यूपी में पंचायत सचिव की आईडी हैक कर 18 राज्यों में जारी किए 498 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, शासन तक हड़कंप

यूपी में पंचायत सचिव की आईडी हैक कर 18 राज्यों में जारी किए 498 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, शासन तक हड़कंप

उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी और डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज सेंधमारी का खुलासा हुआ है। अमरोहा जनपद के जोया विकास खंड स्थित ग्राम पंचायत तोफापुर के ग्राम पंचायत सचिव की अधिकृत लॉगिन आईडी में अज्ञात साइबर जालसाजों ने शातिराना तरीके से घुसपैठ कर ली। इस हैकिंग के जरिए महज 48 घंटे के भीतर बिना किसी स्थानीय आवेदन या सत्यापन के देश के 18 राज्यों के 498 लोगों के नाम से डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इस फर्जीवाड़े की भनक लगते ही लखनऊ से लेकर जिला मुख्यालय तक प्रशासनिक महकमे और खुफिया तंत्र में हड़कंप मच गया है। जिस ग्राम पंचायत में महीने भर में इक्का-दुक्का प्रमाण पत्रों के लिए अर्जी आती है, वहां अचानक देशभर के अलग-अलग कोनों से सैकड़ों प्रमाण पत्र जारी होने की जानकारी मिलते ही आनन-फानन में जांच टीमें गठित कर दी गई हैं।

6 और 7 अक्तूबर को चला साइबर खेल: 1939 और 1945 में जन्मे लोगों के भी बने प्रमाण पत्र

जांच में सामने आया यह फर्जीवाड़ा केवल संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे की तकनीकी चालाकी और तिथियों ने अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। जालसाजों ने 6 और 7 अक्तूबर को ग्राम पंचायत सचिव की आईडी को पूरी तरह हाईजैक कर यह कारनामा अंजाम दिया। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि इनमें सिर्फ बच्चों या युवाओं के ही नहीं, बल्कि वर्ष 1939, 1940, 1945 और 1950 में जन्म लेने वाले बुजुर्गों के भी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर दिए गए। सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया में ऐसे दशकों पुराने जन्मों के पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट या उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के स्तर से सघन भौतिक जांच और स्वीकृति अनिवार्य होती है, लेकिन जालसाजों ने पंचायत स्तर के सीआरएस पोर्टल की सुरक्षा में सेंध लगाकर सीधे पोर्टल से डिजिटल हस्ताक्षर वाले वैधानिक दिखने वाले दस्तावेज जारी कर डाले।

महज दो मोबाइल नंबरों पर आए 498 ओटीपी, दिल्ली से सिक्किम तक फैला रैकेट

इस पूरे प्रकरण में साइबर गिरोह की संगठित कार्यशैली उस वक्त उजागर हुई जब सिस्टम के ऑडिट ट्रेल की प्राथमिक पड़ताल की गई। 498 प्रमाण पत्रों के निर्माण और सत्यापन के लिए जितनी भी बार वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) जनरेट हुए, वे सभी आश्चर्यजनक रूप से केवल दो अज्ञात मोबाइल नंबरों पर भेजे गए थे। जारी किए गए 498 प्रमाण पत्रों में से सबसे अधिक 270 प्रमाण पत्र उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों जैसे चंदौली, फर्रुखाबाद, कानपुर देहात, सिद्धार्थनगर, बलिया और प्रतापगढ़ के निवासियों के नाम पर बने हैं। इसके अलावा शेष 228 प्रमाण पत्र दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और असम समेत देश के 18 विभिन्न राज्यों के नागरिकों के पते पर जारी किए गए हैं। एक सुदूर ग्रामीण इलाके की पंचायत आईडी से पूर्वोत्तर और सीमावर्ती राज्यों के नागरिकों के जन्म प्रमाण पत्र जारी होना एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट की सक्रियता की ओर सीधा इशारा करता है।

ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज: एक हफ्ते से बंद पड़ी थी सचिव की आधिकारिक लॉगिन आईडी

तोफापुर ग्राम पंचायत में वर्ष 2025 से तैनात ग्राम पंचायत सचिव अमरजीत सिंह जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण के लिए अधिकृत आईडी (UP044775RE) का संचालन करते हैं। सचिव के अनुसार, तकनीकी कारणों और सर्वर ग्लिच के चलते बीते करीब एक सप्ताह से उनकी जन्म-मृत्यु संबंधी आईडी लॉगिन नहीं हो रही थी। इस समस्या के निवारण के लिए उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से संपर्क साधा था। जब 12 अक्तूबर को तकनीकी प्रक्रिया पूरी कर आईडी दोबारा सक्रिय की गई और बुधवार को अमरजीत सिंह ने पोर्टल खोला, तो डैशबोर्ड पर 498 जारी प्रमाण पत्रों की फेहरिस्त देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने बिना एक पल गंवाए खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) जोया नीरज गर्ग को पूरे मामले की लिखित जानकारी दी। बीडीओ ने तत्काल मामले की गंभीरता को भांपते हुए जिला पंचायती राज अधिकारी (डीपीआरओ) और जिलाधिकारी को आधिकारिक रिपोर्ट भेजी।

राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध घुसपैठ पर गहरा खतरा, आधार और पासपोर्ट में दुरुपयोग की आशंका

प्रशासनिक और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म प्रमाण पत्र किसी भी भारतीय नागरिक की पहचान का सबसे प्राथमिक और अनिवार्य आधार माना जाता है। जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर ही नया आधार कार्ड, पासपोर्ट, पैन कार्ड, वोटर आईडी और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। इस तरह के अनाधिकृत प्रमाण पत्रों का सबसे बड़ा खतरा अवैध विदेशी घुसपैठ, सीमा पार से आए संदिग्धों को वैध भारतीय नागरिकता का आवरण पहनाने और फर्जी पहचान पर बैंक खाते खुलवाकर वित्तीय धोखाधड़ी या हवाला कारोबार में उपयोग किए जाने का रहता है। साथ ही सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, मुफ्त राशन और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा सब्सिडी का नाजायज लाभ उठाने के लिए भी ऐसे दस्तावेजों की खरीद-फरोख्त की जाती है। खुफिया एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि क्या इस गिरोह के तार किसी राष्ट्रविरोधी सिंडिकेट से तो नहीं जुड़े हैं।

डीएम ने बैठाई सीडीओ की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच, एनआईसी को निरस्तीकरण की सिफारिश

मामले की गंभीरता को देखते हुए अमरोहा के जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को प्रकरण की विस्तृत मजिस्ट्रेटी जांच सौंप दी है। डीपीआरओ नितिन कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत सचिव की तरफ से साइबर क्राइम थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी एक्ट की संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। इसके साथ ही जारी हुए सभी 498 फर्जी प्रमाण पत्रों की विस्तृत सूची नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (सीआरएस प्रभाग) को भेज दी गई है ताकि इन सभी प्रमाण पत्रों को केंद्रीय डेटाबेस से तुरंत निरस्त व ब्लैकलिस्ट किया जा सके। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत जनसेवा केंद्र या बिचौलिए के झांसे में न आएं और जन्म प्रमाण पत्र के लिए सरकार के आधिकारिक पोर्टल का ही उपयोग करें।