यूपी की सियासत में बड़ा भूचाल: पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप ने फेसबुक पर दिया इस्तीफा

यूपी की सियासत में बड़ा भूचाल: पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप ने फेसबुक पर दिया इस्तीफा

उत्तर प्रदेश के रुहेलखंड क्षेत्र की राजनीति में उस वक्त जबर्दस्त भूचाल आ गया, जब आंवला लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप ने सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर एक भावुक और तीखी पोस्ट साझा करते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपने इस्तीफे का औपचारिक ऐलान कर दिया। कश्यप समुदाय के सबसे कद्दावर चेहरों में गिने जाने वाले पूर्व सांसद के इस अचानक उठाए गए सियासी कदम ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक को सन्न कर दिया है। पूर्व सांसद के इस्तीफे की खबर सार्वजनिक होते ही उनके गृह जनपद बरेली, आंवला, बदायूं और शाहजहांपुर के राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। नेता के समर्थन में लामबंद होते हुए सैकड़ों वरिष्ठ पदाधिकारियों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों और निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने भी सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ने का खुला ऐलान कर बगावती बिगुल फूंक दिया है।

फेसबुक पोस्ट के जरिए छलका दर्द, उपेक्षा और अनदेखी का लगाया आरोप

धर्मेन्द्र कश्यप ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल पर साझा किए गए त्यागपत्र में सीधे तौर पर संगठन के भीतर लगातार हो रही उपेक्षा और समर्पित कार्यकर्ताओं के अपमान को अपनी इस बगावत की मुख्य वजह बताया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि दशकों तक संगठन को खून-पसीने से सींचने और विपरीत परिस्थितियों में भी पार्टी का झंडा बुलंद रखने के बावजूद पिछले कुछ समय से चंद स्वार्थी और चाटुकार तत्वों के इशारे पर निष्ठावान नेताओं को हाशिए पर धकेला जा रहा था। उन्होंने कहा कि जब आत्मसम्मान और अपने क्षेत्र की जनता के स्वाभिमान पर आंच आने लगे, तो पद और दल का मोह त्याग देना ही सच्चा जनधर्म होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भारी मन से यह फैसला ले रहे हैं, लेकिन अब घुटन भरे माहौल में एक पल भी काम करना संभव नहीं रह गया था।

सैकड़ों पदाधिकारियों ने दिया सामूहिक त्यागपत्र, सड़कों पर उतरे समर्थक

पूर्व सांसद के फेसबुक पोस्ट के सामने आते ही आंवला और बरेली मंडल में उनके समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। आंवला स्थित उनके आवास और जनसंपर्क कार्यालय पर हजारों की तादाद में समर्थक और क्षेत्रीय नेता इकट्ठा हो गए। कार्यकर्ताओं ने पार्टी विरोधी नारेबाजी करते हुए स्थानीय संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों पर मनमानी करने और पुराने समर्पित चेहरों को किनारे लगाने के आरोप लगाए। देखते ही देखते कई मंडल अध्यक्षों, युवा मोर्चा के संयोजकों और जिला कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्यों ने अपने-अपने त्यागपत्र लिखकर सोशल मीडिया पर अपलोड करना शुरू कर दिया। समर्थकों का कहना है कि जहां धर्मेन्द्र कश्यप का सम्मान नहीं होगा, वहां उनका कोई भी समर्थक एक क्षण के लिए भी नहीं टिकेगा।

रुहेलखंड और तराई में पिछड़े वर्ग के सबसे मजबूत चेहरों में गिनती

धर्मेन्द्र कश्यप का राजनीतिक कद केवल आंवला तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और कासगंज के विस्तृत तराई-रुहेलखंड इलाके में कश्यप, मल्लाह, निषाद, बिंद और बिंद-केवट बिरादरी के बीच उनकी जबरदस्त और निर्विवाद पकड़ मानी जाती है। वे दो बार सांसद और इससे पहले कई बार विधायक रहकर अपनी संगठनात्मक क्षमता और जनाधार का लोहा मनवा चुके हैं। ऐसे कद्दावर और जमीन से जुड़े ओबीसी नेता का इस तरह सार्वजनिक रूप से नाराज होकर अलग होना आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों और क्षेत्रीय विधानसभा समीकरणों के लिहाज से संगठन के लिए एक बड़ा रणनीतिक और सामाजिक झटका साबित हो सकता है।

आगामी सियासी रुख पर टिकीं निगाहें, विरोधी खेमे में बढ़ी हलचल

धर्मेन्द्र कश्यप द्वारा फेसबुक पर इस्तीफे का बम फोड़े जाने के बाद अब पूरे प्रदेश की निगाहें उनके अगले राजनीतिक कदम पर टिक गई हैं। सियासी गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वे किसी अन्य मजबूत क्षेत्रीय दल का दामन थामेंगे या फिर निर्दलीय ताकत के रूप में नए सामाजिक मोर्चे का गठन करेंगे। इस्तीफे के बाद से ही विरोधी खेमों के कई दिग्गज नेताओं ने उनके साथ संपर्क साधना शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, संगठन के संकटमोचक नेता भी स्थिति को संभालने और उन्हें मनाने की कोशिशों में जुट गए हैं। हालांकि, समर्थकों के आक्रामक रुख और कश्यप के अडिग तेवरों को देखते हुए सुलह की गुंजाइश बेहद कम नजर आ रही है।