कानपुर में गंगा के रौद्र रूप से 12 गांवों में कैद हुए लोग, तो मुरादाबाद में रामगंगा का घटा जलस्तर

कानपुर में गंगा के रौद्र रूप से 12 गांवों में कैद हुए लोग, तो मुरादाबाद में रामगंगा का घटा जलस्तर

उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मानसूनी बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी का असर दो विपरीत रूपों में सामने आ रहा है। एक तरफ औद्योगिक नगरी कानपुर में गंगा नदी का रौद्र रूप तबाही का कारण बना हुआ है, जहां खतरे के निशान से ऊपर बह रही नदी ने कटरी के एक दर्जन गांवों को जलमग्न कर दिया है और हजारों लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी तरफ, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल के लोगों के लिए राहत भरी खबर है, जहां पिछले दिनों उफान पर रहीं रामगंगा, ढेला और गागन नदियों का जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। राज्य का राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग दोनों ही क्षेत्रों की स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर बनाए हुए है।

कानपुर की कटरी में बिगड़े हालात: 12 गांवों की गलियों में चल रही नावें, घरों में कैद हुए लोग

कानपुर में गंगा बैराज पर पानी का भारी दबाव बनने से स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। नरौरा और हरिद्वार से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी के कारण गंगा का जलस्तर खतरे के लाल निशान को पार कर चुका है। बैराज के सभी गेट खुले होने के बावजूद डाउनस्ट्रीम के निचले इलाकों में पानी तेजी से भर गया है।

कटरी क्षेत्र के प्रमुख गांव—चैनपुरवा, प्यारेपुरवा, बनियापुरवा, डिग्गीपुरवा, ईश्वर का पुरवा, जुहीखा और सबलपुर समेत 12 से अधिक गांवों की रिहायशी बस्तियों में चार से पांच फीट तक बाढ़ का पानी घुस चुका है। मुख्य संपर्क मार्गों और खड़ंजों के डूब जाने के कारण गांवों का कानपुर शहर से जमीनी संपर्क पूरी तरह टूट गया है। लोग घरों की दूसरी मंजिलों और छतों पर शरण लिए हुए हैं और बाहर निकलने के लिए केवल नावों का सहारा बचा है। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जल पा रहे हैं, जिससे भोजन और पीने के साफ पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

मवेशियों के चारे पर आफत, संक्रामक रोगों और जहरीले जीवों का बढ़ा खतरा

कानपुर के बाढ़ प्रभावित कटरी इलाकों में ग्रामीणों के साथ-साथ मवेशियों के जीवन पर भी भारी आफत आन पड़ी है। खेतों में खड़ी बाजरा, मक्का और सब्जियों की फसलें पूरी तरह पानी में डूबकर सड़ने लगी हैं, जिससे हरे चारे का भारी अभाव हो गया है। ग्रामीण अपने पालतू पशुओं को लेकर ऊंचे बंधों और पक्की सड़कों के किनारे तिरपाल डालकर रहने को विवश हैं।

पानी के भराव के कारण जहरीले कीड़े-मकोड़े और सांप घरों की छतों तक पहुंच रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत है। जलभराव के बीच दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों—डायरिया, बुखार और त्वचा संक्रमण के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने नावों के जरिए ब्लीचिंग पाउडर, क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस के पैकेट बांटने का काम शुरू किया है।

प्रशासन ने उतारी मोटरबोट, राहत शिविरों में पहुंचाए जा रहे भोजन के पैकेट

कानपुर जिला प्रशासन ने हालात को देखते हुए एनडीआरएफ (NDRF) और जल पुलिस के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान छेड़ दिया है। कटरी के अति-संवेदनशील इलाकों में 15 से अधिक मोटरबोट और देशी नावें उतारी गई हैं, जिनके माध्यम से बीमारों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया जा रहा है।

प्रभावित क्षेत्रों के नजदीकी सरकारी स्कूलों और पंचायत भवनों में स्थापित बाढ़ राहत शिविरों में विस्थापित परिवारों के रहने और भोजन की व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत सामग्री और लंच पैकेट के वितरण में किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए और प्रभावित इलाकों में लगातार पेट्रोलिंग जारी रखी जाए।

मुरादाबाद में राहत की सांस: रामगंगा और गागन का जलस्तर घटा, उतरा बाढ़ का पानी

कानपुर के विपरीत, मुरादाबाद जनपद में बाढ़ से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। उत्तराखंड के पहाड़ी कैचमेंट एरिया में बारिश थमने के बाद मुरादाबाद से होकर गुजरने वाली रामगंगा, कोसी, ढेला और गागन नदियों के जलस्तर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

नदियों का पानी अब चेतावनी बिंदु से काफी नीचे आ चुका है। मूंढापांडे, कांठ और ठाकुरद्वारा क्षेत्र के जिन दर्जनों गांवों के संपर्क मार्गों और खेतों में पिछले दिनों पानी भर गया था, वहां से पानी तेजी से उतर रहा है। जलस्तर घटने से संपर्क मार्ग दोबारा बहाल हो रहे हैं, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, पानी उतरने के बाद खेतों में जमा गाद और सिल्ट के कारण फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व विभाग की टीमें सर्वे में जुट गई हैं।

स्वास्थ्य विभाग का मुरादाबाद में अलर्ट: जलभराव के बाद फॉगिंग और दवा वितरण तेज

मुरादाबाद प्रशासन अब पानी उतरने के बाद पैदा होने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में जुट गया है। जलस्तर कम होने के बाद रुके हुए पानी से मच्छर जनित बीमारियों—डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के निर्देश पर प्रभावित गांवों में विशेष मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं और बड़े पैमाने पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव व फॉगिंग कराई जा रही है।

ग्रामीणों को पानी उबालकर पीने और साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। एक तरफ जहां मुरादाबाद अब धीरे-धीरे सामान्य जनजीवन की ओर लौट रहा है, वहीं कानपुर में प्रशासन के सामने अगले कुछ दिनों तक गंगा के उफान से निपटना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।