला दिया था।
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गाने की खरीद और री-सेल: इसके कुछ समय बाद अंकित बालियान ने लेखक राहुल पुड्डी से मात्र ₹55,000 में एक गाना खरीदा जिसके बोल थे—'...भरी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान...'। अंकित ने इस प्रोजेक्ट को तैयार कर म्यूजिक कंपनी वत्स (Vats Company) को ₹1,50,000 में बेच दिया और खुद इस गाने के वीडियो में मुख्य भूमिका (एक्टिंग) निभाई।
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सोशल मीडिया पर वायरल और ईगो हर्ट: जब यह गाना रिलीज हुआ, तो यूट्यूब पर इसे 5.4 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा। गोगी गैंग के गुर्गों और विदेश में बैठे गैंग के आकाओं ने यह मान लिया कि गाने की लाइनें और कोर्ट रूम में गोलीबारी का दृश्य जानबूझकर जितेंद्र गोगी की हत्या का उपहास उड़ाने और गोगी गैंग को नीचा दिखाने के लिए फिल्माया गया है।
गोगी गैंग का ईगो और टिल्लू ताजपुरिया सिंडिकेट का शक: 2022-23 से मिल रही थीं धमकियां
गाने के वायरल होते ही अंकित बालियान गोगी गैंग की 'हिट लिस्ट' में आ गए थे।
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अंकित ने दी थी सफाई: पुलिस जांच में सामने आया कि वर्ष 2022 और 2023 में गोगी गैंग की तरफ से अंकित को फोन पर कई बार जान से मारने की धमकियां दी गईं। अंकित ने गैंग के सदस्यों को ऑडियो संदेश और संपर्कों के जरिए यह स्पष्टीकरण दिया था कि वह केवल एक कलाकार हैं, उन्होंने सिर्फ वीडियो में अभिनय किया है और गाने के बोल या कहानी उनकी नहीं थी।
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विरोधी गैंग से फंडिंग का झूठा आरोप: अंकित की सफाई को नजरअंदाज करते हुए गोगी गैंग ने यह आरोप मढ़ दिया कि अंकित ने विरोधी टिल्लू ताजपुरिया गैंग के कहने पर और उनसे पैसे लेकर इस गाने को प्रमोट किया ताकि गोगी गैंग का खौफ खत्म हो सके।
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पुलिस और परिवार से बात छिपाना पड़ा भारी: अंकित बालियान ने इन लगातार मिल रही धमकियों के बारे में न तो अपने परिवार को कुछ बताया और न ही शामली पुलिस में कोई आधिकारिक सुरक्षा या शिकायत दर्ज कराई। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर गैंग ने उनकी हत्या की खूनी साजिश रच डाली।
26 अगस्त को जिम के बाहर खूनी वारदात: रेकी से लेकर फायरिंग तक का पूरा घटनाक्रम
वारदात को अंजाम देने के लिए हरियाणा से विशेष रूप से दो शार्प शूटरों—मोहित और सुमित को भेजा गया था।
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दैनिक मूवमेंट की रेकी: शूटरों ने स्थानीय मददगारों के साथ मिलकर शामली में अंकित के घर और जिम आने-जाने के रास्तों, समय और उनकी गाड़ी के नंबर की कई दिनों तक रेकी की।
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26 अगस्त का हमला: 26 अगस्त की सुबह जब अंकित बालियान जिम में कसरत करने के बाद बाहर निकले और अपनी गाड़ी की डिक्की खोलकर जिम बैग रख रहे थे, तभी घात लगाकर खड़े दोनों शूटरों ने उन पर ऑटोमैटिक पिस्तौल से अंधाधुंध गोलियां चला दीं।
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मौके पर ही मौत: अंकित को कई गोलियां लगीं और वे लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। वारदात को अंजाम देकर दोनों शूटर पूर्व-निर्धारित योजना के तहत अलग-अलग रास्तों से फरार हो गए। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने अंकित को मृत घोषित कर दिया।
5 दिन में यूपी STF का एक्शन: 50-50 हजार के दो इनामी शूटर मुठभेड़ में ढेर
अंकित बालियान की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश शासन के कड़े निर्देशों पर एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश और एसटीएफ की विशेष टीमों को जांच में लगाया गया।
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डिजिटल फुटप्रिंट और मुखबिर तंत्र: एसटीएफ ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डंप डेटा और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर शूटरों की पहचान हरियाणा के मोहित और सुमित के रूप में की। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का नकद इनाम घोषित किया गया।
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जवाबी फायरिंग में खात्मा: जब एसटीएफ और शामली पुलिस की संयुक्त टीम ने शूटरों को घेरकर सरेंडर करने के लिए ललकारा, तो बदमाशों ने पुलिस बल पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। पुलिस की आत्मरक्षा में की गई सटीक जवाबी फायरिंग में दोनों शार्प शूटर ढेर हो गए।
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अत्याधुनिक असलहे बरामद: मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने विदेशी व अत्याधुनिक अवैध पिस्तौल, जिंदा कारतूस और वारदात में इस्तेमाल की गई संदिग्ध सामग्री जब्त की। इस त्वरित और साहसिक कार्रवाई के लिए डीजीपी राजीव कृष्ण ने पुलिस टीम को ₹2 लाख के नकद इनाम की घोषणा की।
लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट, विदेशी साजिश और डीजीपी की सख्त चेतावनी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी राजीव कृष्ण ने साफ किया कि पुलिस इस हत्याकांड के केवल जमीनी शूटरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके पीछे बैठे मास्टरमाइंड्स का भी सफाया करेगी।
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लॉरेंस बिश्नोई-गोगी गैंग अलायंस: राष्ट्रीय स्तर पर जितेंद्र गोगी गैंग, लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ सिंडिकेट के साथ मिलकर काम करता है। पुलिस जांच कर रही है कि अंकित के कत्ल के लिए फंडिंग और हथियार किस बड़े आपराधिक सिंडिकेट के जरिए उपलब्ध कराए गए थे।
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विदेश में बैठे आकाओं पर शिकंजा: डीजीपी ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि हत्या की साजिश रचने वाले अपराधी अगर विदेश में भी बैठे हैं, तो उन्हें इंटरपोल (Interpol), रेड कॉर्नर नोटिस और केंद्रीय एजेंसियों की मदद से डिपोर्ट कराकर भारत लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती पर अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
गैंगस्टर कल्चर और म्यूजिक इंडस्ट्री: गानों में बंदूकों के महिमामंडन की खूनी कीमत
अंकित बालियान हत्याकांड ने एक बार फिर पंजाबी और हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में हावी होते जा रहे 'गैंगस्टर कल्चर' और सोशल मीडिया पर बंदूकों के महिमामंडन के घातक नतीजों को उजागर कर दिया है।
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड से लेकर अंकित बालियान तक, यह साफ हो चुका है कि गानों में गैंगवार, जेल, अदालत और हथियारों का इस्तेमाल अब केवल मनोरंजन नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर वास्तविक गैंग्स के ईगो क्लैश और खूनी बदले का कारण बन रहा है। कानून के जानकारों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि कलाकारों को बिना सोचे-समझे किसी गिरोह के संदर्भ वाले गानों से दूर रहना चाहिए और यदि कोई धमकी मिलती है, तो उसे छिपाने के बजाय तुरंत पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के संज्ञान में लाना चाहिए।