असद के एनकाउंटर से लेकर छोटे बेटे आबान की मौत तक: 3 साल में ताश के पत्तों की तरह बिखरा माफिया अतीक अहमद का कुनबा, 50 हजार की इनामी शाइस्ता अब भी चल रही फरार
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और पूर्वांचल में दशकों तक दहशत और राजनीतिक रसूख का पर्याय रहा माफिया अतीक अहमद का कुनबा महज तीन वर्षों के भीतर पूरी तरह बिखर चुका है। जिस साम्राज्य की तूती कभी समूचे प्रदेश में बोलती थी, आज उसका नामोनिशान मिटने की कगार पर है। फरवरी 2023 में हुए चर्चित उमेश पाल हत्याकांड के बाद से शुरू हुआ पुलिस और कानून का शिकंजा ऐसा कसा कि देखते ही देखते इस माफिया परिवार के सदस्य या तो काल के गाल में समा गए, जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गए या फिर कानून से बचते-फिरते फरार चल रहे हैं। 2023 से लेकर 2026 तक के इन तीन सालों में अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान के आकस्मिक निधन ने इस कुनबे के पतन की कहानी पर एक और गमगीन अध्याय लिख दिया है।
अतीक के साम्राज्य के ध्वस्त होने की शुरुआत 13 अप्रैल 2023 को हुई, जब झांसी में यूपी एसटीएफ (STF) के साथ हुई मुठभेड़ में उसके तीसरे नंबर के बेटे असद अहमद को मार गिराया गया। असद उमेश पाल हत्याकांड का मुख्य आरोपी था और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। असद के एनकाउंटर के ठीक दो दिन बाद 15 अप्रैल 2023 की रात जो हुआ, उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। प्रयागराज के काल्विन अस्पताल के बाहर मेडिकल जांच के लिए ले जाते समय पुलिस कस्टडी में मीडियाकर्मियों के भेष में आए तीन हमलावरों ने अतीक अहमद और उसके भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ की ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर लाइव टीवी पर हत्या कर दी। अतीक और अशरफ की मौत के बाद अतीक के साम्राज्य का मुख्य आधार ही खत्म हो गया।
सलाखों के पीछे बेटे और फरार 'लेडी डॉन': कसारी-मसारी में सिमट गई अतीक के कुनबे की दास्तान
अतीक अहमद की मौत के बाद उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन पर कानून का शिकंजा कस गया। उमेश पाल हत्याकांड की साजिश में नामजद शाइस्ता परवीन पर पुलिस ने 50,000 रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। पिछले तीन सालों से यूपी पुलिस और एसटीएफ की दर्जनों टीमें शाइस्ता की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं, लेकिन वह आज तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रही है। अपने बेटे असद, पति अतीक और अब सबसे छोटे बेटे आबान के जनाजे तक में शाइस्ता परवीन शामिल नहीं हो सकी। शाइस्ता के साथ-साथ अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा और अतीक की बहन आयशा नूरी भी पुलिस की फाइलों में भगौड़ी और फरार चल रही हैं। कभी अतीक के घर की चारदीवारी के भीतर रहने वाली महिलाएं आज पुलिस के डर से ठिकाने बदलती फिर रही हैं।
अतीक के बेटों की बात करें तो उसका सबसे बड़ा बेटा मोहम्मद उमर सीबीआई कोर्ट में सरेंडर करने के बाद से लखनऊ की जिला जेल में बंद है। रंगदारी और अपहरण के मामले में आरोपी उमर लंबे समय से सलाखों के पीछे कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। वहीं, दूसरे नंबर का बेटा अली अहमद झांसी जेल में निरुद्ध है। अली पर भी रंगदारी और जानलेवा हमले के कई गंभीर मामले दर्ज हैं। 3 साल बाद हाल ही में दोनों भाइयों को अपने सबसे छोटे भाई आबान के अंतिम संस्कार (सुपुर्द-ए-खाक) के लिए पैरोल पर कसारी-मसारी कब्रिस्तान में एक-दूसरे से मिलने का मौका मिला, जहां दोनों भाई एक-दूसरे को देखकर फूट-फूटकर रो पड़े। अतीक के दो नाबालिग बेटों अहबान और आबान को बाल सुधार गृह में रखा गया था, जिनमें से आबान की हाल ही में बीमारी के चलते मौत हो गई।
प्रयागराज के जिस कसारी-मसारी कब्रिस्तान में कभी अतीक अहमद का हुक्म चलता था, आज उसी मिट्टी में अतीक, उसका भाई अशरफ, बेटा असद और अब सबसे छोटा बेटा आबान एक साथ दफन हैं। 2023 से 2026 के बीच बीते इन तीन सालों ने यह साबित कर दिया है कि अपराध की दुनिया का अंत हमेशा दर्दनाक और विनाशकारी होता है। जिस अतीक अहमद ने अतीक गैंग (IS-227) के बल पर अरबों की अचल संपत्तियां और खौफ का साम्राज्य खड़ा किया था, आज उसकी पत्नी भगौड़ा घोषित है, बेटे जेल में बंद हैं और उसका कुनबा पूरी तरह से बिखराव के अंतिम दौर में है।