'अगर हम गाली खाएंगे, तो आप भी तैयार रहें': कानपुर नगर निगम सदन में नगर आयुक्त पर बुरी तरह भड़कीं मेयर प्रमिला पांडेय
उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर के नगर निगम सदन में उस समय भारी राजनीतिक और प्रशासनिक घमासान देखने को मिला, जब 'रिवॉल्वर दादी' के नाम से चर्चित तेजतर्रार मेयर प्रमिला पांडेय अपनी ही प्रशासनिक मशीनरी पर बरस पड़ीं। शहर की बुनियादी समस्याओं, विकास कार्यों की फाइलों में लगातार हो रही देरी और नगर निगम के अधिकारियों की कथित मनमानी पर मेयर का गुस्सा इस कदर फूटा कि सदन में सन्नाटा पसर गया। मेयर ने नगर आयुक्त को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करते हुए अत्यंत तल्ख लहजे में अल्टीमेटम दे दिया कि यदि जनता के काम न होने की वजह से जनप्रतिनिधियों को गालियां खानी पड़ेंगी, तो इसके लिए अधिकारी भी तैयार रहें।
सदन की कार्यवाही के दौरान पार्षदों द्वारा अपने-अपने वार्डों में विकास कार्य ठप होने और शिकायतों के बावजूद सुनवाई न होने के आरोप लगाए जा रहे थे। जब मेयर के सामने यह तथ्य आया कि जनहित से जुड़े प्रस्तावों और बजट की फाइलें अधिकारियों की टेबल पर हफ्तों तक धूल फांकती रहती हैं, तो प्रमिला पांडेय अपनी कुर्सी से उठ खड़ी हुईं और अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा वार किया।
'जनता हमें चुनती है, अधिकारियों की लापरवाही हम क्यों झेलें?'
मेयर प्रमिला पांडेय ने नगर आयुक्त और मुख्य अभियंता समेत तमाम जोनल अधिकारियों की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि चुनाव जीतकर जनता के बीच जनप्रतिनिधि जाते हैं। मोहल्लों में सीवर उफनने, नालियां जाम होने, टूटी सड़कों और पेयजल संकट पर इलाके के लोग सीधे पार्षदों और मेयर को घेरते हैं। जनता के गुस्से का सामना जनप्रतिनिधियों को करना पड़ता है, जबकि एयरकंडीशन्ड कमरों में बैठे अफसर फाइलों को दबाकर मौज काटते हैं।
मेयर ने स्पष्ट और चेतावनी भरे अंदाज में कहा, "हम जनता के प्रति जवाबदेह हैं। शहर के लोग हमसे जवाब मांगते हैं। अगर अधिकारियों की हीलाहवाली की वजह से फील्ड में हमें जनता की खरी-खोटी और गालियां सुननी पड़ रही हैं, तो अब यह बर्दाश्त नहीं होगा। अगर हम गाली खाएंगे, तो फिर आप लोग भी भुगतने के लिए तैयार रहिए। अब किसी भी अधिकारी की मनमानी या काम टालने की आदत को बख्शा नहीं जाएगा।"
फाइलों की लेटलतीफी और टेंडर प्रक्रिया पर उठाए कड़े सवाल
सदन में कई पार्षदों ने इस बात पर कड़ा रोष जताया कि बारिश के बाद शहर की कई मुख्य सड़कों और गलियों की हालत खस्ताहाल हो चुकी है, लेकिन मरम्मत के टेंडर पास होने के बावजूद धरातल पर काम शुरू नहीं कराया जा रहा है। पार्षदों का आरोप था कि वित्त और निर्माण विभाग के अधिकारी टेंडर फाइलों को मंजूरी देने में जानबूझकर महीनों का समय लगाते हैं, जिससे ठेकेदार काम रोक देते हैं और जनता त्राहि-त्राहि करती है।
इस पर मेयर ने नगर आयुक्त से दो टूक पूछा कि आखिर जनहित के कार्यों की फाइलें तय समय सीमा के भीतर आगे क्यों नहीं बढ़तीं? उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक फाइल पर किस अधिकारी ने कितने दिन का समय लिया, इसका पूरा ट्रैक रिकॉर्ड सदन के सामने रखा जाए। मेयर ने चेतावनी दी कि यदि किसी बाबू या अफसर के स्तर पर फाइल अनावश्यक रूप से लंबित पाई गई, तो उसकी व्यक्तिगत जवाबदेही तय करते हुए निलंबन और वेतन रोकने की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी।
पार्षदों का हंगामा, विपक्ष ने भी साधा प्रशासनिक व्यवस्था पर निशाना
बैठक के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही खेमों के पार्षदों ने एकजुट होकर नगर निगम के लचर ढर्रे पर हल्ला बोला। पार्षदों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के निस्तारण के लिए बनाए गए हेल्पलाइन नंबर और आईजीआरएस पोर्टल पर केवल फर्जी रिपोर्ट लगाकर मामलों को कागजों में निपटा दिया जाता है, जबकि जमीन पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।
सफाई कर्मचारियों की बायोमेट्रिक हाजिरी के बावजूद वार्डों से कर्मचारियों के नदारद रहने और डोर-टू-डोर कूड़ा उठान वाली गाड़ियों के नियमित न पहुंचने का मुद्दा भी गरमाया रहा। मेयर प्रमिला पांडेय ने पार्षदों के गुस्से को जायज ठहराते हुए कहा कि सदन सर्वोपरि है और यहां लिए गए फैसलों को लागू करना अधिकारियों का कानूनी दायित्व है, न कि कोई उपकार।
समयबद्ध सुधार की चेतावनी, लापरवाही पर शासन को जाएगी रिपोर्ट
हंगामेदार बैठक के अंत में मेयर ने अधिकारियों को अपनी कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने नगर आयुक्त को निर्देशित किया कि सभी लंबित फाइलों का निपटारा 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाए और वार्डवार चल रहे विकास कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट मेयर कार्यालय को सौंपी जाए।
प्रमिला पांडेय ने साफ संदेश दिया कि कानपुर की जनता की गाढ़ी कमाई से टैक्स लिया जाता है, इसलिए उन्हें बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि अधिकारियों ने अपने रवैये में बदलाव नहीं किया, तो वे सीधे मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री से मिलकर लापरवाह अफसरों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई कराएंगी।