'जंतर-मंतर पर बच्चों की चीखें सुनकर पसीजा दिल, मिलकर लड़े तो BJP को हराना मुश्किल नहीं': सपा सांसद डिंपल यादव ने बताया दिल्ली जाने का सच
उत्तर प्रदेश से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मैनपुरी से लोकसभा सांसद डिंपल यादव ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं के आंदोलन में सपा सांसदों की मौजूदगी को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। लखनऊ स्थित पार्टी राज्य मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डिंपल यादव ने पहली बार खुलकर बताया कि आखिर क्यों सपा सांसदों का डेलिगेशन संसद से निकलकर जंतर-मंतर की सड़कों पर उतरने को मजबूर हुआ था। डिंपल यादव ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने बुनियादी अधिकारों और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग कर रहे छात्र-छात्राओं पर जिस तरह से लाठियां बरसाई गईं और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, उसने एक मां और एक जनप्रतिनिधि के रूप में उनके दिल को झकझोर कर रख दिया था। उन्होंने दावा किया कि छात्रों का यह अडिग हौसला और आक्रोश आगामी चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक घमंड को चूर-चूर करने और उसे हराने के लिए पूरे देश में 'संजीवनी बूटी' का काम करेगा।
जंतर-मंतर जाने का फैसला क्यों? डिंपल यादव ने बयां किया आंखों देखा खौफनाक मंजर
प्रेस वार्ता में भावुक होते हुए डिंपल यादव ने जंतर-मंतर पर हुए पूरे घटनाक्रम की आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि कई राजनीतिक दल और रणनीतिकार इस पक्ष में नहीं थे कि संसद सत्र के दौरान सीधे जमीन पर उतरकर आंदोलन स्थल पर जाया जाए, लेकिन छात्रों की पीड़ा और उनका संघर्ष देखकर पार्टी ने तय किया कि वह चुप नहीं बैठेगी। डिंपल ने कहा कि जब वे इकरा हसन और प्रिया सरोज जैसी युवा महिला सांसदों के साथ जंतर-मंतर पहुंचीं, तो वहां का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था। पुलिस बैरिकेड्स के दूसरी तरफ निहत्थे छात्र-छात्राओं को बर्बरता से पीटा जा रहा था। छात्राओं के कपड़े तक फटने की नौबत आ गई थी और वे सड़क पर रोती-बिलखती मदद की गुहार लगा रही थीं। डिंपल यादव ने कहा कि उस वक्त उन्हें लगा कि प्रदर्शन कर रहे सभी बच्चे उनके अपने परिवार के हैं। उन्होंने कहा कि एक मां होने के नाते वे मैदान छोड़कर पीछे नहीं हट सकती थीं, इसलिए उन्होंने घायल छात्रों को प्राथमिक उपचार दिलाने, पानी पिलाने और उनके मनोबल को मजबूत करने के लिए वहीं डटे रहने का फैसला किया।
सोनम वांगचुक के साथ अमानवीय व्यवहार और सोशल मीडिया पर सेंसरशिप का आरोप
डिंपल यादव ने शिक्षा सुधार और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन हटाए जाने के तरीके पर केंद्र सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से आधी रात को सोनम वांगचुक को सफेद कपड़ों में लपेटकर और चारों तरफ से पर्दा डालकर अस्पताल ले जाया गया, वह ऐसा लग रहा था मानो किसी अपराधी या शव को छिपाकर ले जाया जा रहा हो। सपा सांसद ने कहा कि जब शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आवाज उठाने वालों को दबाया जाता है, तो देश का संविधान और लोकतंत्र लहूलुहान होता है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर सोशल मीडिया से आंदोलन से जुड़े वीडियोज, रील्स और पोस्ट्स को जबरन हटवाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार सच्चाई को देश की जनता तक पहुंचने से रोकने के लिए डिजिटल सेंसरशिप का सहारा ले रही है, लेकिन युवाओं के भीतर जो असंतोष की ज्वाला भड़की है, उसे किसी भी अल्गोरिदम या पुलिसिया ताकत से बुझाया नहीं जा सकता।
'बीजेपी को हराने के लिए यह आंदोलन बना संजीवनी बूटी': डिंपल की हुंकार
डिंपल यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की डबल इंजन सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा सत्ताधारी दल युवाओं, छात्रों और बेरोजगारों से पूरी तरह डर चुका है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार होने वाले पेपर लीक और नौकरियों के अभाव ने देश के युवाओं को गहरे मानसिक तनाव और अवसाद में धकेल दिया है। जब छात्र सवाल पूछते हैं, तो सरकार संवाद करने के बजाय उन पर मुकदमे दर्ज करती है और लाठियां चलवाती है। डिंपल यादव ने कहा कि जंतर-मंतर का यह आंदोलन अब केवल दिल्ली या कुछ छात्रों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह देश के हर गांव, कस्बे और शहर के उस नौजवान की आवाज बन चुका है जो व्यवस्था से ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगर विपक्ष, युवा और महिलाएं एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से लड़ेंगे, तो भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बेदखल करना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं होगा और यह आंदोलन विपक्षी एकजुटता व जनता के लिए सबसे बड़ी संजीवनी बूटी साबित होगा।
सपा के पीडीए (PDA) में 'A' का नया मतलब: 'आधी आबादी' पर सबसे बड़ा दांव
सपा सांसद ने इस मौके पर समाजवादी पार्टी के चर्चित पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को एक नया वैचारिक विस्तार दिया। डिंपल यादव ने कहा कि सपा ने अब पीडीए के 'A' में 'आधी आबादी' यानी महिलाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ शामिल किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की महिलाओं से अपील की कि वे पुरानी बंदिशों और रूढ़ियों को तोड़कर अपने अधिकारों के लिए आगे आएं। डिंपल ने कहा कि भाजपा के लिए नारी सिर्फ एक चुनावी नारा है, जबकि सपा के लिए नारी शक्ति का सम्मान और आर्थिक सुरक्षा ही मुख्य ध्येय है। उन्होंने केंद्र सरकार को चुनौती दी कि यदि वह वास्तव में महिलाओं का भला चाहती है, तो रक्षाबंधन के पावन पर्व पर संसद में पास हो चुके महिला आरक्षण विधेयक को बिना किसी देरी के आगामी विधानसभा चुनावों में ही तुरंत लागू करने की घोषणा करे।
'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' और महिलाओं के लिए घोषणाओं की झड़ी
अखिलेश यादव और डिंपल यादव ने उत्तर प्रदेश की आधी आबादी को साधने के लिए 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' का औपचारिक ऐलान किया। इस योजना के तहत सपा सरकार बनने पर गरीब परिवारों की महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये की सीधी आर्थिक मदद, हर महीने 2 दिन की विशेष आकस्मिक छुट्टी (पीरियड लीव), राज्य की सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण और यूपीएसआरटीसी की बसों में 100 फीसदी मुफ्त यात्रा का वादा किया गया है। इसके अतिरिक्त, 12वीं पास छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप, हर तहसील में महिला पीजी कॉलेज, बंद पड़े 26 हजार प्राथमिक स्कूलों को फिर से शुरू करने और 1090 व डायल-100 हेल्पलाइन को पूरी ताकत से बहाल करने का संकल्प दोहराया गया है। सपा नेताओं का कहना है कि यह केवल चुनावी वादे नहीं बल्कि सामाजिक न्याय की धरातल पर खींची गई वास्तविक विकास की लकीर है।
अखिलेश यादव का योगी सरकार पर तंज: 'हमारी प्लानिंग लीक होकर सरकार तक पहुंच रही'
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार की हालिया बुजुर्ग महिला मुफ्त बस योजना पर चुटकी लेते हुए कहा कि सपा की रणनीति और घोषणाएं पहले ही लीक होकर शासन तक पहुंच रही हैं, जिसके दबाव में सरकार को फटाफट योजनाएं शुरू करनी पड़ रही हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि जंतर-मंतर पर सपा सांसदों ने किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के भविष्य यानी नौजवानों के दर्द को महसूस करके सड़क पर संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बेटियों और बहनों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हो रहे हैं और हाथरस से लेकर उन्नाव तक की घटनाएं इस बात की गवाह हैं। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी भाजपा से कहीं अधिक संख्या में महिला उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारकर उन्हें वास्तविक सत्ता में भागीदारी दिलाएगी।
लखनऊ से दिल्ली तक बदली डिंपल यादव की सियासी छवि और चुनावी मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जंतर-मंतर पर छात्रों के बीच पहुंचकर पुलिस लाठीचार्ज के सामने खड़े होने और अब लखनऊ के मंच से आक्रामक तेवर दिखाने के बाद डिंपल यादव की छवि पूरी तरह बदल चुकी है। पूर्व में एक शांत और सौम्य नेता के रूप में पहचानी जाने वाली डिंपल अब सड़क से लेकर संसद तक एक जुझारू और फ्रंटफुट पर खेलने वाली राष्ट्रीय नेत्री के रूप में उभरकर सामने आई हैं। मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव और 2024 के आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद, उनका युवाओं और महिलाओं के मुद्दों को अपनी राजनीति का केंद्र बनाना समाजवादी पार्टी के लिए एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी यह चिंगारी अब उत्तर प्रदेश के 2027 के चुनावी रणक्षेत्र में एक बड़ा राजनीतिक तूफान बनने की ओर अग्रसर है।