यूपी में छात्राओं को मिलेगी पेट्रोल स्कूटी: 'रानी लक्ष्मीबाई योजना' का GeM पोर्टल पर टेंडर जारी, साथ में 4 लीटर पेट्रोल और हेलमेट
उत्तर प्रदेश की मेधावी बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने और उच्च शिक्षा में उनकी राह आसान करने के लिए योगी सरकार की महत्वाकांक्षी 'रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना' धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर करीब 320 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 40,000 स्कूटियों की खरीद के लिए आधिकारिक टेंडर (बिड) जारी कर दिया है।
विधानसभा चुनाव के लोक कल्याण संकल्प पत्र में किए गए इस बड़े वादे को पूरा करने की प्रक्रिया अब बेहद तेज हो चुकी है। टेंडर जारी होने के साथ ही यह भी पूरी तरह साफ हो गया है कि छात्राओं को इलेक्ट्रिक या पेट्रोल में से कौन सी स्कूटी मिलेगी, उसके साथ क्या-क्या सुविधाएं दी जाएंगी और चयनित छात्राओं के हाथ में गाड़ी की चाबी किस महीने तक सौंप दी जाएगी।
कौन सी स्कूटी देगी सरकार? इलेक्ट्रिक या पेट्रोल?
शुरुआती चर्चाओं में इलेक्ट्रिक (EV) स्कूटी दिए जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी टेंडर की तकनीकी शर्तों ने पूरी तस्वीर साफ कर दी है:
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पेट्रोल चालित स्कूटी: सरकार ने निर्णय लिया है कि छात्राओं को BS-VI (BS6) मानक वाली पेट्रोल से चलने वाली ऑटोमैटिक स्कूटी दी जाएगी।
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पेट्रोल चुनने की वजह: सरकार का मानना है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में चार्जिंग स्टेशनों की तुलना में पेट्रोल पंप और स्थानीय सर्विस सेंटर आसानी से उपलब्ध हैं। इलेक्ट्रिक वाहन देने पर दूर-दराज की छात्राओं को भविष्य में बैटरी चार्जिंग या तकनीकी खराबी पर मेंटेनेंस की दिक्कत हो सकती थी।
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तकनीकी मानक: सभी स्कूटियां ऑटोमैटिक गियरलेस होंगी, जिनमें आधुनिक ट्यूबलेस टायर लगे होंगे ताकि पंक्चर आदि की स्थिति में छात्राओं को परेशानी न हो।
स्कूटी के साथ 4 लीटर पेट्रोल, हेलमेट और एक्सेसरीज भी फ्री
टेंडर की शर्तों के मुताबिक, चयनित कंपनी को सिर्फ गाड़ी ही नहीं, बल्कि छात्राओं की सड़क सुरक्षा और प्राथमिक उपयोग से जुड़ी कई चीजें साथ में देनी होंगी:
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मुफ्त पेट्रोल: वितरण के समय प्रत्येक स्कूटी की टंकी में 4 लीटर पेट्रोल भरकर दिया जाएगा, ताकि छात्राएं सीधे कॉलेज या घर जा सकें।
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ISI मार्क हेलमेट: सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाला IS 4151:2015 प्रमाणित हेलमेट अनिवार्य रूप से दिया जाएगा।
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फुल एक्सेसरीज किट: स्कूटी के साथ गार्ड किट, ग्रिप कवर, किक रबर और प्रीमियम सीट कवर फिट करके देना वेंडर के लिए अनिवार्य किया गया है।
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पंजीकरण व बीमा: वाहन का औपचारिक रजिस्ट्रेशन (RTO) और बीमा कवर का खर्च भी योजना के नियमों के तहत वहन किया जाएगा।
कब तक मिलेगी स्कूटी की चाबी? (वितरण की समयसीमा)
उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा तय की गई समय-सारिणी के अनुसार खरीद प्रक्रिया को बहुत कम समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है:
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टेंडर प्रक्रिया: संभावित वेंडर्स के साथ 21 सितंबर को प्री-बिड मीटिंग होगी, जिसके बाद 26 सितंबर तक बिड जमा कर 27 सितंबर को टेंडर खोला जाएगा।
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100 दिनों में डिलीवरी की शर्त: सितंबर के अंत तक खरीद प्रक्रिया फाइनल होते ही एल-1 चुनी गई कंपनी को प्रदेश के सभी 75 जिलों और मंडल मुख्यालयों में स्कूटियों की खेप पहुंचाने के लिए अधिकतम 100 दिनों की मोहलत दी जाएगी।
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चाबी मिलने की तारीख: अधिकारियों के अनुसार, यदि तय शेड्यूल पर आपूर्ति पूरी होती है, तो जनवरी 2027 के अंतिम सप्ताह तक जिला स्तर पर भव्य कार्यक्रमों के जरिए पात्र मेधावी छात्राओं को स्कूटी की चाबी सौंप दी जाएगी।
किन्हें मिलेगा इस योजना का लाभ? (पात्रता नियम)
योजना का लाभ राज्य की हर छात्रा को नहीं मिलेगा, इसके लिए कड़े मेरिट नियम तय किए गए हैं:
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उत्तर प्रदेश की मूल निवासी: छात्रा का यूपी का स्थायी नागरिक होना आवश्यक है।
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स्नातक (Graduation) की टॉप 5% मेधावी: राज्य विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय या राजकीय/सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों से शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं में से संस्थान की शीर्ष 5 प्रतिशत मेरिट लिस्ट में शामिल छात्राओं को ही चुना जाएगा।
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परिवार की आय सीमा: परिवार की कुल वार्षिक आय 12 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए।
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सीधे फॉर्म भरने की जरूरत नहीं: छात्राओं को कहीं अलग से लाइन लगाने की जरूरत नहीं होगी; संबंधित कॉलेज और विश्वविद्यालय ही मेरिट सूची तैयार कर ई-हस्ताक्षर के साथ इसे विभागीय पोर्टल पर अपलोड करेंगे, जिसके बाद जिला प्रशासन सत्यापन करेगा।