विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में नशे के सामान की पहुंच पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जताई गहरी नाराजगी, दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में नशे के सामान की पहुंच पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जताई गहरी नाराजगी, दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के परिसरों व हॉस्टलों में नशे के सामान (ड्रग्स और अवैध मादक पदार्थ) के लगातार पहुंचने की खबरों पर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल (Anandiben Patel) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। युवा पीढ़ी और छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर रहे इस नासूर पर चिंता जताते हुए राज्यपाल ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है और सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (VGs) तथा प्रशासनिक अधिकारियों को परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

राज्यपाल की चिंता: "छात्रों का भविष्य और शिक्षण संस्थानों की गरिमा सर्वोपरि"

राजभवन से जारी निर्देशों के अनुसार, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि शिक्षण संस्थान ज्ञान के मंदिर होते हैं, और यदि ऐसे परिसरों में नशे का कारोबार या उसका सेवन बढ़ रहा है, तो यह बेहद चिंताजनक और असहनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में बाहरी तत्वों का प्रवेश और अवैध पदार्थों की उपलब्धता इस बात का संकेत है कि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर चूक हो रही है।

राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि वे अपने-अपने परिसरों में तुरंत प्रभावी कदम उठाएं ताकि युवा छात्रों को इस दलदल से बचाया जा सके।

कुलपतियों और प्रशासन को दिए गए कड़े निर्देश

  1. औचक निरीक्षण (Surprise Inspections): हॉस्टलों में नियमित और औचक छापेमारी की जाए ताकि यह पता चल सके कि वहां अवैध रूप से कौन रह रहा है और क्या गतिविधियां चल रही हैं।

  2. एंटी-ड्रग कमेटियों का गठन: शिक्षण संस्थानों में छात्र-अध्यापक समन्वय के साथ 'एंटी-ड्रग कमेटियां' सक्रिय की जाएं, जो न सिर्फ निगरानी रखें बल्कि छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक भी करें।

  3. पुलिस प्रशासन से समन्वय: विश्वविद्यालयों के आसपास अवैध रूप से नशीले पदार्थों की बिक्री करने वालों पर शिकंजा कसने के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर सख्त अभियान चलाया जाए।

  4. कड़े सुरक्षा मानक: हॉस्टलों में बॉयोमीट्रिक एंट्री या सख्त पास प्रणाली लागू की जाए, जिससे किसी भी बाहरी या संदिग्ध व्यक्ति का बिना रोक-टोक प्रवेश पूरी तरह बंद हो सके।

छात्रों के अभिभावकों में भी बढ़ी चिंता

राज्यपाल के इस कड़े रुख के बाद से राज्य के तमाम विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। शिक्षाविदों और अभिभावकों का मानना है कि यदि समय रहते हॉस्टलों की सुरक्षा और निगरानी कड़ी नहीं की गई, तो यह स्थिति आने वाले समय में और अधिक भयानक रूप ले सकती है। प्रशासन अब इन निर्देशों के अनुपालन में एक्शन मोड में नजर आ रहा है।