लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर नई मुसीबत: एलिवेटेड रोड से गिरने लगा निर्माण का मलबा
राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर के बीच आवागमन को सुगम और तेज बनाने के लिए तैयार किए जा रहे महत्वकांक्षी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे परियोजना पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड हिस्से के निर्माण कार्य के दौरान ऊपर से भारी मलबा, कंक्रीट के टुकड़े और निर्माण सामग्री नीचे पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-27) पर गिरने की कई घटनाएं सामने आई हैं। दिन-रात हजारों वाहनों की आवाजाही वाले इस व्यस्त मार्ग पर ऊपर से गिरते पत्थरों और मलबे की वजह से नीचे चल रहे दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों में भारी दहशत का माहौल है। सुरक्षा जाली और बैरिकेडिंग के अभाव को लेकर स्थानीय लोगों और दैनिक यात्रियों में निर्माण एजेंसी व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के खिलाफ गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
वाहनों की छतों पर गिरे कंक्रीट के टुकड़े, बाल-बाल बचे दोपहिया सवार
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय वाहन चालकों के अनुसार, बंथरा, जुनाबगंज और बनी के आसपास एलिवेटेड रोड के पिलर और गर्डर लॉन्चिंग व स्लैब ढलाई का काम चल रहा है। पिछले दो दिनों में कई बार ऊपर से कंक्रीट का सूखा मलबा और लोहे के छोटे टुकड़े नीचे सड़क पर आ गिरे।
एक घटना में कानपुर की ओर जा रही एक कार की छत पर अचानक कंक्रीट का भारी टुकड़ा आ गिरा, जिससे वाहन की विंडशील्ड चटक गई और छत पिचक गई। गनीमत रही कि उस वक्त पीछे कोई दोपहिया वाहन चालक नहीं था, अन्यथा एक बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता था। राहगीरों का आरोप है कि निर्माण स्थल के नीचे से गुजरते वक्त हर समय जान हथेली पर रखकर निकलना पड़ता है।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी: न मजबूत सेफ्टी नेट, न ट्रैफिक मार्शल
नियमों के अनुसार, किसी भी चालू सड़क या हाईवे के ऊपर जब एलिवेटेड स्ट्रक्चर का निर्माण होता है, तो नीचे से गुजरने वाले ट्रैफिक को सुरक्षित रखने के लिए कई कड़े प्रोटोकॉल लागू करने होते हैं:
-
मजबूत सेफ्टी नेट (सुरक्षा जाली): निर्माण गर्डर्स के नीचे बहुस्तरीय भारी सेफ्टी नेट और स्टील शीट की सुरक्षा परत लगाई जानी चाहिए, ताकि कोई भी औजार या कंक्रीट नीचे न गिरे।
-
ट्रैफिक डायवर्जन और मार्शल: जिस हिस्से के ऊपर भारी मशीनरी या स्लैब का काम चल रहा हो, वहां नीचे ट्रैफिक को धीमा करने या थोड़े समय के लिए सुरक्षित लेन में मोड़ने के लिए पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक मार्शलों की तैनाती अनिवार्य है।
-
चेतावनी बोर्ड: कार्य क्षेत्र से 200 से 500 मीटर पहले ही गति सीमा और सुरक्षा चेतावनी के स्पष्ट रिफ्लेक्टिव बोर्ड होने चाहिए।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था ने केवल खानापूर्ति के लिए कुछ जगहों पर बेहद हल्की और फटी हुई जालियां लगा रखी हैं, जो ऊपर से गिरने वाले पत्थरों और मलबे का वजन संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं।
बारिश के बाद कंक्रीट के ढीले होने की आशंका
इंजीनियरिंग जानकारों का मानना है कि हाल ही में हुई मानसूनी बारिश और धूप के उतार-चढ़ाव के कारण एलिवेटेड स्लैब के किनारों पर जमा अतिरिक्त सूखा कंक्रीट और ग्रिल की शटरिंग का मलबा ढीला पड़ गया है। जब ऊपर भारी डंपर या क्रेन का मूवमेंट होता है, तो कंपन (वाइब्रेशन) के चलते यह मलबा सीधे नीचे सड़क पर आ गिरता है। यदि निर्माण एजेंसी ने तुरंत पूरे स्ट्रेच की जांच कर अतिरिक्त मलबे को साफ नहीं कराया, तो कभी भी गंभीर सड़क दुर्घटना हो सकती है।
NHAI ने लिया संज्ञान, कार्यदायी संस्था को नोटिस की तैयारी
मामले के तूल पकड़ने और सोशल मीडिया पर तस्वीरें व वीडियो वायरल होने के बाद एनएचएआई (NHAI) के अधिकारियों ने स्थिति का संज्ञान लिया है। परियोजना निदेशक कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, संबंधित कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर को सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने के लिए कड़ी फटकार लगाई गई है।
अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि जहां भी एलिवेटेड कार्य प्रगति पर है, वहां तुरंत प्रभाव से मजबूत स्टील शीट्स और डबल-लेयर सेफ्टी नेट्स लगाए जाएं। साथ ही जब तक सुरक्षा इंतजाम पुख्ता नहीं हो जाते, तब तक संबंधित हिस्सों के नीचे सुरक्षा गार्ड तैनात कर ट्रैफिक की गति को नियंत्रित किया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।