लखनऊ को भीषण जाम से मिलेगी बड़ी राहत: दिलकुशा रेलवे क्रॉसिंग पर बनेगा नया आरओबी, आज से बदला ट्रैफिक रूट

लखनऊ को भीषण जाम से मिलेगी बड़ी राहत: दिलकुशा रेलवे क्रॉसिंग पर बनेगा नया आरओबी, आज से बदला ट्रैफिक रूट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दैनिक आवागमन करने वाले लाखों शहरवासियों, दैनिक यात्रियों और वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और बहुप्रतीक्षित राहत भरी खबर सामने आई है। शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील माने जाने वाले दिलकुशा रेलवे क्रॉसिंग पर आखिरकार नए रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के निर्माण कार्य को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दिलकुशा क्रॉसिंग वह महत्वपूर्ण कड़ी है जो कैंटोनमेंट, हजरतगंज, गोमती नगर विस्तार, तेलीबाग और सुल्तानपुर रोड को आपस में जोड़ती है। रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों की लगातार आवाजाही के चलते यह फाटक दिन में दर्जनों बार बंद होता था, जिसके कारण दोनों तरफ वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग जाती थीं और लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता था। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम (UPSBC) और उत्तर रेलवे के संयुक्त तत्वावधान में शुरू हो रहे इस भव्य आरओबी प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इस पूरे क्षेत्र को हमेशा के लिए भीषण जाम और प्रदूषण की समस्या से स्थाई मुक्ति मिल जाएगी।

आज से नया ट्रैफिक डायवर्जन लागू: इन प्रमुख वैकल्पिक मार्गों से गुजरेंगे वाहन

आरओबी निर्माण के लिए भारी मशीनरी की तैनाती, पिलर की खोदाई और गर्डर लॉन्चिंग के सुरक्षित संचालन को ध्यान में रखते हुए लखनऊ ट्रैफिक पुलिस कमिश्नरेट ने दिलकुशा मार्ग पर आज से व्यापक स्तर पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया है। जब तक निर्माण कार्य का प्राथमिक ढांचा तैयार नहीं हो जाता, तब तक इस मार्ग पर सामान्य वाहनों की सीधी आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। यातायात पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक रूट चार्ट के अनुसार, हजरतगंज और बंदरियाबाग की तरफ से आकर दिलकुशा क्रॉसिंग होकर कैंट या तेलीबाग की ओर जाने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों को अब लालबत्ती चौराहा, दिलकुशा गार्डन मोड़ और महात्मा गांधी मार्ग के वैकल्पिक संपर्क मार्गों से डायवर्ट किया जा रहा है। वहीं, तेलीबाग, तोपखाना और सदर बाजार की दिशा से हजरतगंज जाने वाले यातायात को कमांड अस्पताल रोड, नेहरू रोड और करियप्पा चौराहे की तरफ मोड़ा गया है। भारी कमर्शियल वाहनों, लोडिंग ट्रकों और बसों के प्रवेश पर इस पूरे दायरे में दिन के समय पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिन्हें शहीद पथ और 1090 चौराहा लिंक रोड होकर अपने गंतव्य तक भेजा जा रहा है।

कैंट, गोमती नगर और हजरतगंज के लाखों दैनिक यात्रियों को मिलेगा सीधा फायदा

दिलकुशा क्रॉसिंग पर नए आरओबी का निर्माण केवल स्थानीय कैंट क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मध्य और पूर्वी लखनऊ के यातायात नेटवर्क के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। इस क्रॉसिंग से प्रतिदिन औसतन 50 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं, जिनमें सरकारी कर्मचारी, सेना के अधिकारी, स्कूली बच्चे, व्यापारी और वीआईपी मूवमेंट शामिल रहते हैं। वर्तमान में फाटक बंद होने की स्थिति में ऑफिस और स्कूल जाने वाले लोगों का कीमती समय बर्बाद होता था। आरओबी बन जाने के बाद हजरतगंज, राजभवन, कालिदास मार्ग और बंदरियाबाग से सीधे कैंट, पीजीआई, शहीद पथ और चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (अमौसी) की ओर जाने वाले यात्रियों को सिग्नल-फ्री और नॉन-स्टॉप कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे न केवल यात्रा समय में 20 से 25 मिनट की भारी बचत होगी, बल्कि शहर के अन्य वैकल्पिक मार्गों जैसे 1090 चौराहा, समता मूलक चौक और लोहिया पथ पर भी वाहनों का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।

निर्माण की तकनीकी रूपरेखा, बजट और समय सीमा: सेतु निगम व रेलवे की संयुक्त पहल

इस महत्वाकांक्षी ओवरब्रिज परियोजना को आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों और भविष्य के 50 वर्षों के ट्रैफिक लोड को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), सेतु निगम और रेलवे प्रशासन के बीच आपसी समन्वय के बाद इस प्रोजेक्ट के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। इस परियोजना के तहत रेलवे ट्रैक के ऊपर का हिस्सा रेलवे इंजीनियरिंग विंग द्वारा तैयार किया जाएगा, जबकि दोनों तरफ की एप्रोच रोड, रैंप और सर्विस लेन का निर्माण राज्य सेतु निगम करेगा। ओवरब्रिज को बहु-लेन और उच्च क्षमता वाले कंक्रीट गार्डर से लैस बनाया जा रहा है ताकि भारी वाहनों की आवाजाही भी सुरक्षित रूप से हो सके। निर्माण एजेंसी को 18 से 24 महीने की निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्ता मानकों के साथ काम पूरा करने का कड़ा लक्ष्य दिया गया है। इसके साथ ही नीचे रहने वाले स्थानीय निवासियों और दुकानदारों की सुविधा के लिए दोनों तरफ चौड़ी सर्विस रोड और अत्याधुनिक ड्रेनेज सिस्टम भी विकसित किया जाएगा।

एंबुलेंस, स्कूल वाहनों और आम जनता के लिए ट्रैफिक पुलिस की विशेष एडवाइजरी

निर्माण कार्य के पहले दिन से ही सड़कों पर अव्यवस्था न फैले, इसके लिए लखनऊ कमिश्नरेट ट्रैफिक पुलिस ने जमीन पर अतिरिक्त ट्रैफिक वार्डन, होमगार्ड और यातायात उप-निरीक्षकों की विशेष टीमें तैनात कर दी हैं। दिलकुशा की ओर जाने वाले सभी प्रमुख चौराहों पर बड़े-बड़े साइनेज और दिशा-सूचक बोर्ड लगाए गए हैं ताकि बाहर से आने वाले वाहन चालकों को किसी प्रकार के भटकाव का सामना न करना पड़े। आपातकालीन सेवाओं जैसे एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और शव वाहनों के लिए एक विशेष 'ग्रीन कॉरिडोर' और निर्बाध लेन आरक्षित की गई है ताकि गंभीर मरीजों को कमांड अस्पताल या सिविल अस्पताल ले जाने में एक मिनट की भी देरी न हो। इसके अलावा, कैंट क्षेत्र के प्रमुख स्कूलों में जाने वाली वैन और बसों के प्रबंधन के साथ समन्वय बैठक की गई है और उन्हें सुबह तथा दोपहर के समय डायवर्जन नियमों का पालन करते हुए निर्धारित वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

राजधानी के सुगम यातायात और स्मार्ट मोबिलिटी की दिशा में ऐतिहासिक कदम

लखनऊ के लगातार बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या में हो रहे बेतहाशा इजाफे के बीच बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। दिलकुशा आरओबी शहर के उन आखिरी प्रमुख रेलवे क्रॉसिंग बॉटलनेक्स में से एक था, जहां प्रतिदिन लंबा ट्रैफिक जाम लगता था। इस पुल के निर्माण से न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी बल्कि ईंधन की भी भारी बचत होगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण और नगर निगम भी इस परियोजना के समानांतर आसपास के चौराहों का सौंदर्यीकरण और स्मार्ट लाइटिंग का काम पूरा करेंगे। शहरवासियों से अपील की गई है कि वे निर्माण अवधि के दौरान धैर्य बनाए रखें, यातायात पुलिस द्वारा जारी डायवर्जन प्लान का पूरी तरह पालन करें और शहर को जाममुक्त व आधुनिक बनाने की इस विकास यात्रा में अपना पूर्ण सहयोग दें।