MLC चुनाव से पहले सपा को तगड़ा झटका: BJP ने बैलेट पेपर से जीती बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष सीट, कांग्रेस की जमानत जब्त
उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही संगठन को धार देने और मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। इसी सियासी रस्साकसी और जोर-आजमाइश के बीच कानपुर जनपद से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है, जिसने समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों को सकते में डाल दिया है। कानपुर की ऐतिहासिक नगरी बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक और एकतरफा जीत दर्ज की है। इस चुनाव की सबसे अहम और उल्लेखनीय बात यह रही कि मतदान किसी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से नहीं, बल्कि पारंपरिक मतपत्र यानी बैलेट पेपर के जरिए कराया गया था। बैलेट पेपर से हुए इस सीधे मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी ने सपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को भारी अंतर से पटखनी देकर यह साबित कर दिया है कि जमीनी स्तर पर पार्टी का जनाधार कितना मजबूत है।
राना समरेंद्र सिंह की एकतरफा जीत और सपा प्रत्याशी की करारी शिकस्त
बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार राना समरेंद्र सिंह ने पहले राउंड से ही अपने प्रतिद्वंद्वियों पर मजबूत बढ़त बना ली थी। मतगणना की शुरुआत से लेकर अंतिम पांचवें चक्र तक यह बढ़त लगातार बढ़ती ही चली गई और अंततः राना समरेंद्र सिंह 2483 मतों के भारी-भरकम अंतर से विजयी घोषित किए गए। चुनाव अधिकारी अरुणेश प्रताप सिंह द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विजेता भाजपा प्रत्याशी राना समरेंद्र सिंह को कुल 4210 मत प्राप्त हुए। वहीं, समाजवादी पार्टी द्वारा खुलकर समर्थन दिए गए निर्दलीय उम्मीदवार आदर्श द्विवेदी को महज 1727 मतों से ही संतोष करना पड़ा। इस परिणाम ने न केवल मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के क्षेत्रीय समीकरणों को ध्वस्त कर दिया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि स्थानीय निकाय स्तर पर मतदाताओं का विश्वास किस दिशा में झुक रहा है।
बैलेट पेपर से मतदान: विपक्ष के ईवीएम राग पर करारा राजनीतिक तमाचा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब भी भारतीय जनता पार्टी को बड़ी चुनावी जीत मिलती है, विपक्षी दल अक्सर ईवीएम की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने लगते हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कई शीर्ष नेता बार-बार चुनावों को मतपत्र यानी बैलेट पेपर से कराने की वकालत करते रहे हैं। लेकिन बिठूर नगर पंचायत का यह उपचुनाव पूरी तरह से राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा बैलेट पेपर के माध्यम से संपन्न कराया गया था। 13 अक्तूबर को नगर पंचायत क्षेत्र के मतदाताओं ने मतपत्र पर मुहर लगाकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। ऐसे में बैलेट पेपर के जरिए भाजपा की यह बंपर जीत विपक्षी दलों के उस विमर्श को सीधा झटका देती है, जिसमें चुनावी नतीजों का ठीकरा मशीनों पर फोड़ा जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस जीत के बाद भाजपा को एमएलसी चुनाव और भविष्य के स्थानीय चुनावों में विपक्ष के नैरेटिव की हवा निकालने का एक बेहद सशक्त हथियार मिल गया है।
कांग्रेस समेत पांच प्रत्याशियों की जमानत जब्त, सपा बचा सकी इज्जत
इस उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी की स्थिति बेहद दयनीय नजर आई। राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की दुहाई देने वाली कांग्रेस के प्रत्याशी प्रदीप कुमार द्विवेदी को बिठूर में महज 58 वोट ही नसीब हो सके। स्थिति इतनी खराब रही कि कांग्रेस उम्मीदवार अपनी चुनावी जमानत तक नहीं बचा पाए। मतगणना में कुल पड़े 6192 मतों में से कांग्रेस उम्मीदवार समेत पांच अन्य प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों में हर्ष कुमार द्विवेदी को 25, सरोज देवी को 16, प्रदीप कुमार दिवाकर को 11 वोट मिले, जबकि विजेता प्रत्याशी की पत्नी सीमा सिंह (जिन्होंने डमी प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भरा था) को 8 वोट प्राप्त हुए। पूरे चुनाव में सपा समर्थित आदर्श द्विवेदी ही एकमात्र ऐसे विपक्षी प्रत्याशी रहे जो अपनी जमानत बचाने में सफल रहे। इसके अलावा 130 वोट विभिन्न कारणों से अवैध पाए गए, जबकि सात जागरूक मतदाताओं ने नोटा (NOTA) का विकल्प चुना।
26 साल से कायम सियासी दुर्ग: मां की विरासत को आगे बढ़ाएंगे बड़े बेटे समरेंद्र
बिठूर नगर पंचायत अध्यक्ष की यह कुर्सी पिछले 26 वर्षों से लगातार एक ही राजनीतिक परिवार के पास रही है। वर्ष 2000 में डॉ. निर्मला सिंह ने पहली बार इस पद पर जीत दर्ज की थी और उसके बाद से उन्होंने लगातार पांच बार इस सीट पर अपना परचम लहराकर एक अटूट रिकॉर्ड बनाया था। वे लंबे समय तक बिठूर के स्थानीय विकास और जनसेवा की धुरी बनी रहीं। कुछ समय पहले डॉ. निर्मला सिंह के असामयिक निधन के कारण ही यह अध्यक्ष पद रिक्त हुआ था, जिसके चलते प्रशासन को उपचुनाव कराने पड़े थे। भाजपा ने उनकी समृद्ध राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उनके बड़े बेटे राना समरेंद्र सिंह को सौंपी, जिस पर जनता ने भारी मतदान करके अपनी मुहर लगा दी। राना समरेंद्र सिंह के छोटे भाई अभिजीत सिंह सांगा बिठूर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के मौजूदा विधायक हैं। जब जीत के बाद समरेंद्र सिंह का काफिला निकला, तो विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने बड़े भाई के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और जीत का श्रेय कार्यकर्ताओं और जनता को समर्पित किया।
नतीजों के ऐलान के साथ गूंजे 'जय श्री राम' के नारे, जश्न में डूबा बिठूर
जैसे ही मतगणना स्थल पर पांचवें राउंड की गिनती पूरी हुई और आधिकारिक रूप से भाजपा की विजय का ऐलान हुआ, पूरा परिसर 'जय श्री राम' और 'भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद' के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। मतगणना केंद्र के बाहर भारी संख्या में जुटे भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर जश्न मनाया और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर व मिठाई बांटकर बधाई दी। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह सतर्क था। पांचवें चक्र की आधिकारिक घोषणा से ठीक पहले ही हार का अहसास होते ही सपा समर्थित प्रत्याशी आदर्श द्विवेदी मतगणना कक्ष से बाहर निकल आए, जिन्हें पुलिस बल की सुरक्षा में उनके आवास तक पहुंचाया गया। इसके बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष राना समरेंद्र सिंह कार्यकर्ताओं के विशाल हुजूम के साथ पैदल ही अपने पैतृक निवास की ओर रवाना हुए, जहां रास्ते भर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।